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इस्राएल और हमास के बीच अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने से पहले हर वर्ष कम से कम तीन हजार गाजा निवासी मक्का जाते थे. अक्टूबर में संघर्ष विराम के बाद लोगों को उम्मीद थी कि यात्रा दोबारा शुरू होगी, लेकिन सीमाओं पर कड़ी पाबंदियां बनी रहीं. फरवरी में रफाह सीमा का कुछ हिस्से का खुलना भी सीमित रहा और केवल बीमार लोगों और कुछ सहायकों को ही जाने की इजाजत मिली.
दक्षिणी गाजा के एक टेंट शिविर में रहने वाली नाजिया अबू लेहिया अपने पति की मौत के साथ उस अधूरे सपने का भी दुख मना रही हैं, जिसमें दोनों को साथ हज यात्रा पर जाना था. 64 वर्षीय नाजिया ने कहा, “हमने युद्ध से पहले हज के लिए पंजीकरण कराया था और हमारे नाम चुन लिए गए थे. फिर यहां युद्ध शुरू हो गया और सब रुक गया.” उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि कहीं मैं भी हज की इच्छा लिए ही दुनिया से न चली जाऊं. लेकिन ईश्वर की इच्छा से हम पाबंदियों और घेराबंदी के बावजूद हज करना चाहते हैं.”
उधर गाजा के लोग लगातार तीसरे वर्ष ईद अल-अदाह बिना कुर्बानी के मनाएंगे. कृषि मंत्रालय के अनुसार युद्ध में पशुपालन क्षेत्र बुरी तरह नष्ट हो गया है. हमास ने कहा कि मई में सहायता आपूर्ति अपेक्षा से बहुत कम रही, जबकि इस्राएली एजेंसी का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 600 राहत वाहन गाजा पहुंच रहे हैं. (dw.com/hi)


