दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 30 सितंबर। सिद्धार्थ नगर के 7 लोगों को बेदखली संबंधी जारी नोटिस को निगम प्रशासन ने निरस्त कर दिया है।
दरअसल इन 7 लोगों में से एक निगम कर्मी भी था, जिन्होंने नोटिस के बाद आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद मामला गरमा गया। वाल्मिकी समाज व अन्य राजनैतिक दलों द्वारा नोटिस का पुरजोर विरोध किया गया। विधायक अरूण वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल ने मौत की घटना के बाद पीडि़त परिवारों को आश्वस्त किया था कि नोटिस को निरस्त किया जाएगा। निगम प्रशासन द्वारा नोटिस निरस्तीकरण को इसी से जोडक़र देखा जा रहा है। सिद्धार्थ नगर के जिन 7 लोगों को घर खाली कराने नोटिस जारी किया गया, इनमें से प्राय: सभी लोगों को आवासीय पट्टा जारी किया गया है।
सिद्धार्थ नगर के मृतक के भाई दिलीप गुजरतिया ने घटना के दिन ही बताया था कि उनके पास आवासीय पट्टा है। वर्ष 1984 में उन्हें आवासीय पट्टा दिया गया था, जिसका नवीनीकरण वर्ष 2014 से 30 साल के लिए किया गया। ऐसी स्थिति में बीते दिनों सिद्धार्थ नगर में पीडि़त लोगों के घरों की नापजोख की गई थी।
जानकारी यह भी है कि इन लोगों को आवास खाली करने भी कहा गया था। उसके बाद विपणन संघ द्वारा 13 सितम्बर को निगम को पत्र भेजा गया और इस पत्र के आधार पर निगम के भवन निरीक्षक ने नोटिस जारी किया। दरअसल जिन 7 लोगों को आवासीय पट्टा दिया गया है, ऐसी स्थिति में उन्हें आवास खाली कराने के लिए नोटिस जारी करना उनके साथ अन्याय है। विपणन संघ द्वारा जारी पत्र की पड़ताल की जा रही है। आखिर आवासीय पट्टा किस विभाग से जारी किया गया और किस विभाग द्वारा बेदखली के लिए दबाव बनाया जा रहा है।


