कोण्डागांव
धूल के गुबार में घुट रही शहर की सांस
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
केशकाल, 22 फरवरी। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के निर्माण कार्य से जहां लोगों को बेहतर सडक़ की उम्मीद थी, वहीं इन दिनों यह निर्माण कार्य नगरवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। ठेकेदार की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते पूरा केशकाल शहर धूल के गुबार में जीने को मजबूर हो गया है।
सुबह के समय सडक़ों पर छाई सफेद परत को देखकर पहली नजर में धुंध या कोहरा प्रतीत होता है, लेकिन हकीकत में यह जानलेवा धूल है, जो दिन-रात लोगों की सांसों में घुल रही है। प्रतिदिन राहगीर, दुकानदार और स्थानीय निवासी इसी धूल से जूझ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सडक़ किनारे ही नहीं बल्कि सडक़ से लगभग 300 मीटर दूर स्थित घरों तक धूल पहुंच रही है और घरों के अंदर तक जम रही है।
होटल-दुकानदारों का धंधा चौपट
सडक़ किनारे संचालित होटल और दुकानों के संचालक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। खाने-पीने की सामग्री तक धूल से सुरक्षित नहीं बच पा रही है। दुकानदारों का कहना है कि धूल के कारण ग्राहक कम हो गए हैं और व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई दुकानदारों ने स्वास्थ्य संबंधी खतरे की भी आशंका जताई है।
स्कूली बच्चे भी हो रहे परेशान
सुबह स्कूल जाने वाले स्कूली बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। घर से निकलते ही उनके कपड़े धूल से सराबोर हो जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सांस और एलर्जी की समस्या होने लगी है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
अधिकारी दूर, जनता मजबूर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े बड़े अधिकारी केशकाल में निवास नहीं करते, जिसके कारण उन्हें सुबह-शाम होने वाली वास्तविक परेशानी का अंदाजा ही नहीं है। परिणामस्वरूप नगरवासियों को रोजाना इस समस्या का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
पानी छिडक़ाव और सुरक्षा
व्यवस्था की मांग
नगरवासियों ने प्रशासन से तत्काल सडक़ पर नियमित पानी छिडक़ाव, धूल नियंत्रण और निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो यह समस्या स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।


