दुर्ग

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से माउंट एवरेस्ट तक सफर
03-Jun-2026 4:42 PM
 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से माउंट एवरेस्ट तक सफर

संतोष मिश्रा की अमिता श्रीवास से विशेष बातचीत
 

भिलाई नगर, 3 जून (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। सपना छोटा या बड़ा नहीं होता, हमारी सोच छोटी या बड़ी होती है। सपने को साकार करने के लिए कठिन तपस्या, कड़ा अनुशासन और अटूट धैर्य बेहद जरूरी है।

ये शब्द हैं छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की जांबाज बेटी अमिता श्रीवास के, जिन्होंने मई 2026 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया। अमिता न सिर्फ एक पर्वतारोही हैं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी हैं। एवरेस्ट फतह करने के बाद भिलाई पहुंचीं अमिता से ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता संतोष मिश्रा ने उनकी इस कठिन और गौरवशाली यात्रा पर विशेष बातचीत की।
 

अमिता श्रीवास की जुबानी, एवरेस्ट की कहानी

0 जांजगीर-चांपा जैसे मैदानी इलाके से होने के बावजूद आपके मन में पहाड़ों को लांघने और एवरेस्ट फतह करने का विचार कैसे आया?

00 मुझे शुरू से ही जीवन में कुछ अलग करना था, भीड़ से हटकर चलना था। मैं चाहती थी कि कुछ ऐसा करूं जिससे मेरे देश और छत्तीसगढ़ का नाम पूरे विश्व में रोशन हो। लगभग आठ साल पहले मैंने डिस्कवरी चैनल पर एक युवक को रॉक क्लाइम्बिंग करते देखा था। तभी मुझे पता चला कि पर्वतारोहण भी एक क्षेत्र है। वहीं से मेरे मन में यह सपना जन्मा और मैंने ठान लिया कि मुझे माउंट एवरेस्ट फतह करना है।

0 जब आपने इस सपने के बारे में परिवार को बताया तो उनकी प्रतिक्रिया क्या थी?

00 एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह सपना बहुत बड़ा था। जब मैंने तीन-चार साल पहले घर पर खुलकर बात की तो पहला सवाल आर्थिक संसाधनों को लेकर था। दूसरा डर सुरक्षा को लेकर था कि नेपाल जैसे दूसरे देश में अकेले कैसे जाओगी। लेकिन मैंने धीरे-धीरे परिवार को समझाया। मेरी बहनों और भाई ने मेरा पूरा साथ दिया। मानसिक रूप से मजबूत बनाने में परिवार का सबसे बड़ा योगदान रहा।

0 एवरेस्ट मिशन के लिए आपकी तैयारी कैसी रही?

00 छत्तीसगढ़ में पहाड़ नहीं हैं, इसलिए मुझे अलग तरीके से तैयारी करनी पड़ी। पिछले नौ-दस महीनों से मैं लगातार कड़ी ट्रेनिंग कर रही थी। मेरी सुबह सवा एक बजे या सवा तीन बजे शुरू हो जाती थी। सुबह 10:30 बजे तक तीन अलग-अलग शिफ्ट में अभ्यास चलता था। मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए इंडोर रैंप रनिंग की। पहाड़ों की प्रैक्टिस के लिए तीन बार लद्दाख और एक बार मनाली गई। इसके अलावा सिक्किम के दुर्गम इलाकों में स्थित माउंट लाचा और बीके मस्ट जैसे पर्वतों पर भी प्रशिक्षण लिया।

0 आपने 8 मार्च को एक खास रिकॉर्ड बनाया था। उसके बारे में बताइए।

00 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो फतह की थी। मैं एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना चाहती थी। महिला दिवस को चुनने का उद्देश्य यह संदेश देना था कि कोई भी क्षेत्र महिलाओं से अछूता नहीं है।

0 एवरेस्ट से लौटते समय आपकी तबीयत खराब हो गई थी। उस दौरान क्या हुआ?

00 एवरेस्ट फतह करने के बाद ऊंचाई और मौसम के कारण मुझे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं। पेट में अत्यधिक जलन और अन्य दिक्कतों के चलते मुझे काठमांडू के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शुरुआत में मैंने परिवार को पूरी जानकारी नहीं दी, क्योंकि मैं उन्हें चिंतित नहीं करना चाहती थी। इलाज के बाद स्थिति में सुधार होने पर घरवालों को जानकारी दी। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं।

0 जब आपने एवरेस्ट की चोटी पर पहला कदम रखा तो वह पल कैसा था?

00 वह पल बेहद भावुक करने वाला था। मैं खुद से पूछ रही थी कि क्या यह वही जगह है, जिसके लिए मैंने आठ साल तक तपस्या की। मेरे हाथ में तिरंगा था और दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर खड़े होकर जो गर्व महसूस हुआ, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसा लगा जैसे मैं एवरेस्ट से झोली भरकर खुशियां लाई हूं, जिन्हें अपने छत्तीसगढ़ और जिलेवासियों के साथ बांटना चाहती हूं।

 

पारिवारिक पृष्ठभूमि और संघर्ष
अमिता श्रीवास जांजगीर-चांपा जिले के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाखों रुपये के एवरेस्ट अभियान का खर्च आसानी से उठाया जा सके। अमिता महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। सीमित मानदेय के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।

आंगनबाड़ी की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी शारीरिक और मानसिक तैयारी जारी रखी। इस मिशन को पूरा करने में छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन का भी महत्वपूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग रहा, जिसके लिए अमिता ने मुख्यमंत्री और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

काठमांडू में उनके इलाज के खर्च को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही सहायता की घोषणा कर चुकी है, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिलेगी।


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