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निमली में अनिल अग्रवाल डॉयलॉग प्रारंभ
नई दिल्ली/निमली, 2 मार्च। संसाधनों की खपत कम करना और आत्म-संयमित समाज ही एकमात्र तरीका है जिससे हम प्रकृति के साथ सद्भाव से रह सकते हैं,"
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा आयोजित पत्रकारों के एक वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। यादव ने इस अवसर पर डाउन टू अर्थ की ‘भारत की पर्यावरण रिपोर्ट 2022’ का विमोचन भी किया।
अनिल अग्रवाल डायलॉग का चार दिवसीय सम्मेलन निमली में 1 मार्च को प्रारंभ हुआ। यह 4 मार्च तक चलेगा। बीते दो वर्षों से कोरोना महामारी के कारण यह सालाना सम्मेलन नहीं हो पाया था।
राजस्थान के अलवर जिले के निमली के अनिल अग्रवाल पर्यावरण प्रशिक्षण संस्थान (एएईटीआई) में हो रहे इस सम्मेलन में देशभर के 60 से अधिक पत्रकार भाग ले रहे हैं।
मंत्री यादव ने तीन अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला जो आज राष्ट्र के सामने हैं - जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, और स्थिर किफायती लिंकेज। उन्होंने कहा: "हम सामर्थ्य को स्थिरता के साथ जोड़कर लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। हमें पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक स्वभाव से जोड़ना होगा। हमें कभी-कभी पारंपरिक ज्ञान पर इतना गर्व होता है कि हम तर्क भूल जाते हैं। लेकिन हमें परंपरा के साथ-साथ तर्क और सामर्थ्य के बारे में भी सोचना होगा।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए, यादव ने इस तथ्य पर जोर दिया कि उनका मंत्रालय "पर्यावरण पर खुली बहस" करने का इच्छुक है। उन्होंने कहा: "हमारे लक्ष्य समान हैं: सभी के लिए एक अच्छा जीवन कैसे सुनिश्चित किया जाए। हमें एक दूसरे से सीखना चाहिए।"
उन्होंने कहा- “2030 तक, हमारी योजना अक्षय ऊर्जा से 500 गीगा वॉट प्राप्त करने की है। 2030 तक रेलवे का पूरी तरह विद्युतीकरण किया जाएगा, जिससे 80 अरब टन तक उत्सर्जन में कमी आएगी। हम बड़े पैमाने पर एलईडी बल्ब लगाने की भी योजना बना रहे हैं, जिससे 40 अरब टन उत्सर्जन कम हो सकता है। हम हाइड्रोजन पर भी ध्यान दे रहे हैं। अगर हम हाइड्रोजन को टिकाऊ और किफायती बना सकते हैं, तो हम दुनिया में बड़े बदलाव ला सकते हैं।
वैश्विक जलवायु वार्ता और भारत की स्थिति के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि पर्यावरण वार्ता "देने और लेने के बारे में नहीं है - यह मानवता को बचाने के बारे में है। विकसित देशों को ऐतिहासिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और विचार करना चाहिए कि उनके पूर्वजों ने अतीत में क्या किया है।"
कॉन्क्लेव में सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा- “पिछले दो वर्षों में, दुनिया ने पहले कभी नहीं देखे गए व्यवधान को देखा है। कोविड -19 और जलवायु परिवर्तन दोनों प्रकृति के साथ हमारे मनहूस संबंधों का परिणाम हैं। इसे प्रकृति का बदला कह सकते हैं। कोविड -19 इसलिए है क्योंकि हम वनों और मनुष्यों के बीच की बाधा को तोड़ रहे हैं। हमारी जीवनशैली समस्या है।"
जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बारे में बात करते हुए नारायण ने कहा- “भारत को अपने स्वयं के हित में कार्य करने की आवश्यकता है। हमारी जलवायु परिवर्तन रणनीति बराबरी के लाभ के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। हम जलवायु परिवर्तन के लिए काम केवल इसलिये नहीं करेंगे क्योंकि यह दुनिया के लिए अच्छा है, बल्कि इसलिए भी कि यह हमारे लिए भी अच्छा है। हमें हर क्षेत्र के लिए कम कार्बन वाली रणनीति की जरूरत है।


