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भारतीय भाषाओं का सम्मान और हिंदी को राष्ट्र की संपर्क भाषा बनाने कलिंगा विवि में हुआ सम्मेलन
14-Jan-2026 3:27 PM
भारतीय भाषाओं का सम्मान और हिंदी को राष्ट्र की संपर्क भाषा बनाने कलिंगा विवि में हुआ सम्मेलन

रायपुर, 14 जनवरी। कलिंगा विश्वविद्यालय ने बताया कि भारतीय भाषा समिति (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं कलिंगा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषा परिवार नए क्षितिज, नई दृष्टि और भाषाई एकता का भविष्य विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 9-10 जनवरी, 2026 को किया गया।

विश्वविद्यालय ने बताया कि इस कार्यक्रम में 21 वक्ताओं एवं 179 प्रतिभागियों ने सहभागिता की तथा सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान एवं हिंदी को राष्ट्र की संपर्क भाषा के रूप में प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के दौरान भारतीय भाषा परिवार पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जनसंपर्क विभाग के अपर निदेशक श्री आलोक देव थे, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यता की रीढ़ है। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक एकीकरण, शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में भारतीय भाषा समिति की भूमिका की सराहना की।

विश्वविद्यालय ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक श्री वरुण श्रीवास्तव भी मौजूद थे, जिन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाषा राष्ट्रीय एकता की एक अहम कड़ी है, और देश की सभी बोलियाँ और भाषाएँ अपने प्राकृतिक रूप में फलती-फूलती रहनी चाहिए। पर्यटन विभाग की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने भाषाई जागरूकता, भाषाई एकता और परंपरा से डिजिटल युग तक की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। एमिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वाराप्रसाद ने प्राचीन ज्ञान परंपराओं से लेकर समकालीन शिक्षा तक के सफर के बारे में विस्तार से बताया।


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