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धरमजयगढ़ वन मंडल में 21 साल में 151 मौतें
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायगढ़, 3 मार्च। धरमजयगढ़ वनपरिक्षेत्र में हाथियों का आतंक जारी है। इस बीच जंगली हाथियों के द्वारा लगातार उत्पात मचाते हुए ग्रामीणों के घरों व फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, इसी बीच बीती रात हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई है।
हाथी और मानव के बीच द्वंद में धरमजयगढ़ वन मंडल में 2001 से लेकर अब तक 151 लोगों की मौत हाथी के हमले से हो चुकी है। इसी के तहत बीती रात लगभग 11 बजे धरमजयगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेडरमार निवासी दिलीप हलदार (53) को जंगली हाथी ने कुचलकर मार दिया है।
वहीं धरमजयगढ़ वन मंडल के डीएफओ अभिषेक जवकात का कहना है कि वन विभाग के द्वारा हाथी और मानव के बीच द्वंद को रोकने तरह तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं। जिसके तहत हाथी का दैनिक गश्त किया जाता है, नियमित पेट्रोलिंग की जाती है, गांव वालों के सहयोग से हाथी मित्र दल का सहयोग मिलता रहा है। निरंतर हाथियों की निगरानी की जा रही है, जिससे जंगली हाथियों की आमद की खबरों से ग्रामीणों को अर्लट किया जाता है। डीएफओ ने यह भी कहा कि हाथी और मानव द्वंद रोकने हर साल जन जागरूकता अभियान चलाया जाता है।
बताया जा रहा है कि तीन हाथी रात होते ही इस क्षेत्र में आ गए थे। जिनसे मृतक की सामना हो गया और हाथी ने उसे मार दिया। पिछले कई दिनों से हाथी इस क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश का कई जिला हाथियों से प्रभावित है। जिसमें रायगढ़ जिले का धरमजयगढ़ वन मण्डल भी शामिल है।
जंगल किनारे बसे कई गांवों में तो जंगली हाथी ग्रामीणों के लिए समस्या बन गया है। जहां दिन या रात कभी भी हाथियों की उपस्थित देखी जा सकती है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खतरा बना रहता है। साथ ही जंगली हाथियों के द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना तो आम बात हो गई है।
बीती रात बायसी कालोनी में भी तीन हाथी आकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे। जिन्हें मुश्किल से बीजापतरा बांस बाड़ी तक भगाया गया था।
मृतक के साथी ने बताया कि पिछले 6 दिनों से लगातार हाथी उनके गांव में देखा जा रहा है। बीती रात तकरीबन 10 दिलीप हलदार का जंगली हाथियों से सामने हो गया और हाथी ने उसे मौत के घाट उतार दिया। गांव में हाथियों की आमद की सूचना वन विभाग को दिए जाने के बावजूद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती नहीं है। उनका यह भी कहना था कि गांव में हर साल फसल पकते ही जंगलों से निकलकर जंगली हाथी रिहायशी क्षेत्रों की ओर रूख करते हैं और फसलों के साथ साथ जनहानि की घटना को अंजाम देते हैं।


