बेमेतरा
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बेमेतरा, 27 मई। ग्राम खुरुसबोड़ (आर) में उस वक्त भारी हंगामा और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब स्थानीय प्रशासन और पंचायत की टीम एक ग्रामीण के घर अतिक्रमण हटाओ हटाने पहुंची। इस कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवार और पंचायत प्रतिनिधि के बीच तीखी बहस हुई। जिसके बाद मौके पर विवाद की स्थिति बन गई। इस दौरान प्रभावित गणेश वर्मा की पत्नी ने स्वयं को आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। घटना में महिला के बेहोश होने पर इलाज के लिए खंडसरा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
प्रभावित व्यक्ति ने सरपंच पर राजनीतिक और व्यक्तिगत देश के तहत पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं पंचायत प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से नियमानुसार की गई कानूनी कार्रवाई बताया है।
यह पूरा घटनाक्रम सोमवार दोपहर 2.30 बजे का है। ग्राम खुरुसबोड़ में अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व, ग्राम पंचायत और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम अचानक ग्रामीण गणेश वर्मा के घर पहुंची। जेसीबी और प्रशासनिक अमल को घर के सामने खड़ा देख गणेश वर्मा और उसका पूरा परिवार आक्रोशित हो उठा। परिवार के सदस्यों ने कार्रवाई का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
अतिक्रमण विरोधी पुलिस मुहिम के दौरान हुए इस भारी हंगामा के बाद खुरुसबोड़ में तनाव का माहौल बना रहा। मौके पर मौजूद राजस्व और पुलिस के आला अधिकारियों ने स्थिति को बिगडऩे से रोकने के लिए मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने आक्रोशित परिवार और ग्रामीण को समझाने-बुझाने का प्रयास किया।
प्रशासन का कहना है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, लेकिन साथ ही कानून व्यवस्था को हाथ में लेने का इजाजत भी किसी को नहीं दी जाएगी।
ग्राम सभा के प्रस्ताव पर उठे सवाल
इस पूरे मामले की जड़ में ग्राम सभा का एक पुराना प्रस्ताव बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व खुरुसबोड़ में आयोजित ग्राम सभा की बैठक में सरकारी भूमि खसरा नंबर 303/1 पर अवैध रूप से काबिज लोगों के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इस सरकारी जमीन पर पिछले कई दशकों से लगभग 17 लोग कब्जा जमाए बैठे थे। यह स्थान तालाब के लिए प्रस्तावित है, इसलिए सभी 17 लोगों के अवैध कब्जे को हटाया जाना तय हुआ था। विवाद की मुख्य वजह यही प्रस्ताव और उसका क्रियान्वयन का तरीका बनी है।
जेसीबी में तोडफ़ोड़, चौकी में शिकायत
सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि प्रभावित पक्ष ने अतिक्रमण हटाने पहुंचे जेसीबी के शीशे को तोड़ दिया। इसके अलावा वाहन और चालक को जलाने का प्रयास किया। नियमानुसार हो रही कार्रवाई को रोकने का हरसंभव प्रयास किया गया। प्रस्तावित पक्ष के इस कृत्य को खण्डसरा चौकी में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है।
कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार - सरपंच प्रतिनिधि
दूसरी तरफ पक्षपात और द्वेषपूर्ण कार्रवाई के आरोपों को ग्राम पंचायत ने पूरी तरह से मनगढं़त और बेबुनियाद करार दिया है। इस मामले में सरपंच प्रतिनिधि ईश्वर साहू ने बताया कि पंचायत किसी भी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रही है।
सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार सरकारी जमीन खसरा नंबर 303/1 से अतिक्रमण हटाना गांव के विकास और शासकीय नियमों के तहत बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके लिए बकायदा शासकीय प्रक्रिया का पालन किया गया है।
तीन नोटिस के बाद भी निर्माण जारी रखा - नायब तहसीलदार
नायब तहसीलदार मोरध्वज साहू ने बताया कि पंचायत प्रस्ताव के अनुसार 17 लोगों को कब्जा मुक्त करने नोटिस जारी किया गया था। फरवरी में 16 लोगों का अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी, सिर्फ प्रभावित गणेश वर्मा का अतिक्रमण बचा हुआ था। निर्माण शुरू करने से लेकर प्रस्तावित को तीन नोटिस और एक स्थगन आदेश थमाया गया, बावजूद उसने निर्माण जारी रखा। इसलिए 25 मई को कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। यहां प्रभावित ने अपने रिश्तेदारों को इक_ा कर लिया था। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवार और रिश्तेदार हाथों में मशाल लेकर वाहन को जलाने का प्रयास किया। यह सारी रिपोर्ट साजा एसडीएम को प्रेषित की जाएगी।


