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एआईडीए 2025 का सातवां दिन भव्यता, परंपरा नृत्य और संस्कृति के संगम से हुआ आलोकित
09-Oct-2025 12:29 PM
एआईडीए 2025 का सातवां दिन भव्यता, परंपरा नृत्य और संस्कृति के संगम से हुआ आलोकित

रायपुर, 9 अक्टूबर। ऑल इंडिया डांसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित नृत्यनंदलहरी उत्सव 2025 के आयोजक ने बताया कि सातवें दिन का शुभारंभ आज भव्यता और परंपरा के संगम के साथ हुआ। आज के कार्यक्रम का उद्घाटन प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना अद्रिजा दास (त्रिवेन्द्रम, केरल) के करकमलों द्वारा किया गया।

आयोजक ने बताया कि उनके साथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे ए.आई.डी.ए. के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रसिद्ध नृत्याचार्य डॉ. जी. रतीश बाबू, तथा संस्था के अन्य पदाधिकारी एवं कला समीक्षकगण। दिन के आकर्षण दिनभर का मंच विविध शैलियों के नृत्य से जीवंत रहा।

 

आयोजक ने बताया कि  भरतनाट्यम प्रस्तुति खैरागढ़ विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली छात्रों ने अपनी शास्त्रीय प्रस्तुतियों से सभागार में सौंदर्य और अनुशासन की एक नई छवि प्रस्तुत की। कुचिपुड़ी नृत्य – वारंगल (तेलंगाना) से आईं सुप्रसिद्ध नृत्यांगना हिमांसी कत्रगड्डा के संस्थान के विद्यार्थियों ने कुचिपुड़ी की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें आंध्र प्रदेश की नृत्य परंपरा और रसात्मकता झलकी। वेस्टर्न डांस परफॉर्मेंस – क्रिएटिव स्टूडियो, दुर्ग के युवा कलाकारों ने आधुनिक नृत्य की ऊर्जावान झलक दिखाकर दर्शकों को रोमांचित किया। सायं सत्र के विशेष आकर्षण सायंकालीन सत्र में प्रतिष्ठित कलाकारों की पेशेवर प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजक ने बताया कि भरतनाट्यम प्रस्तुति भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद , भारत सरकार की अनुमोदित कलाकार तथा संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ छात्रवृत्ति प्राप्त नृत्यांगना सुश्री राजश्री दास ने भ

रतनाट्यम की पारंपरिक रचना प्रस्तुत की, जिसमें लय, भाव और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य समूह प्रस्तुति रायपुर के प्रसिद्ध लोक कलाकार नरेंद्र जलधत्रिया एवं उनकी टीम ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्यों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की सुगंध बिखेरी। ढोल, मांदर और लोकगीतों की ताल पर पूरा सभागार झूम उठा।


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