ताजा खबर
50 से अधिक ब्रिक्स उद्योगों को राखड़ देना किया बंद, प्रदूषण से आसपास के गांव बेहाल
बिलासपुर, 25 मई। नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन सीपत के खिलाफ प्रदूषण फैलाने, फ्लाई ऐश का ठीक तरह से निष्पादन नहीं करने और उद्योगों को आपूर्ति बंद करने की शिकायतों पर पहुंची नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की टीम ने दो दिनों तक जांच की।
सोमवार और मंगलवार को एनजीटी की टीम ने सीपत संयंत्र का निरीक्षण किया। यहां पर डंप किए गए फ्लाई ऐश को देखा तथा आसपास के गांवों का निरीक्षण किया, जहां लोगों को प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। टीम कुछ फ्लाई ऐश से ईंट बनाने वाले कारखानों में भी पहुंची और वहां उनके संचालकों से चर्चा की। मंगलवार को टीम ने बंद हो चुकी खदानों में की जा रही फ्लाई ऐश की सप्लाई का मुआयना किया।
ज्ञात हो कि 25 जनवरी 2016 को केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत एनटीपीसी को 100 किलोमीटर की दूरी तक स्थित खाली पड़ी खदानों को भरने के लिए और ईंट उद्योग के लिए फ्लाई ऐश पहुंचाकर देना था। इस आदेश को एनटीपीसी से तीन साल बाद सन् 2019 में अमल में लाना शुरू किया। इसके बाद 31 दिसंबर 2021 को पर्यावरण मंत्रालय ने एक संशोधित नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें बंद पड़ी खदानों और सड़कों को भरने के लिए 300 किलोमीटर तक फ्लाई ऐश पहुंचाकर देने का निर्देश दिया गया। संशोधित नोटिफिकेशन में फ्लाई ऐश से ब्रिक्स बनाने वाले उद्योगों का अलग से जिक्र नहीं था। इसी का हवाला देते हुए इन उद्योगों को एनटीपीसी ने फ्लाई ऐश सप्लाई करना बंद कर दिया। अब इस वर्ष की शुरुआत से ही फ्लाई ऐश ब्रिक्स फैक्ट्रियों को फ्लाई ऐश की दिक्कत हो रही है। इससे बिलासपुर जिले में ही 50 से अधिक उद्योगों पर असर पड़ा है। कुछ उद्योग संचालकों ने राज्य सरकार के कोरबा स्थित बिजली संयंत्रों से सप्लाई की गुहार लगाई है।
एनटीपीसी से लगे ग्रामों का भी एनजीटी की टीम ने निरीक्षण किया। यहां पावर प्लांट के राखड़ से लोगों को बीमारी की शिकायत है। साथ ही खेतों में उड़कर आने वाले राखड़ से फसलें खराब हो रही हैं। ग्रामीणों ने अपनी परेशानी टीम को बताई है। टीम ने एनटीपीसी द्वारा लगाए गए पौधों का भी निरीक्षण किया।
With regards


