राजनीति

कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी भाजपा में शामिल
17-Jul-2020 8:26 PM (59)

एमपी कांग्रेस को एक और झटका

भोपाल, 17 जुलाई। मध्य प्रदेश में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस अब विधायकों की कम होती संख्या से परेशान है। एक के बाद एक कांग्रेस पार्टी को बड़े झटके लग रहे हैं। 23 सीटों पर कांग्रेस विधायकों के दल-बदल कर बीजेपी में शामिल होने के बाद एक और बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है। बुरहानपुर की नेपानगर विधानसभा सीट से कांग्रेस की विधायक सुमित्रा देवी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है।  और भाजपा में शामिल हो गई हैं।
विधानसभा सचिवालय को दो लाइन में भेजे गए इस्तीफे में सुमित्रा देवी ने पद से त्यागपत्र देने की बात लिखी है। जिसे विधानसभा सचिवालय ने स्वीकार कर लिया है।

सुमित्रा कासडेकर 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ कर बीजेपी के कब्जे वाली नेपानगर सीट पर कांग्रेसी झंडा लहराने का काम किया था। नेपानगर सीट से सुमित्रा देवी 2018 के चुनाव में बीजेपी की मंजू दादू को 500 से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। लेकिन अब सुमित्रा आज दल-बदल कर बीजेपी में जाने को तैयार नजर आ रही हैं। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर बिलाल सुमित्रा कासडेकर ने मौन रख लिया है। खबर इस बात को लेकर कि सुमित्रा देवी बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ले सकती हैं। वही कांग्रेस विधायकों के दल बदलने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बीजेपी पर निशाना साधा है। कमलनाथ ने कहा है यह तो पहले से बोलता आ रहा हूं कि बीजेपी बोली लगाने की राजनीति कर रही है। जिसमें संविधान और सिद्धांतों की चिंता नहीं है। वह पार्टी जो कहती रही है कि हम नैतिक और स्वस्थ राजनीति करते हैं। आज पूरे देश में सबसे घटिया और सौदेबाजी की राजनीति बीजेपी कर रही है।

वहीं प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि कांग्रेस विधायकों का पार्टी छोडऩे के पीछे एक बड़ा कारण विकास ना हो पाना है। कोई भी नेता हो या कार्यकर्ता वह विकास की ओर रुख करता है। नेपानगर की विधायक सुमित्रा देवी ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है क्योंकि कांग्रेस के कार्य में विकास की बात नहीं होती। इसलिए कांग्रेस पार्टी के लोग भाजपा में आ रहे हैं। भाजपा में आने के बाद विकास की लहर है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि अभी और तीन विधायक पाइपलाइन में हैं जो बीजेपी में आने को बेताब हैं। बहरहाल बुरहानपुर की नेपानगर सीट बीजेपी का मजबूत किला माना जाता था। 2018 के चुनाव से पहले लगातार चार बार बीजेपी ने यहां पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 2018 से पहले इस सीट पर साल 1998 में सफलता मिली थी। उसके बाद 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की। लेकिन अब यहां पर उपचुनाव के हालात हो गए हैं और कांग्रेस के लिए मुश्किल इस बात को लेकर हो गई है कि अब तक 25 सीटों की तैयारी करने वाली कांग्रेस पार्टी को 26 सीट के लिए भी तैयार होना पड़ेगा। (hindi.news18.com)

कुछ नरम पड़े पायलट, गहलोत बेहतर स्थिति में
15-Jul-2020 6:03 PM (103)

जयपुर, 15 जुलाई । राजस्थान की सियासत की लड़ाई रोमांचक होती जा रही है। सचिन पायलट ने बुधवार को साफ किया कि वह भाजपा में नहीं जा रहे हैं। इस बीच दोनों पक्षों की ओर से अपने रुख में कुछ नरमी के संकेत हैं। बागी विधायकों का खेमा भी अपने आगामी कदम को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में है। सूत्रों ने बताया कि सचिन पायलट कैंप में कुछ असंतुष्ट विधायकों में पार्टी को तोडऩे को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। ऐसे में राजस्थान में कांग्रेस सरकार के लिए खतरा कुछ कम हुआ है। सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 105 विधायकों के समर्थन का दावा किया है जो बहुमत के आंकड़े से चार ज्यादा है।

नजर डालते हैं सियासी घटनाक्रम पर
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायकों को नोटिस जारी किया गया और उन्हें शुक्रवार तक जवाब देने के लिए कहा गया है।
सचिन पायलट ने साफ कर दिया है कि वे बीजेपी में नहीं जा रहे हैं और कांग्रेस में ही हैं। उन्होंने कहा कि हाईकमान के सामने उनकी छवि खराब करने के लिए ही उनके बीजेपी में जाने की खबरें उड़ाई जा रही हैं।
पायलट की यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब कांग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई का नया दौर शुरू किया। उन्हें नोटिस भेजा गया, जिसमें शुक्रवार तक का वक्त देकर उनसे पूछा गया है कि क्यों उन्हें विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित नहीं किया जाए।
मंगलवार को कांग्रेस ने अपने रुख में सख्?ती दिखाते हुए उन्हें राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया। इसके साथ ही उनसे कांग्रेस की प्रदेश इकाई का प्रमुख पद भी छीन लिया गया था। पायलट के दो विश्?वस्?तों को भी मंत्री पद से हटा दिया गया था।
सचिन पायलट ने सोमवार और मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठकों से भी किनारा कर लिया था, जिसके बाद पार्टी की ओर से उन पर कार्रवाई की गई।  
सचिन पायलट ने कांग्रेस नेतृत्व की ओर से हुई कार्रवाई के बाद ट्वीटर पर अपना बायो भी बदल दिया है। पायलट ने अब अपना बायो बदलकर लिखा है, टोंक से विधायक 7 भारत सरकार के आईटी, दूरसंचार और कॉर्पोरेट मामलों के पूर्व मंत्री 7 कमीशंड अधिकारी, टेरिटोरियल आर्मी।
सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई के बाद कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार के खिलाफ आवाज उठने लगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, अपनी पार्टी के लिए चिंतित हूं। क्या हम तभी जागेंगे जब घोड़े हमारे अस्तबल से भाग जाएंगे। पूर्व सांसद प्रिया दत्त और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद भी पायलट के समर्थन में नजर आए।
राजस्थान के सियासी संग्राम पर बीजेपी भी करीब से नजर रख रही है। पार्टी आगे के दिनों की सियासी गतिविधियों के लिहाज से अपना भावी कदम तय करेगी।
राजस्थान में सियासी घमासान के बीच राज्य में बहुजन समाज पार्टी भी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाती नजर आ रही है। कांग्रेस को बीएसपी कोर्ट में घसीट सकती है। 
बीएसपी के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के मामले में पार्टी कांग्रेस को अदालत में चुनौती दे सकती है। बुधवार शाम तक इस बारे में निर्णय की संभावना है। (khabar.ndtv.com

