नई दिल्ली, 23 मार्च । ‘जे मुंह से श्रापे, उ मुंह में कांटा धंसे, हमरे भाई क उमर बढ़े...’ ये वही पंक्तियां है जब बहनें भटकटैया के कांटे को भाईदूज (पर्व) के मौके पर अपने जीभ में चुभोकर बोलती हैं। केवल पर्व ही नहीं आयुर्वेद में भी भटकटैया का बहुत महत्व है। आज जानने की बारी है रेंगनी के बारे में जिसके इस्तेमाल से रोग-व्याधी कोसो दूर चले जाते हैं। रेंगनी, कंटकारी, व्याघ्री या भटकटैया... ये वो पौधा है, जिसके सेवन से खांसी में तो राहत मिलती ही है, साथ ही यह और भी कई रोगों को मौत की नींद सुला देता है। भटकटैया का भाई-बहन के पर्व भाईदूज की पूजा में जितना महत्व है, उतना ही आयुर्वेद में भी है। सूखी या बलगम वाली खांसी, बुखार, संक्रमण, वात–कफ का भी नाश करता है। अस्थमा के रोगियों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद होता है। भटकटैया के फायदों को गिनाते हुए पंजाब स्थित बाबे के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के बीएएमएस, एमडी डॉक्टर प्रमोद आनंद तिवारी ने बताया कि औषधीय गुणों से भरपूर रेंगनी के सेवन से कई रोग छूमंतर हो जाते हैं। भटकटैया के गुणों, उसके महत्व और फायदे पर बात की। उन्होंने कहा, "भटकटैया का आयुर्वेद में खास स्थान है। यह कई रोगों को दूर भगाने में सहायक तो होता ही है, इसके साथ ही यह उन लोगों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है, जिनकी खांसी ठीक होने का नाम नहीं ले रही।" डॉक्टर तिवारी ने बताया, “भटकटैया का काढ़ा बेहद फायदेमंद होता है। इसका काढ़ा बनाने की विधि भी सरल होती है।