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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
सुकमा/बीजापुर, 3 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों के साथ शनिवार को दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 से अधिक नक्सली मारे गए। पुलिस ने यह जानकारी दी।
बताया गया कि सुरक्षाबलों ने सुकमा जिले में 10 से ज्यादा नक्सलियों को तथा पड़ोसी बीजापुर जिले में 4 अन्य नक्सलियों को मार गिराया।
पुलिस के मुताबिक सुकमा जिले में दक्षिणी क्षेत्र के जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। उन्होंने कहा, 'अब तक 10 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया गया है। अभियान अब भी जारी है। इस संबंध में विस्तार से जानकारी बाद में दी जाएगी।
बताया गया कि बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराया। बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के दल को खोजी अभियान में रवाना किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच शनिवार सुबह पांच बजे से रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी है। मुठभेड़ स्थल से अब तक दो नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। अभियान अब भी जारी है इसलिए मुठभेड़ के स्थान, अभियान में शामिल सुरक्षाबलों की संख्या तथा अन्य संवेदनशील जानकारी इस समय साझा नहीं की जा सकती ताकि अभियान में शामिल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
पिछले वर्ष सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 285 नक्सलियों को मार गिराया था।
नक्सलवाद की अंधेरी रात अंतिम चरण में-साय
सीएम विष्णु देव साय ने एक्स पर लिखा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने निर्णायक सफलता हासिल करते हुए 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया है। सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मज़बूत जमीनी पकड़ के चलते यहाँ माओवादी नेटवर्क तेज़ी से ढह रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब भरोसे, विकास और सुरक्षा के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता, सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति और जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।
हमारी सरकार का संदेश स्पष्ट है- जो अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण करें, पुनर्वास नीति अपनाएँ और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लौटें। अन्यथा सरकार और सुरक्षा बल अपने दायित्व का निर्वहन करने को पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं। यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात का अंतिम चरण है, अब बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।