पायलट ने प्रियंका को पूरा पक्ष बताया, पार्टी ने समाधान की जगह कार्रवाई की, आगे की रणनीति अभी तय नहीं
15-Jul-2020 1:27 PM (82)

नई दिल्ली, 15 जुलाई । सचिन पायलट सहित राजस्थान में कांग्रेस के बागी विधायकों पर कार्रवाई की खबर के बाद पायलट के करीबी सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने उनपर एकतरफा कार्रवाई की है। पायलट के करीबी सूत्रों ने कहा कि हमने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी है। पार्टी की कार्रवाई एकतरफा है। इनका कहना है कि इन्होंने अपनी समस्या पार्टी के सामने रखी थी लेकिन समाधान के बजाय उन पर कार्रवाई की गई है। सूत्रों ने कहा, हमने प्रियंका गांधी को अपना पूरा पक्ष बता दिया, लेकिन किसी समाधान की जगह पार्टी ने कार्रवाई की।
इनका कहना है कि उन्हें अभी अयोग्य ठहराने का नोटिस मिला नहीं है। आगे क्या कदम उठाना है, सवाल पर उनका कहना है, हमारी अगली रणनीति अभी तय नहीं है। अयोग्य ठहराने का नोटिस अभी मिला नहीं है। मिलेगा तो जवाब दिया जाएगा।
कांग्रेस ने बुधवार को राज्य सरकार में अपने बागी विधायकों को खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी उनको अयोग्य साबित करने यानी विधानसभा में उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग के साथ स्पीकर के पास पहुंची है, जिसके बाद स्पीकर ने इन विधायकों को नोटिस भेजा है। अनुमान है कि करीब 15 विधायकों पर कार्रवाई की जा रही है। इसमें खुद सचिन पायलट भी शामिल हैं। ((khabar.ndtv.com)
मंगलवार को सचिन पायलट को पार्टी ने डिप्टी सीएम और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से हटा दिया था। उनके अलावा उनके समर्थन में उतरे दो मंत्रियों- रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह से भी पद छीन लिया गया था। पायलट की ओर से दावा किया गया था कि उनके पास कम से कम 30 विधायकों का समर्थन है। लेकिन पायलट खेमे की ओर से सोमवार की रात एक वीडियो शेयर किया गया था, जिसमें 15 से 16 विधायक दिख रहे थे।
पायलट खेमे की ओर से अभी साफ नहीं किया गया है कि उनका अगला कदम क्या होगा। हालांकि, पायलट ने बुधवार को एक बार फिर यह जरूर साफ किया कि उनकी योजना बीजेपी में शामिल होने की नहीं है। पायलट ने कहा कि वो बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं। वो अभी भी कांग्रेस के सदस्य हैं। उन्होंने कहा, मैं बीजेपी में कभी नहीं जाऊंगा। मेरा नाम बीजेपी के साथ जोडक़र पार्टी लीडरशिप के सामने मेरी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पायलट ने कहा कि वो आगे के कदमों पर विचार कर रहे हैं और उनका इच्छा राजस्थान की सेवा करने की है।
 

गहलोत के बूथ पर कांग्रेस नहीं जीत सकी, ये है उनका तजुर्बा-पायलट
15-Jul-2020 12:42 PM (62)

नई दिल्ली, 15 जुलाई। राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की लड़ाई पर तजुर्बा हावी रहा है। दिसंबर 2018 में जब पार्टी को बहुमत मिला तो सीएम पद के लिए अशोक गहलोत को चुना गया। पार्टी हाईकमान का ये फैसला सचिन पायलट को पसंद नहीं आया और उन्होंने अपनी मेहनत का हवाला देते हुए इस पद की मांग की। लंबी खींचतान के बाद गहलोत के नाम पर ही अंतिम मुहर लगी।
कहा जाता है कि अशोक गहलोत की राजस्थान की राजनीति में पकड़ और कांग्रेस हाईकमान से सीधा कनेक्शन उनके पक्ष में गया। अब जबकि सचिन पायलट ने अशोक गहलोत को खुली चुनौती दी तो एक बार फिर गहलोत युवा पायलट पर भारी पड़ गए। उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट ने इंडिया टुडे मैग्जीन को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में पायलट ने बताया कि क्यों वो सीएम पद के हकदार हैं, साथ ही उन्होंने अशोक गहलोत की सियासी पकड़ पर चोट करने वाले उदाहरण भी दिए।
सचिन पायलट ने कहा, 2018 में पार्टी को जीत के मुकाम तक पहुंचाने के बाद मैंने सीएम पोस्ट पर अपना दावा किया। मेरे पास पर्याप्त कारण थे। मैंने जब पार्टी संभाली तो 200 में से हमारे 21 विधायक थे। पांच साल तक जब मैंने लोगों के बीच काम किया तो गहलोत जी ने एक शब्द नहीं बोला। राजे सरकार के खिलाफ काम करते हुए हमने पुलिस का सामना किया। लेकिन जीत के बाद गहलोत जी ने अपने तजुर्बे के आधार सीएम पद पर दावा ठोक दिया।
गहलोत के एक्सपीरियंस पर सवाल उठाते हुए सचिन पायलट ने कहा, 2018 से पहले वो 1999 और 2009 में दो बार सीएम बने। लेकिन दोनों ही कार्यकाल के बाद 2003 और 2013 के चुनाव में वो पार्टी को 56 और 26 सीटों तक ले आए। इसके बावजूद उन्हें तीसरी बार सीएम पद से नवाजा गया। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन का वादा किया। लेकिन गहलोत के अपने बूथ पर कांग्रेस उम्मीदवार नहीं जीत सका, ये उनका एक्सपीरियंस है। इस सबके बावजूद मैंने उन्हें सीएम बनाने के राहुल गांधी जी के फैसले को स्वीकार किया।
सचिन पायलट ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी जी का फैसला मानते हुए अशोक गहलोत को सीएम के रूप में स्वीकार किया। राहुल ने गहलोत से सत्ता और काम का सही बंटवारा करने के लिए कहा। लेकिन मुख्यमंत्री ने मुझे कॉर्नर करने और बेइज्जत करने का एजेंडा बना लिया। जो वादे मैंने लोगों से किए थे, उन्हें पूरा करने से मुझे रोका जाने लगा।
सचिन पायलट ने एक बार फिर कहा है कि वो बीजेपी में नहीं जा रहे हैं। साथ ही ये भी कहा है कि सीएम पद का सवाल नहीं है, सवाल आत्म-सम्मान का है। पायलट ने कहा कि उनकी डिमांड सिर्फ ये है कि सम्मान के साथ काम करने की आजादी मिले। (aajtak.intoday.in)
 

