अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका और इसराइल का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन था, यह जानते हुए भी कई देशों ने यह अपराध होने दिया.
जापान में ईरानी दूतावास ने कहा है, ''कुछ देशों ने अमेरिकियों को ईरान के ख़िलाफ़ आक्रामक जंग छेड़ने के लिए अपना इलाक़ा और हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने दिया. यह मानना मुश्किल है कि वे होने वाले हमलों से अनजान थे. वे जानते थे कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का घोर उल्लंघन है, फिर भी उन्होंने इसमें मदद की.''
ईरानी दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''निश्चित रूप से उस इलाक़े के देशों ने देखा कि कैसे अमेरिकी हथियार होर्मुज़ स्ट्रेट से होते हुए ईरान के ख़िलाफ़ जंग को भड़काने के लिए भेजे जा रहे थे. इस दौरान आवागमन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पूरी तरह अनदेखी की गई. फिर भी वे ख़ामोश रहे.''
दूतावास ने आगे लिखा, ''अब जब इसके बुरे नतीजे उन्हें ख़ुद भुगतने पड़ रहे हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की फिर से याद आ रही है. लेकिन अब भी वे पीड़ित के लिए न्याय नहीं मांग रहे, बल्कि अपने ख़ुद के हितों के बारे में सोच रहे हैं.''
यह 'भेदभाव' ही असल में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की नींव को कमज़ोर करता है, जहाँ सिद्धांतों को तभी लागू किया जाता है, जब वे अपने लिए ठीक हों. (bbc.com/hindi)


