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ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण: दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर
01-May-2026 4:49 PM
ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण:  दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

खैरागढ़, 1 मई। ‘ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण’ अभियान के अंतर्गत कलेक्टर  इंद्रजीत चंद्रवाल ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के केंद्रीय ग्रंथालय का निरीक्षण कर वहां संरक्षित हस्तलिखित पांडुलिपियों का गहन अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके संरक्षण, संवर्धन एवं डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रंथालय में रखी पांडुलिपियों की स्थिति, उनके रख-रखाव, वर्गीकरण तथा संरक्षण की वर्तमान व्यवस्था की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ये हस्तलिखित पांडुलिपियां न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शोध एवं अकादमिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं। ऐसे में इनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण एवं डिजिटल अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढिय़ां भी इस ज्ञान संपदा से लाभान्वित हो सकें। कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने संबंधित अधिकारियों एवं ग्रंथालय प्रबंधन को निर्देशित किया कि पांडुलिपियों की सूची तैयार कर उनकी विषयवस्तु, भाषा एवं कालखंड के अनुसार वर्गीकरण किया जाए।

साथ ही, आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों की मदद लेकर इनके संरक्षण की उन्नत तकनीकों को अपनाया जाए। उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया, जिससे इन्हें ऑनलाइन माध्यम से भी शोधार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

इस अवसर पर एडिशनल कलेक्टर  सुरेंद्र कुमार ठाकुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)  टंकेश्वर साहू, डॉ. जितेंद्र साखरे, डॉ. मंगलानंद झा एवं पुस्तकालय प्रभारी डॉ. जे. मोहन सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।


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