 

जयपुर में कल सुबह 11 बजे बीजेपी की बैठक, वसुंधरा राजे भी रहेंगी मौजूद
14-Jul-2020 10:32 PM (63)

नई दिल्ली, 14 जुलाई: राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच भारतीय जनता पार्टी की कल यानी  बुधवार सुबह 11 बजे जयपुर में बैठक होगी. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल होंगी और राज्य BJP नेताओं के साथ मौजूदा हालात पर चर्चा करेंगी. सूत्रों ने NDTV को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि सचिन पायलट की बगावत को लेकर कांग्रेस खेमे में मची खलबली के बाद बीजेपी बैठक में आगे का रास्ता अख्तियार करेगी. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति का जायजा लेने के लिए आज सुबह वरिष्ठ नेता ओम माथुर को जयपुर भेज दिया है. उनके कल की बैठक में शामिल होने की भी उम्मीद है.

क्लिक करें और यह भी पढ़ें : सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं-सचिन पायलट

कांग्रेस ने राज्य में हुए पूरे घटनाक्रम के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस ने आरोप लगाए कि बीजेपी, अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश रच रही है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान के चार दिन के घटनाक्रम से सब परिचित हैं. बीजेपी ने एक षड्यंत्र के तहत राजस्थान की चुनी हुई सरकार को गिराने की साज़िश की है. भाजपा ने धनबल, सत्ता बल, ईडी और इनकम टैक्स विभाग का गलत इस्तेमाल किया गया है. पूरे देश ने देखा कि अशोक गहलोत सरकार के विधायकों को खरीदने की कोशिश की गई.

उन्होंने कहा, शीर्ष नेतृत्व राहुल, सोनिया ने दूसरे नेताओं ने सचिन पॉयलट से दर्जनों बार बात की. हमने कहा कि खुले दिल से कहा कि आप वापस आईये. जो परिवार में बैठ कर सब सुलझाएंगे.

रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस प्रमुख पद से भी हटाया गया है. उन्होंने कहा कि गोविंद सिंह दोस्तारा नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे. इसके विधायक गणेश घोघरा को यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. हेमसिंह शेखावत को कांग्रेस सेवा दल का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया. (khabar.ndtv.com)

सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं-सचिन पायलट
14-Jul-2020 10:24 PM (89)

नई दिल्ली, 14 जुलाई : राजस्थान के घमासान के बीच सचिन पायलट को मंगलवार को डिप्टी सीएम पद से हटा दिया गया. उनसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  का दर्जा भी ले लिया गया है. पार्टी के इस फैसले के बाद सचिन पायलट की पहली प्रतिक्रिया आई है. फैसला सामने आने के बाद सचिन पायलट ने ट्विटर पर एक ट्वीट में कहा, 'सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं'. सचिन पायलट की ओर से पूरे मामले पर यह पहली सीधी-सीधी प्रतिक्रिया है. मंगलवार को रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पायलट को उनके पदों से हटाने की घोषणा की की है. 

मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक दल की दूसरी बैठक बुलाई थी. इसके पहले सोमवार को कांग्रेस ने सचिन पायलट को संदेश दिया था कि पार्टी बातचीत करने के लिए उनका स्वागत करती है. पार्टी के दरवादे अब भी उनके लिए खुले हुए हैं. लेकिन मंगलवार को भी पायलट मीटिंग में नहीं आए, जिसके बाद एक मीटिंग में पायलट और उनके समर्थन में उतरे पार्टी के मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को उनके पदों से हटा दिया गया. पायलट से डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद वापस लेने का प्रस्ताव इस मीटिंग में पारित हुआ, जो लेकर अशोक गहलोत राज्यपाल कलराज मिश्र से मिलने पहुंचे.

राजभवन से ट्विटर पर जानकारी दी गई कि 'श्री सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री, श्री विश्वेंद्र सिंह, मंत्री एवं श्री रमेश मीणा, मंत्री को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किये जाने का प्रस्ताव मा. राज्यपाल महोदय द्वारा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.'

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 'राजस्थान के चार दिन के घटनाक्रम से सब परिचित हैं. बीजेपी ने एक षड्यंत्र के तहत राजस्थान की चुनी हुई सरकार को गिराने की साज़िश की गई है. बीजेपी ने धनबल, सत्ता बल, ईडी और इनकम टैक्स विभाग का गलत इस्तेमाल किया है. पूरे देश ने देखा कि अशोक गहलोत सरकार के विधायकों को खरीदने की कोशिश की गई.' उन्होंने कहा कि 'सचिन और कुछ विधायक भ्रमित होकर सरकार गिराने की साज़िश में शामिल हो गए. उन्हें मानेसर में क़ैद कर रखा गया है. ये राजस्थान के स्वाभिमान को चुनौती देना है.' सुरजेवाला ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व राहुल, सोनिया और दूसरे नेताओं ने सचिन पायलट से दर्जनों बार बात की, उनसे खुले दिल से वापस आने को कहा गया. उन्होंने कहा कि जो ताकत कांग्रेस नेतृत्व ने सचिन पायलट को इतनी कम उम्र में इतनी ताकत दी उतना कहीं नहीं हुआ. 

