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-इमरान क़ुरैशी
महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में एक ईसाई पादरी की गिरफ़्तारी को लेकर सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट (एलडीएफ़) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (यूडीएफ़) के नेताओं ने कड़ी आलोचना की है.
महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को अमरावती शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर वरुड में पादरी सुधीर विलियम को गिरफ़्तार किया था. उस समय वह एक सभा को संबोधित कर रहे थे. यह कार्रवाई लक्ष्मण शेडे की शिकायत पर की गई, जिसमें वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का भी ज़िक्र है.
शिकायत के मुताबिक, वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बैठक पर आपत्ति जताई थी, जो रितेश बॉन्ड्रे के घर के सामने लगाए गए टेंट में हो रही थी. वहीं पादरी के समर्थन में आए कई अन्य लोगों को भी पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया गया.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस गिरफ़्तारी को “बेहद परेशान करने वाला” बताया.
उन्होंने कहा, “यह संघ परिवार की उस चिंताजनक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर ध्रुवीकरण बढ़ाने की कोशिश की जाती है, जैसा कि जबलपुर में देखा गया. ऐसी कार्रवाइयां संविधान से मिली आज़ादियों को कमज़ोर करती हैं.”
बीजेपी पर सबसे तीखा हमला कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने किया.
उन्होंने कहा, “हफ़्ते दर हफ़्ते, बीजेपी शासित राज्यों में ईसाइयों को सिर्फ़ अपने धर्म का पालन करने के लिए चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. यह साफ़ संकेत है कि जहां-जहां बीजेपी सत्ता में है, वहां वह धर्मांतरण के झूठे बहाने बनाकर राज्य मशीनरी का इस्तेमाल कर ईसाइयों को परेशान करती है.”
वहीं, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. सतीशन ने कहा कि रात 8 बजे प्रार्थना सभा के दौरान गिरफ़्तारियां की गईं.
उन्होंने कहा, “यह घटना बेहद परेशान करने वाली है और संविधान द्वारा गारंटी दिए गए मौलिक अधिकारों, ख़ासकर धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की आज़ादी के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है.”
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से शब्द कहना) के तहत मामले दर्ज किए थे. बाद में अदालत ने सभी अभियुक्तों को रिहा कर दिया. (bbc.com/hindi)


