कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 5 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा की राजनीति को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दोनों ही दलों ने पिछले कई वर्षों से महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक लाभ का साधन बनाया है।
प्रेस विज्ञप्ति में तिलक पांडे, सचिव मंडल सदस्य, राज्य परिषद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़ ने कहा कि पार्टी महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखेगी और प्रदेश की महिलाओं से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।
सीपीआई ने अपने बयान में वरिष्ठ वामपंथी नेता गीता मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1996 में महिला आरक्षण विधेयक को संसद में निजी सदस्य विधेयक के रूप में प्रस्तुत कर एक मजबूत पहल की थी। पार्टी का आरोप है कि आज वही मुद्दा सत्ताधारी और विपक्षी दलों के लिए श्रेय लेने की राजनीति तक सीमित हो गया है।
पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद वह महिला आरक्षण विधेयक को अंतिम रूप तक नहीं पहुंचा सकी। वहीं भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा गया कि उसने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम पर राज्यसभा में विधेयक पारित कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की, लेकिन लोकसभा में इसके क्रियान्वयन और परिसीमन के मुद्दे पर इसे आगे नहीं बढ़ाया।
सीपीआई ने स्पष्ट मांग रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को बिना किसी देरी और बहाने के तुरंत लागू किया जाए। साथ ही इसमें ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान भी जोड़ा जाए, ताकि यह व्यवस्था वास्तव में समावेशी बन सके। पार्टी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश की महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है और इसे चुनावी श्रेय की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।


