अंतरराष्ट्रीय

डेनमार्क चुनाव: ना लेफ्ट ना राइट, किसी को नहीं मिला बहुमत
26-Mar-2026 12:15 PM
डेनमार्क चुनाव: ना लेफ्ट ना राइट, किसी को नहीं मिला बहुमत

डेनमार्क में आम चुनाव के लिए हुए मतदान में कोई भी पार्टी निर्णायक जीत नहीं हासिल कर पाई. प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन की सोशल डेमोक्रैट्स सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई है, मगर पर्याप्त जनादेश नहीं मिला है. पार्टी ने 1903 से अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है. फिर भी, प्रक्रिया के अनुसार नई सरकार के गठन की राह बनाने के लिए फ्रेडेरिक्सन ने किंग फ्रेडरिक 10वें को अपना इस्तीफा सौंप दिया.

24 मार्च को हुई वोटिंग के बाद मतों की गिनती पूरी हो चुकी है. 21.9 प्रतिशत मतों के साथ सोशल डेमोक्रैट्स सबसे बड़ी पार्टी है. पिछले चुनाव में जहां उसे 50 सीटें मिली थीं, वहीं इस बार केवल 38 सीटें ही मिली हैं. 179 सीटों की संसद में फ्रेडेरिक्सन का लेफ्ट विंग गठबंधन, जिसे रेड ब्लॉक कहते हैं, मिलकर 84 सीटें ला पाया. बहुमत के लिए 90 सीटें चाहिए. 

दक्षिणपंथी रुझान की पार्टियां "ब्लू ब्लॉक" भी 77 सीटों के साथ मैजिक नंबर से काफी पीछे हैं. 14 सीटों के साथ मॉडरेट खेमा सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. सभी निगाहें उसके नेता और विदेश मंत्री लार्स ल्यूके रासमुसेन पर टिकी हैं. सीटों की स्थिति को देखते हुए गठबंधन सरकार बनाने की बातचीत लंबी खिंच सकती है. पर्याप्त संख्या ना होने के बावजूद पीएम पद के लिए फ्रेडेरिक्सन की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं.

इस चुनाव के अहम मुद्दों में पर्यावरण, बढ़ती महंगाई और जन कल्याण योजनाएं शामिल थीं. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू मुद्दों पर ग्रीनलैंड का मुद्दा हावी रहा. डॉनल्ड ट्रंप की धमकियों के आगे जिस तरह प्रधानमंत्री फ्रेडेरिक्सन ने मजबूत स्टैंड लिया, उससे उन्हें काफी समर्थन मिला. चुनाव ने यह भी दिखाया कि मतदाता मध्य रुझान की पार्टियों से हटकर लेफ्ट और राइट विंग की ओर बढ़ रहे हैं. दक्षिणपंथी धड़े का वोट शेयर 2022 के 14.4 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत पर पहुंच गया. (dw.com/hi)


अन्य पोस्ट