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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 30 नवंबर। सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बाक्साइट खदानों के लिए रविवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया। जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही नर्मदापुर स्टेडियम ग्राउंड में लगाए गए टेंट को कुछ ग्रामीणों ने हटाया और विरोध प्रदर्शन किया।
जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग और क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने कहा कि मैनपाट के नर्मदापुर के कंडराजा और उरंगा गांव के आसपास के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में बाक्साइट उत्खनन की कार्रवाई चल रही है। उनके अनुसार, खनन से पर्यावरण और स्थानीय भू-परिस्थितियों पर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि नए खदान खुलने से क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि खनन से हाथियों के व्यवहार और आवागमन में बदलाव आ सकता है, जिससे भविष्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
जानकारी के अनुसार-135.22 हेक्टेयर क्षेत्र में बाक्साइट उत्खनन के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई थी। जनसुनवाई में सीएमडीसी और एक निजी कंपनी ने भाग लिया। इन खदानों का आवंटन मां कुदरगढ़ी एलुमिना प्राइवेट लिमिटेड को किया गया है। कंडराजा स्थित खदान के लिए लीज और अन्य औपचारिकताएँ पूरी हो चुकी हैं।
विरोध की आशंका को देखते हुए जनसुनवाई स्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया।

ग्रामीणों ने लगाए आरोप
जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई के पहले रात को ग्रामीणों को कंपनी से जुड़े लोगों द्वारा शराब पिलाई गई, ताकि वे अपनी बात रखने न आ सकें।
इन आरोपों पर जनसुनवाई के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीणों का विरोध जारी था।
पर्यावरण और आजीविका को लेकर चिंता
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि खनन से मैनपाट की प्राकृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। स्थानीय समुदायों का मत है कि कंपनियों में बाहरी श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि क्षेत्र के लोगों को अपेक्षित रोजगार नहीं मिलता।