लेकिन अब जब सचिन पायलट को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है और वो पहले से आर-पार के मूड में हैं, ऐसे में बीजेपी पर नजर टिकती है और हालात देखते हुए ऐसा लगता है कि अशोक गहलोत को फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़ सकता है.  (khabar.ndtv.com)

राजस्थान में 'सत्‍ता संकट' के बीच पायलट के पोस्‍टर फाड़े, बाद में बदला
13-Jul-2020 9:13 PM (74)

जयपुर, 13 जुलाई : राजस्‍थान में अशोक गहलोत के नेतृत्‍व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले राज्‍य के उप मुख्‍यमंत्री सचिन पायलट  की तस्वीर वाले बैनरों और पोस्‍टरों को मंगलवार दोपहर को वापस लगा दिया गया. पायलट के बगावती अंदाज के चलते इन पोस्‍टर-बैनर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया था. हालांकि, जयपुर में राजस्थान कांग्रेस के कार्यालय में सचिन पायलट की नेम प्लेट को 'नहीं छुआ' गया है.

राजस्थान में सत्‍ता संकट में नाटकीयता भरा मोड़ उस समय आया था जब रविवार शाम को पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया. उन्‍होंने अपने लिए सीएम पद और अपने विश्‍वस्‍तों के लिए प्रमुख विभागों की मांग की थी. इसके बाद, आज सुबह अपने निवास पर मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने शक्ति प्रदर्शन किया. गहलोत ने दावा किया कि उनके पास 106 विधायक हैं.इन विधायकों को बीजेपी या पायलट की ओर से किसी संभावित टूट से बचाने के लिए एक रिसोर्ट में रखा गया है. पायलट और उनके कुछ विश्‍वस्‍त विधायक गहलोत की इस अहम बैठक में मौजूद नहीं थे.

कांग्रेस सूत्रों ने पायलट के 30 विधायकों का समर्थन होने के दावे पर भी पलटवार करते हुए कहा कि उनके पास 16 से अधिक विधायक नहीं हैं. गौरतलब है कि 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत के लिए 101 के 'आंकड़े' की जरूरत है. सचिन पायलट के इन बगावती तेवरों को करीब तीन माह पहले मध्य प्रदेश के दिग्‍गज कांग्रेस नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी की ओर 'शिफ्ट' करने के जैसा कदम माना जा रहा था. हालांकि पायलट ने आज  कहा कि वह "बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं" लेकिन उनके सहयोगियों ने विपक्षी पार्टी के साथ बातचीत से इनकार नहीं किया है.

राजस्थान में जारी इस सियासी संकट के बीच सचिन पायलट के गांधी परिवार से संपर्क होने की खबरों को कांग्रेस ने 'फेक न्यूज' कहते हुए खारिज कर दिया. राजस्थान में विधायकों द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले किसी भी व्यक्ति‍ को दंडित किए जाने संबंधी प्रस्ताव के पारित होने के बाद कांग्रेस सूत्रों ने यह दावा किया है कि सचिन पायलट अब बीजेपी से बात कर रहे हैं.(ndtv)

पायलट ने किया राहुल से मुलाकात का खंडन
13-Jul-2020 4:54 PM (53)

नई दिल्ली, 13 जुलाई। राजस्थान में सियासी उठापटक के बीच सचिन पायलट ने आज शाम राहुल गांधी से मुलाकात का खंडन किया है। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बताया जा रहा था कि वह आज शाम राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। हालांकि उन्होंने इससे इनकार कर दिया है। इसके बाद राजस्थान में सिसासी घमासान कम होता नजर नहीं आ रहा है।

इससे पहले बड़ी संख्या में कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे। विधायक दल की बैठक सुबह 10.30 पर होनी थी लेकिन यह दोपहर 12 बजे के बाद शुरू हुई। यहां सीएम गहलोत का समर्थन करने के लिए कांग्रेस के विधायकों के साथ केंद्रीय नेतृत्व द्वारा भेजे गए कांग्रेस के नेता भी नजर आए। सभी नेताओं ने वहां मीडिया की तरफ विजयी मुद्रा में इशारा किया।

कांग्रेस लगातार इस बात का दावा कर रही है कि राजस्थान में गहलोत सरकार को कोई खतरा नहीं है। इसे सीएम गहलोत का पायलट के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। उधर, तमाम अटकलबाजियों पर विराम लगाते हुए सचिन पायलट ने साफ कर दिया कि वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे।
 
उधर, कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट को मनाती हुई नजर आ रही है।  कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया के जरिए सचिन पायलट से अपील की थी कि वह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल हों और खुले मन से पार्टी के सामने अपनी बात रखें। उन्होंने सचिन के साथ अन्य विधायकों से भी अपील की कि वह पार्टी से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने के लिए स्वतंत्र हैं और अगर उन्हें किसी प्रकार की शिकायत या संदेह हो तो अविनाश पांडे को फोन कर सकते हैं।  (khabar.ndtv.com)

राहुल की ईर्ष्या कांग्रेस के पतन का कारण-उमा भारती
13-Jul-2020 4:51 PM (50)

‘सिंधिया-पायलट युवा पीढ़ी के नेता न बन जाएं’
भोपाल, 13 जुलाई।
राजस्थान में सचिन पायलट बनाम अशोक गहलोत मामले को लेकर बीजेपी की सीनियर नेता उमा भारती  का बड़ा बयान सामने आया है। उमा भारती ने राहुल गांधी की ईर्ष्या को कांग्रेस के पतन का कारण बताया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार हो या राजस्थान सरकार, दोनों के गिरने का सबसे बड़ा कारण है राहुल गांधी की ईर्ष्या है। उमा भारती के अनुसार राहुल गांधी को नौजवान नेताओं से जलन होती है। वह सचिन पायलट और ज्योतिराज सिंधिया से बहुत जलते हैं। उनको लगता था कि इनको जरा भी आगे बढऩे का मौका मिला तो राहुल गांधी को कोई नहीं पूछेगा।

