बस्तर
235 किमी सडक़ों का बिछेगा जाल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 18 अप्रैल। बस्तर के विकास पथ पर आज एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहाँ प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना फेस-4 के अंतर्गत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यों का शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर से वर्चुअल माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ किया, जिसका सीधा प्रसारण जगदलपुर के कुम्हरावंड स्थित शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम के दौरान बस्तर जिले की कुल 86 महत्वपूर्ण सडक़ कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिनकी कुल लंबाई 235.45 किलोमीटर और अनुमानित लागत लगभग 250 करोड़ रुपये है। समारोह में उपस्थित अतिथियों ने गरिमामयी वातावरण के बीच इन सडक़ों के निर्माण का औपचारिक शिलान्यास किया, जो क्षेत्र की ग्रामीण कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प है।
जगदलपुर में आयाजित समारोह के दौरान विधायक चित्रकोट विनायक गोयल ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ये सडक़ें केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि ग्रामीणों के जीवन में समृद्धि लाने का मार्ग बनेंगी। उन्होंने इन कार्यों के लिए शासन का आभार प्रकट करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे में यह सुधार स्थानीय सामुदायिक जुड़ाव को और सशक्त करेगा।
इसी कड़ी में जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विजन को याद करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की दूरगामी सोच से आज बस्तर की तस्वीर बदल रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सडक़ों के माध्यम से हर ग्रामीण तक शुद्ध पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाना है। इस अवसर पर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जगदलपुर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
विकास की यह लहर जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और ब्लॉकों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। लोहंडीगुड़ा, दरभा, बास्तानार और तोकापाल जैसे क्षेत्रों में स्वीकृत सडक़ों से कनेक्टिविटी की दशकों पुरानी आवागमन की दिक्कतें दूर होगी।
इस अवसर पर कलेक्टर आकाश छिकारा, जनपद पंचायतों के अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम के समापन पर इन जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित अधिकारियों और इंजीनियरों को इन परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ समय पर पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए, ताकि बस्तर का हर निवासी एक विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में अपना योगदान दे सके।


