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वन्यजीव समिति ने लद्दाख, अरुणाचल में 13 रक्षा, अर्धसैनिक परियोजनाओं को मंजूरी दी
07-Nov-2025 8:23 PM
वन्यजीव समिति ने लद्दाख, अरुणाचल में 13 रक्षा, अर्धसैनिक परियोजनाओं को मंजूरी दी

नयी दिल्ली, 7 नवंबर। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति ने 13 रक्षा और अर्धसैनिक परियोजनाओं की सिफारिश की है, जिनमें से ज्यादातर लद्दाख के अधिक ऊंचाई वाले संरक्षित क्षेत्रों में और एक अरुणाचल प्रदेश में है। समिति की 86वीं बैठक के विवरण से यह जानकारी मिली है।

रक्षा मंत्रालय, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों में नयी सीमा चौकियां, एक ब्रिगेड मुख्यालय, गोला-बारूद भंडारण और प्रशिक्षण सुविधाएं तथा पुल और पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं।

समिति ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए सख्त पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ इन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

जानकारी के अनुसार, समिति ने ‘प्रोजेक्ट वर्तक’ के तहत बालीपारा-चारदुआर-तवांग सड़क पर 158 मीटर लंबे स्थायी पुल के निर्माण के लिए अरुणाचल प्रदेश में ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र के 0.37 हेक्टेयर क्षेत्र के उपयोग की सिफारिश की है।

प्रस्ताव को एक योजना के साथ मंजूरी दी गई जिसमें केवल दिन के समय निर्माण कार्य, गति नियंत्रण उपाय तथा अपशिष्ट एवं ध्वनि प्रबंधन शामिल है।

लद्दाख में चांगथांग शीत मरुस्थल और काराकोरम (नुबरा-शयोक) वन्यजीव अभयारण्यों के अंदर कई प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

इनमें चुशुल में 3.7 हेक्टेयर में फैली 315 फील्ड वर्कशॉप कंपनी की स्थापना शामिल है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तैनात 142 इन्फैंट्री ब्रिगेड को सहायता प्रदान करेगी।

समिति ने चांगथांग अभयारण्य के त्सोग्त्सालु में 24.2 हेक्टेयर क्षेत्र में एक ‘फॉर्मेशन एम्युनिशन स्टोरेज फैसिलिटी’ (एफएएसएफ) को भी मंजूरी दे दी है।

काराकोरम अभयारण्य में केएम-47 पर 47.1 हेक्टेयर के एक अन्य एफएएसएफ की भी सिफारिश की गई है।

समिति ने कहा कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके कार्यान्वयन से संवेदनशील हिमालयी परिदृश्य में न्यूनतम पारिस्थितिक व्यवधान सुनिश्चित होना चाहिए।(भाषा)


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