उमा भारती ने कहा कि यह जो कांग्रेस का नाश हुआ है यह राहुल गांधी की ईष्र्या के कारण हुआ है। बकौल उमा, राहुल गांधी को डर था कि ज्योतिरादित्य और सचिन कांग्रेस की युवा पीढ़ी के नेता बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि सचिन और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों योग्य हैं और मेरे भतीजे जैसे हैं। अगर सचिन हमारे यहां आते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी।
 
सचिन पायलट से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुछ महिनों पहले कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। वह लंबे वक्त से कांग्रेस के साथ जुड़े हुए थे और राहुल गांधी के युवा टीम के हिस्सा माने जाते थे। सचिन पायलट भी उसी टीम के नेता गिने जाते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट कई बड़े मौकों पर राहुल गांधी के साथ देखे जा चुके है। (khabar.ndtv.com)

 

गहलोत का शक्ति प्रदर्शन, विधायकों को जुटाकर दिखाई विजयी मुद्रा
13-Jul-2020 2:58 PM (75)

जयपुर, 13 जुलाई (भाषा)। राजस्थान में चल रही सियासी धक्कामुक्की के बीच बड़ी संख्या में कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे। विधायक दल की बैठक सुबह 10.30 पर होनी थी लेकिन यह दोपहर 12 बजे के बाद शुरू हुई। यहां सीएम गहलोत का समर्थन करने के लिए कांग्रेस के विधायकों के साथ केंद्रीय नेतृत्व द्वारा भेजे गए कांग्रेस के नेता भी नजर आए। सभी नेताओं ने वहां मीडिया की तरफ विजयी मुद्रा में इशारा किया। कांग्रेस लगातार इस बात का दावा कर रही है कि राजस्थान में गहलोत सरकार को कोई खतरा नहीं है। इसे सीएम गहलोत का पायलट के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।  

राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इससे पहले कहा कि गहलोत सरकार के पास जादुई आंकड़ा मौजूद है। राज्य सरकार कहीं नहीं जाएगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए कांग्रेस के साथ साथ बीटीपी के दो, माकपा के एक, राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक सहित अनेक निर्दलीय विधायक पहुंचे हैं।  

हार्दिक पटेल का अध्यक्ष बनना क्या अहमद पटेल का कमजोर होना है?
13-Jul-2020 1:31 PM (71)

नई दिल्ली, 13 जुलाई। हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद कुछ अखबारों ने इसे सोनिया गांधी के करीबी कहे जाने वाले अहमद पटेल की गुजरात की राजनीति पर पकड़ कमजोर होने का संकेत बताया है।

इकोनॉमिक टाइम्स अखबार ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी ने इस पीढ़ीगत बदलाव के जरिए एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही यह नियुक्ति कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के पूर्व राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की गुजरात कांग्रेस की राजनीति पर पकड़ कमजोर होने का संकेत भी है।

रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के बीच इस निर्णय से असंतोष का माहौल बना हुआ है जबकि प्रदेश बीजेपी के नेताओं को चिंता हो रही है कि हार्दिक पटेल ना सिर्फ पाटीदारों के, बल्कि सूरत के हीरा उद्योग से जुड़े प्रवासियों के भी वोट खींच सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हार्दिक पटेल की नियुक्ति का निर्णय राहुल गांधी ने लिया है जो पार्टी में एक नई ऊर्जा डालने का उनका प्रयास है।

दिल्ली के एक बड़े कांग्रेसी नेता ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, हार्दिक पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला बहुत ही सधा हुआ फैसला है। वे बहुत ही सक्रिय नेता हैं और जमीनी स्तर पर कांग्रेस को खड़ा करने में सहायक साबित होंगे। इसलिए उन्हें एक महत्वपूर्ण पद दिया गया है, पर ये प्रदेश कांग्रेस का सबसे बड़ा पद नहीं है।

नियुक्ति के बाद हार्दिक पटेल ने कहा, मैंने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की। कुछ ने मुझे ख़ुद बुलाया और सभी मेरे इस पद पर नियुक्त होने से खुश हैं। हर किसी का मुझे समर्थन है। आखिरकार हम सब चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बने।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हार्दिक पटेल पिछले कुछ समय से लगातार कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिल रहे थे। हार्दिक ने गुजरात में जमीनी स्तर पर कांग्रेस के लिए काम करने की इच्छा भी जाहिर की थी।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कांग्रेस पार्टी हार्दिक पटेल को राष्ट्रीय स्तर का पद देना चाहती थी लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया और कहा कि अभी वे राज्य स्तर पर ही काम करना चाहते हैं। (bbc.com/hindi)

राजस्थान पर सिब्बल की चिंता- क्या हम तब जागेंगे, जब घोड़े अस्तबल से चले जाएंगे!
12-Jul-2020 6:11 PM (90)

नई दिल्ली, 12 जुलाई। राजस्थान में कांग्रेस के संकट पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने चिंता जताई है। सिब्बल ने कहा है कि हम कब जागेंगे? उन्होंने कहा कि क्या हम तब जागेंगे जब हमारे घोड़े अस्तबल से निकल चुके होंगे।

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने राज्य में बीजेपी पर कांग्रेस की सरकार को गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी 10 से 15 करोड़ रुपये देकर राजस्थान कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है।

राजस्थान के इस घटनाक्रम पर कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, अपनी पार्टी के लिए चिंतित हूं, क्या घोड़ों के अस्तबल से निकलने के बाद ही हम जागेंगे? इस ट्वीट में कपिल सिब्बल ने किसी राज्य के घटनाक्रम का जिक्र नहीं है, लेकिन ट्वीट का मजमून बता रहा है कि सिब्बल का इशारा राजस्थान की ओर है, और इस मामले में वह कांग्रेस आलाकमान को दखल देने को कह रहे हैं।

राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच टकराव की खबरें आ रही है। शनिवार को जयपुर में हुए कैबिनेट की मीटिंग में सचिन पायलट शामिल नहीं थे। सचिन पायलट के इस समय दिल्ली में होने की खबरें हैं, रिपोर्ट है कि 10 विधायक भी इस वक्त दिल्ली में है। ये विधायक कांग्रेस आलाकमान से मिलकर अपनी समस्याएं रखना चाहते हैं।

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने सरकार गिराने की कोशिशों के मामले में एफआईआर दर्ज किया है। इस मामले में बीजेपी के दो नेता गिरफ्तार किए गए हैं। जबकि एसओजी ने सीएम और डिप्टी सीएम को अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा है।(aajtak.intoday.in)

एमपी में एक और कांगे्रस विधायक भाजपा में
12-Jul-2020 2:56 PM (61)

भोपाल, 12 जुलाई। राजस्थान में सियासी उठा पठक के बीच एमपी में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस विधायक प्रद्युमन सिंह लोधी भी पार्टी छोड़ दिया है। लोधी ने सीएम शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिलने से पहले प्रद्युमन सिंह लोधी पूर्व सीएम उमा भारती से मिलने उनके आवास पर गए थे। 

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने कहा है कि हम विधायक प्रद्युमन सिंह लोधी को सीएम शिवराज सिंह से मिलवाने ले जा रहे हैं। सीएम आवास में प्रद्युमन सिंह लोधी ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस मौके पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें मिठाई खिलाई है। सदस्यता ग्रहण करते वक्त सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मौजूद थे। 

सदस्यता ग्रहण करने के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लोधी को मिठाई खिलाई है। चर्चा है कि लोधी को भी राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस के अन्य भी कई विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। 

बुंदेलखंड में झटका 
2018 के विधानसभा चुनाव में बड़ा मलहरा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ललिता यादव और कांग्रेस के कुंवर प्रद्युम्न सिंह लोधी (मुन्ना भैया) के बीच मुकाबला था। यहां कांग्रेस के कुंवर प्रद्युम्न सिंह लोधी (मुन्ना भैया) ने जीत दर्ज की थी। बुंदेलखंड में कांग्रेस को यह दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले मंत्री रहे गोविंद सिंह राजपूत भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल हो गए थे। 

उमा भारती यहां से लड़ती थीं चुनाव 
2003 के विधानसभा चुनाव में उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तब वह बड़ा मलहरा सीट से ही विधायक चुनी गईं थीं। हालांकि उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा और आठ महीने बाद ही उन्हें सीएम की कुर्सी छोडऩी पड़ी थी। 

पहले ही आ चुके हैं 22 विधायक 
लोधी से पहले भी कांग्रेस के 22 विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। 22 में से 12 लोग शिवराज कैबिनेट में मंत्री बन चुके हैं। लोधी को लेकर अब तक 23 विधायक कांग्रेस छोड़ चुके हैं। चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं। (navbharattimes.indiatimes.com)

सरकार विरोधी साजिश में पायलट को पूछताछ नोटिस, कांग्रेस आलाकमान गहलोत से नाराज
12-Jul-2020 2:52 PM (61)

नई दिल्ली, 12 जुलाई। राजस्थान में सियासी संकट उस समय बढ़ गया जब विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को ही एटीएस और एसओजी की ओर से पूछताछ का नोटिस भेज दिया गया। सचिन पायलट अपनी सरकार के इस कदम से काफी नाराज हो गए हैं। सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया था कि उनके विधायकों को लालच देकर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।

सीएम गहलोत ने इस मामले की जांच के लिए एसओजी का गठन किया था और जो उनके ही अधीन है. इसलिए ये नोटिस एक तरह सेे दोनों के बीच चल रहे छत्तीस के आंकड़ों का नतीजा माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में सीएम गहलोत से पूछताछ हो सकती है लेकिन इस बात को ज्यादा तवज्जों नहीं दे रही है। 

यह जांच बीजेपी के दो नेताओं के फोन कॉल के आधार पर की जा रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि राज्य सरकार को गिराने की बात कही जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि 10 जुलाई को इस नोटिस के मिलने के बाद वह सचिन पायलट काफी नाराज हैं। (khabar.ndtv.com)

गहलोत सरकार गिराने की साजिश पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज
11-Jul-2020 4:19 PM (110)

जयपुर, 11 जुलाई। प्रदेश की राजनीति में पिछले डेढ़ महीने से चल रहे अंदरूनी सियासी घमासान को लेकर एसओजी ने शुक्रवार को बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे में दो मोबाइल नंबर पर हुई बातचीत के अनुसार एसओजी ने खुलासा किया है कि प्रदेश की सरकार को गिराने की भाजपा नेताओं ने कोशिश की है। बातचीत में सामने आया है कि मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के बीच झगड़ा चल रहा है ऐसी स्थिति में कांग्रेस व निर्दलीय विधायक तोडक़र सरकार गिराई जाए। भाजपा नेता द्वारा कांग्रेस से कुशलगढ़ विधायक रमिला खडिय़ा को अपने पक्ष में करने की बात भी सामने आई है। इस बातचीत को तथ्य मानकर एसओजी ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।

एसओजी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में हवाला दिया गया है कि 13 जून 2020 को अवैध हथियार तस्करी की रोकथाम व अवैध विस्फोटक पदार्थ की तस्करी की रोकथाम के लिए दो मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया गया। मोबाइल नंबर से हो रही बातचीत में प्रकट होता है कि मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के बीच झगड़ा चल रहा है। ऐसी स्थिति में सत्तापक्ष कांग्रेस पार्टी व निर्दलीय विधायकों को तोडक़र सरकार गिराई जाए।

