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आरबीआई रेपो रेट यथावत रखना व्यापार, उद्योग और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक-पारवानी
08-Jun-2026 2:53 PM
आरबीआई रेपो रेट यथावत रखना व्यापार, उद्योग और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक-पारवानी

रायपुर, 8 जून। व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेंद्र दोशी,  विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष परमानंद जैन, महामंत्री सुरिंदर सिंह, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, राम मंधान, वासु मखीजा, भरत जैन, राकेश ओचवानी तथा शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कैट ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की घोषणा का स्वागत किया। आरबीआई का रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय देश के व्यापार, उद्योग, एमएसएमई क्षेत्र एवं समग्र अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

श्री पारवानी ने बताया कि ऋण की लागत में तत्काल वृद्धि नहीं होगी तथा गृह ऋण, वाहन ऋण एवं व्यावसायिक ऋण की ईएमआई पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, निवेश का माहौल मजबूत होगा तथा उद्योग एवं व्यापार जगत को अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी। आरबीआई द्वारा पॉलिसी स्टांस को न्यूट्रल बनाए रखना यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई और विकास दर के अनुसार भविष्य में आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह नीति आरबीआई को बदलती वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने का लचीलापन प्रदान करती है।

श्री पारवानी ने बताया कि कैश रिजर्व रेशियो को 3 प्रतिशत पर यथावत रखना भी महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनी रहेगी तथा व्यापार, उद्योग, एमएसएमई और उपभोक्ताओं को ऋण की उपलब्धता सुचारू रूप से जारी रहेगी। यह कदम आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने भारतीय रुपये को मजबूती प्रदान करने तथा विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आरबीआई द्वारा घोषित उपायों का विशेष स्वागत किया।

श्री पारवानी ने बताया कि विदेशी निवेशकों एवं एनआरआई निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदमों से भारत में पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा भारतीय रुपये को भी मजबूती मिलेगी। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। आरबीआई द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत किया जाना वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का यथार्थवादी आकलन है।


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