दुर्ग
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
दुर्ग, 11 अगस्त। पानी के अभाव में खेती किसानी कार्यों में दिक्कत आ रही है, जिसके मद्दे नजर किसानों की ओर से सिंचाई के लिए पानी छोडऩे की मांग उठने लगी है। वहीं दूसरी ओर तांदुला जलाशय में मात्र 57 प्रतिशत ही जलभराव हो पाया है।
कृषक रमेश साहू का कहना है पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई है, वहीं गर्मी भी तेज हो गई है जिसकी वजह से खेतों में भरा पानी सूख गया है। नतीजन वे अपनी खेत की निदाई नहीं करा पा रहे हैं और न ही खाद का छिड़काव कर पा रहे हैं। जिसके कारण धान के पौधों का बाढ़ नहीं हो पा रहा है। उनकी भाठा जमीन वाली खेत में तो दरार आने लगी है। उनका कहना है कि तांदुला जलाशय पानी छोड़कर सिंचाई के लिए दी जाती है तो इससे खेती किसानी के रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं।
कृषक सहदेव राम का कहना है कि पानी के अभाव में खेत में धान चलाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। जैसे तैसे कुछ वर्ष पूर्व खेत में कराए गए बोर से सिंचाई कर पा रहे हैं जिससे थोड़ा बहुत कार्य हो पा रहा है। उनका कहना है कि जल्द सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा तो दिक्कत और बढ़ सकती हैं। इधर सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार सिंचाई के लिए जिस तांदुला जलाशय से ज्यादातर किसानों को पानी मिलता है वहां वर्तमान में मात्र 57 प्रतिशत जलभराव हो पाया है जो कि गत वर्ष आज की स्थिति में जल भराव से बहुत कम है