सूत्रों से मिली सूचना से यह भी जानकारी में आया है कि कुशलगढ़ विधायक रमिला खडिय़ा को एक भाजपा नेता द्वारा अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। बागीदौरा से कांग्रेस विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय के संबंध में भी ये बात करते हैं कि पहले वह उपमुख्यमंत्री के पाले में थे, उन्होंने पाला बदल लिया है। कांग्रेस विधायकों एवं निर्दलीय विधायकों को 20-25 करोड़ रुपए के प्रलोभन देने की जानकारी भी सूत्रों से प्राप्त हुई है।

इन दो मोबाइल नंबरों की बातचीत में सामने आया है कि वर्तमान सरकार को गिरा कर नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री हमारा होगा और उपमुख्यमंत्री को केंद्र में मंत्री बना दिया जाएगा। लेकिन उप मुख्यमंत्री का कहना है कि मुख्यमंत्री वो बनेंगे, यह भी इन वार्ताओं में सामने आया है।

राज्यसभा चुनाव से पहले सभी विधायकों के इक_े किए जाने पर इन नम्बरों पर बातचीत हुई है कि 25-25 करोड़ वाला मामला अब टांय टांय फिस्स हो गया है। यह भी बातचीत से ज्ञात हुआ है कि राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान सरकार को गिराने की पूरी तैयारी हो गई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा विधायकों को 25-25 करोड़ का प्रलोभन देकर खरीदने की बात कही थी। इसी संबंध में मुख्य सचेतक महेश जोशी का भी परिवाद प्राप्त हुआ था कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के विधायकों व समर्थन दे रहे विधायकों को प्रलोभन देकर राज्यसभा चुनाव में वोटिंग को प्रभावित करने व सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के संबंध में बातचीत करते हैं कि बड़े बड़े राजनीतिक फैसले दिल्ली में हो रहे हैं और 30 जून के बाद घटनाक्रम तेजी से बढ़ेगा। बातचीत में यह भी प्रकट हुआ है कि इस तरह वर्तमान सरकार को गिरा कर नई सरकार का गठन करवा कर ये लोग 1-2 हजार करोड़ रुपए कमा सकते हैं। यह भी कहते हैं कि वह तभी होगा जब इनके हिसाब से मुख्यमंत्री बनेगा। मंत्रिमंडल विस्तार की बातचीत में प्रकट होता है कि विस्तार करेंगे तो 4 आएंगे, 6 नाराज भी होंगे।

उप मुख्यमंत्री के ग्रह नक्षत्रों की बात करते हुए कहते हैं कि 30 जून के बाद इनके ग्रहों में तेजी आएगी और 5 से 10 दिन के बाद ये शपथ लेंगे। दो-तीन दिनों में विधायकों और खास तौर पर निर्दलीय विधायकों के पास धन राशि लेकर उनसे संपर्क साधने की सूचना भी सूत्रों से प्राप्त हुई है। इन बातचीत से स्पष्ट है कि यह वार्ताकार सरकार गिराने की योजना में अन्य लोगों के साथ सम्मिलित हैं और इसके पश्चात पैसा कमाने की योजना बना रहे हैं।

एसओजी ने आगे हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस बातचीत से यह स्पष्ट है कि वर्तमान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई राजस्थान सरकार के विरुद्ध घृणा की भावना से सत्ता पक्ष कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों की खरीद-फरोख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर अनुसंधान किया जाना उचित रहेगा।
(Politalks.News)

सरकार गिराने की कोशिश कर रही भाजपा, विधायकों को 15 करोड़ का ऑफर-अशोक गहलोत
11-Jul-2020 4:16 PM (83)

जयपुर, 11 जुलाई। राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिशों के आरोप के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगाया है। गहलोत ने शनिवार को अपने आरोप में कहा कि बीजेपी राजनीति कर रही है और मेरी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि विधायकों को अपनी निष्ठा बदलने के लिए 10 से 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। 
उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि पूरा देश जाने की बीजेपी अब अपनी सारी सीमाएं पार कर रही है। वह मेरी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि हम विधायकों को पाला बदलने के लिए ऑफर देने की बात सुनते रहे हैं। कुछ लोगों को 15 करोड़ रुपये तक देने का वादा किया गया है और कुछ को अन्य प्रलोभन देने की बात कही गई है। यह लगातार हो रहा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्नाटक और मध्य प्रदेश में सरकार बदलने का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी का असली चेहरा साल 2014 की जीत के बाद ही सामने आ गया था। पहले वो जो काम छुप कर कर रही थी अब वो खुलकर कर रहे हैं। गोवा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में यह देखा। विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच कर्नाटक में पिछले साल और मध्य प्रदेश में जून में बीजेपी सत्तासीन हुई थी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी जबकि कर्नाटक में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी।

गहलोत ने कहा कि बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने पिछले महीने राज्यसभा चुनाव में जीतने के लिए गुजरात में सात विधायकों को खरीदा। राजस्थान में भी ऐसा ही करने की कोशिश क गई लेकिन हमने उन्हें रोक दिया और ऐसा सबक सीखाया कि वो लंबे समय तक याद रखेंगे। 

इससे पहले, राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट व सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी को बयान देने के लिए बुलाया। एसओजी ने शुक्रवार को ही इस बारे में एक प्राथमिकी दर्ज की थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया,‘इस मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सरकार के मुख्य सचेतक को नोटिस जारी किए गए हैं कि वे अपने अपने बयान दर्ज करवाएं। सूत्रों के अनुसार इस मामले में 12 विधायकों और अन्य लोगों को भी जल्द ही नोटिस जारी किए जा सकते हैं।
 
राज्य विधानसभा में कुल 200 विधायकों में से कांग्रेस के पास 107 विधायक और भाजपा के पास 72 विधायक हैं। राज्य के 13 में से 12 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी कांग्रेस को है। (khabar.ndtv.com)

चीन के सहारे सरकार बचाने की कोशिश में जुटे ओली को आया याद- पार्टी विवाद आंतरिक मुद्दा
11-Jul-2020 1:34 PM (95)

काठमांडू, 11 जुलाई। अपनी ही पार्टी में घिर चुके नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शुक्रवार को अपने इस्तीफे की संभावना को खारिज करते हुए पार्टी में फूट को दबाने की कोशिश की।
 
