दुर्ग
आर्थिक तंगी से परेशान होकर चलाना पड़ा ई-रिक्शा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उतई, 9 मार्च। किसी ने सही कहा कि एक महिला के अनेक हाथ होते हैं। जिसमें अपनी सारी जिम्मेदारी बखूबी निभाती है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसे ही एक महिला पुष्पा गायकवाड़ की बात कर रहे हैं। जो एक पैर से दिव्यांग है। जो ठीक से चल भी नही पाती पर रोज सुबह उठकर घर के सारे काम निपटाने के बाद बच्चे को स्कूल भेज कर रोजना ई रिक्शा चलाने निकल पड़ती है। और रोजाना 600 से 700 रोजी कमा कर अपने परिवार का पालन पोषण भी करती है
45 वर्षीय पुष्पा गायकवाड़ एक पैर से शारीरिक रूप से विकलांग है। जिन्होंने मात्र 5 वर्ष के उम्र में एक छोटी सी दुर्घटना में दाहिना पैर से विकलांग हो गई उसने अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया वह पूरे हिम्मत के साथ राजनीति शास्त्र में एमए किया तथा कंप्यूटर कोर्स भी किया।
आर्थिक तंगी से परेशान होकर चलाना पड़ा ई रिक्शा-पुष्पा गायकवाड़ बताती है कि उनके पति तोरण गायकवाड़ भी शारीरिक रूप से विकलांग है। वह राजनीतिक शास्त्र में एमए किए है। और वह गाड़ाडीह स्थित प्राइवेट स्कूल में टीचर है।लेकिन उसमें इतनी कम सैलरी मिलती है कि घर चलना तो दूर सब्जी लेने तक लिए पैसा नही बचता था।
शासन के पास लगाई गुहार नहीं मिला कोई मदद
पुष्पा गायकवाड़ बताती हैकि पति पत्नी शारीरिक रूप से विकलांग है तथा उनके दो जुड़वा बच्चे अभी और राज दोनों ही बच्चे बचपन से दोनों आँख से एक 95 फीसदी व दूसरा 90 फीसदी दिव्यांग है। घर पर कोई कमाने वाला नहीं है इसलिए कांग्रेस शासन काल में भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे तब मदद के लिए गुहार लगाई थी उस समय मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पत्र लिखकर यथा संभव मदद के लिए बोला था पर कांग्रेस शासन बदलने के बाद उस पत्र पर कोई सुनवाई नही हुआ।
महिला समूह से लोन लेकर ई-रिक्शा फाइनेंस कराया और उसे जैसे तैसे घर चल रहा है। मंहगाई इतनी बढ़ गई है कि कभी कभी लोन पटाना और घर चलाना मुश्किल हो जाता है।
सरकारी व प्राइवेट जॉब के लिए किया बहुत प्रयास
मैने इतने सालों में सरकारी व प्राइवेट जॉब के लिए जगह जगह कई बार आवेदन किए पर कही पर कोई जॉब नहीं मिला तो मजबूरी में ई-रिक्शा चलाना पड़ा अब इसी से जैसे तैसे घर चल रहा है।


