खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 25 अप्रैल। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के निर्देश पर उप जेल खैरागढ़ में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ द्वारा किया गया।
शिविर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मोहनी कंवर ने विचाराधीन बंदियों को प्ली बारगेनिंग के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सात वर्ष या उससे कम सजा वाले मामलों में तथा पहली बार अपराध करने वाले आरोपियों को न्यायालय में आवेदन के माध्यम से सजा में राहत पाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इसमें पीडि़त और आरोपी के बीच सहमति भी महत्वपूर्ण होती है।
एनडीपीएस अधिनियम के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून मादक पदार्थों के भंडारण, उपयोग, परिवहन, बिक्री और निर्माण को नियंत्रित करता है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा खलखो ने नि:शुल्क विधिक सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से वकील नियुक्त करने में असमर्थ व्यक्तियों को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए बंदी आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
उन्होंने विचाराधीन बंदियों के अधिकारों के बारे में भी बताया कि किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध होने तक अपराधी नहीं माना जाता और उसे अपने बचाव का अवसर मिलना उसका अधिकार है। इस दौरान पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू ने 9 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश द्वारा बंदियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनी गईं तथा जेल परिसर का निरीक्षण भी किया गया।
शिविर में जेल अधीक्षक योगेश कुमार बंजारे, पीएलवी गोलूदास साहू, संबंधित कर्मचारी और विचाराधीन बंदी उपस्थित रहे।


