दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 30 मई। शहर बीते एक माह से गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। लगातार बिजली कटौती, बार-बार मोटर की खराबी और 40 वर्ष पुराने 24 एमएलडी फिल्टर प्लांट की तकनीकी खामियों ने हजारों नागरिकों को रोजाना पेयजल के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा जब मोहन नगर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे, तो उन्हें उरला, मोहन नगर और पटरीपार क्षेत्र के वार्डों से भारी संख्या में नागरिकों की शिकायतें प्राप्त हुईं। श्री वोरा तत्काल जलघर पहुँचे और मौके पर उपस्थित अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने स्पष्ट और सख़्त शब्दों में कहा कि जब नगर निगम 50, हजार से अधिक घरों से 2,400 रु. प्रति वर्ष जलकर वसूल रहा है, तो नागरिकों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति क्यों नहीं मिल रही? अरुण वोरा ने कहा यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि साफ तौर पर व्यवस्था की लापरवाही है। 40 साल पुराना ढांचा, जिसने दशकों तक शहर की ज़रूरतों को पूरा किया, अब जवाब दे रहा है। जब पहले पानी की ज़रूरत पड़ी थी, तब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान 1.60 करोड़ की लागत से शिवनाथ नदी पर इंटरवल पॉइंट बनवाकर चार नए पंप लगाए गए थे, ताकि शहर को निर्बाध जल आपूर्ति मिलती रहे।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह जनाक्रोश आंदोलन का रूप ले सकता है। शहर के अनेक वार्डों में टैंकर समय पर नहीं पहुँच रहे हैं, और कुछ इलाकों में तो लगातार कई दिनों से एक बूंद पानी तक नहीं पहुँचा। स्थानीय नागरिकों ने इस गहराते संकट को लेकर अरुण वोरा से हस्तक्षेप की माँग की थी, जिसके जवाब में उन्होंने आज स्वयं स्थल पर पहुँचकर हालात का निरीक्षण किया। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले भी मौजूद थे।


