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श्रीनगर, 31 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने शुक्रवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी।
नौ दिवसीय शरदकालीन सत्र के दौरान शोर-शराबे की हल्की-फुल्की घटनाओं को छोड़कर, सदन की कार्यवाही काफी हद तक सुचारु रूप से चली और निर्धारित कामकाज निपटाया गया। इस सत्र में राज्यसभा की चार सीट के लिए चुनाव भी हुए।
पांच सरकारी विधेयक पारित करने के अलावा, विधानसभा ने दो गैर-सरकारी प्रस्तावों पर भी चर्चा की जिनमें से एक पारित हो गया।
सत्र के दौरान 41 गैर-सरकारी विधेयक सूचीबद्ध थे, लेकिन उनमें से केवल आठ पर ही चर्चा हो सकी। जिन गैर-सरकारी विधेयकों पर चर्चा हुई, वे सभी या तो सरकार के आश्वासन के बाद वापस ले लिए गए या प्रारंभिक चरण में ही ध्वनिमत से खारिज कर दिए गए।
पूरे सत्र के दौरान सिर्फ बृहस्पतिवार को एक बार विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया, जब केंद्र शासित प्रदेश में बाढ़ पीड़ितों के मुद्दे पर चर्चा के लिए उधमपुर से विधायक पवन गुप्ता की ओर से प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
राथर ने कहा, ‘‘मैं कार्यवाही के संचालन में सहयोग के लिए सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं।’’
संक्षिप्त सत्र के दौरान हुए कार्यों का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि विधायकों ने 732 प्रश्न प्रस्तुत किए, जिनमें से 682 प्रश्न स्वीकार किए गए, तीन हटा दिए गए और कोई भी प्रश्न वापस नहीं लिया गया।
उन्होंने बताया कि 29 प्रश्नों पर चर्चा हुई, जबकि सदस्यों ने 73 अनुपूरक प्रश्न पूछे।
उन्होंने कहा, ‘‘सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान लोकमहत्व से जुड़े 97 मुद्दे उठाए, जो अभूतपूर्व है। मैं सदस्यों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दे उठाने के लिए बधाई देता हूं।’’
राथर ने कहा कि पांच सरकारी विधेयक पेश किए गए, उन पर विचार कर उन्हें पारित किया गया।
उन्होंने कहा कि चालू सत्र के दौरान विधानसभा सचिवालय को 13 नए गैर सरकारी विधेयक प्राप्त हुए, जबकि पिछले सत्र से 33 ऐसे विधेयक लंबित थे।
उन्होंने कहा, ‘‘कुल 41 विधेयक सूचीबद्ध थे, लेकिन केवल आठ पर ही विचार हो सका। शेष विधेयक अगले सत्र में लिए जाएंगे।’’
सदन में 10 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लिए गए, जबकि विधानसभा में सात प्रस्तावों पर चर्चा हुई। (भाषा)