ओली धैर्य और संयम की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मुद्दों का फैसला बातचीत के जरिए किया जाएगा। कोविड-19 को लेकर देश को संबोधित करते हुए ओली ने कहा कि सरकार को लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। चीन के हाथों की कठपुतली कहे जा रहे ओली ने यह भी कहा कि पार्टी का विवाद आंतरिक मुद्दा है। ओली का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार बचाने के लिए चीन खुलेआम दखल दे रहा है।

ओली ने कहा कि आंतरिक विवादों या समस्याओं में शामिल होकर कोई लोगों की जिंदगी बचाने के कर्तव्य से नहीं हट सकता है। मैंने हमेशा कहा है कि सरकार लोगों को बीमारी और भूख से बचाने में पीछे नहीं हटेगी। इसलिए मेरे नेतृत्व में सरकार लोगों की जिंदगी और संपत्ति को महामारी और आपदा से बचाने की कोशिश कर रही है। ओली सरकार कोविड-19 को लेकर इंतजामों में नाकामी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने यह कहते हुए एकता बढ़ाने की अपील की कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति से स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई होगी। भारत के साथ सीमा विवाद बढ़ाने वाले ओली ने कहा कि वह राष्ट्रीय आत्मसम्मान को ऊंचा उठाने और देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। सत्ताधारी पार्टी में फूट को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दों ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा होगा, लेकिन ये आंतरिक मुद्दे हैं और आंतरिक रूप से ही सुलझा लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी में विवाद और चर्चा आंतरिक मुद्दे हैं। (livehindustan.com)

शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार के घंटे भर बाद विरोध-प्रदर्शन
03-Jul-2020 1:18 PM (72)

3 माह इंतजार करते रहे सीएम

भोपाल, 3 जुलाई। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के बागी ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से सरकार बनाने के तीन महीने से भी ज्यादा समय गुजरने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को दूसरी बार अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार किया। इसमें बीजेपी ने पूर्व कांग्रेस नेता को उनके नौ मुख्य समर्थकों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर पुरस्कृत किया है।
 
सिंधिया गुट के 9 लोगों को गुरुवार को मंत्री बनाया गया। दो पहले ही मंत्री बन चुके थे। इनके अलावा कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए बीजेपी में जाने वाले 22 विधायकों में शामिल तीन अन्य पूर्व कांग्रेसी नेताओं को भी मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली है। हालांकि, मंत्रिपरिषद विस्तार के कुछ घंटों के भीतर ही बीजेपी में विरोध के सुर उठने लगे। इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विश्वासपात्र और मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया के समर्थकों ने अपने नेता को मंत्री नहीं बनाए जाने पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। 

सीएम चौहान को इसका अंदाजा पहले से भी था, शायद यही वजह रही कि उन्होंने दिल्ली में कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की आवश्यकता के बारे में पार्टी हाईकमान को समझाने की कोशिश दो दिनों तक की। इसके अलावा बुधवार देर रात तक भोपाल में भी बातचीत जारी रही। जब बात नहीं बनी तो अंत में, चौहान ने मंथन से जहर पीने के आरोप के माध्यम से अपनी निराशा व्यक्त की, जबकि किसी और को अमृत मिला। 

शिवराज सिंह चौहान ने 72 दिनों बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया। इसमें देरी हुई क्योंकि बीजेपी ने मंत्री पद के लिए चेहरे चुनने में सख्ती की। पार्टी ने अपने ही नेताओं पर कठोर रुख अपनाया जबकि, नए लोगों और कांग्रेस के विद्रोहियों को तवज्जो दी। इस दौरान सिंधिया ने अपने समर्थकों के लिए कड़ी मेहनत की।

गुरुवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सीएम चौहान समेत राज्य में कुल मंत्रियों की संख्या 34 हो गई है। हालांकि, पार्टी ने अभी भी कुछ सीटें खाली रखी हैं। लेकिन अलग-अलग गुटों की मांग और सिंधिया कैम्प के दबाव के आगे पार्टी ज्यादा सीट नहीं बचा सकी है। इसलिए अब जल्द कैबिनेट विस्तार की संभावना नहीं के बराबर है। 28 नए मंत्रियों में से 18 बीजेपी के हैं, जिनके पास कुल 203 सदस्यों वाली विधानसभा में  107 विधायक हैं, जबकि 22 पूर्व कांग्रेसी नेताओं के कैम्प से 14 मंत्री बनाए गए हैं। दो पहले ही 21 अप्रैल के विस्तार में जगह पा चुके थे। (jansatta.com)

लालू का नीतीश पर तंज, पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो...
28-Jun-2020 4:18 PM (105)

पटना, 28 जून। बिहार में चुनाव की दस्तक के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक्टिव हो गए हैं। सियासी मैदान से दूर लालू ट्विटर के माध्यम से नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधा। लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री को साधते हुए एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में लालू ने बॉलीवुड के गाने का इस्तेमाल किया। लालू यादव ने लिखा कि पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो भेद खुद जाएगा. आरजेडी प्रमुख ने आगे लिखा कि नीतीश कुमार के पंद्रह साल, भ्रम और झूठ का काला काल।

उन्होंने इस ट्वीट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की है। इस तस्वीर में नीतीश कुमार अपने दल-बल के साथ इलाके का दौरा करते हुए नजर आ रहे हैं और उनके मुख पर एक कपड़ा है। लालू यादव चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता हैं और रांची के रिम्स में भर्ती हैं। बिहार में जारी चुनावी गहमा-गहमी के बीच लालू प्रसाद ट्विटर के जरिए नीतीश कुमार के खिलाफ आक्रमता बढ़ा दी है। वह इससे पहले भी सोशल मीडिया के जरिए  नीतीश पर निशाना साधते रहे हैं।

इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में सभी दल चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। पिछले दिनों नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा था कि वह नीतीश बनाम लालू राज के 15 सालों की चर्चा करें। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से करें कि लोगों को बताएं कि लालू राज में 15 सालों में कितना काम हुआ था और पिछले 15 सालों में नीतीश सरकार में क्या क्या काम किए गए। (https://khabar.ndtv.com)