राजनीति

एलपीजी की कीमतें बढ़ने को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
16-Dec-2020 8:45 PM (126)

नई दिल्ली, 16 दिसंबर | कांग्रेस ने बुधवार को एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर बुरा असर पड़ रहा है। संवाददाताओं से मुखातिब कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "पिछले 15 दिनों में रसोई गैस की कीमतों में प्रति सिलिंडर 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसने न केवल परिवारों के मासिक बजट को खराब किया है, बल्कि इससे मध्यम वर्ग, गरीब, निम्न मध्यम वर्ग के लिए लिए बहुत बड़ा दर्द दिया है।"

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का उदाहरण देते हुए श्रीनेत ने कहा कि एलपीजी सिलिंडर 757 रुपये में बेचे जा रहे हैं और इसकी तुलना 2014 में सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडरों से की जा सकती है।

उन्होंने कहा, "यह तस्वीर बहुत ही चौंकाने वाली है। 2014 में सब्सिडी वाले सिलेंडर 412 रुपये में बेचे जा रहे थे। अब इसकी कीमत में 183 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और सिलेंडर 595 रुपये में बेचा जा रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि गैर-सब्सिडी वाले सिलिंडर 574 रुपये में बेचे गए, जबकि आज उन्हें 694 रुपये में बेचा जा रहा है।

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "सिलिंडर की कीमत बढ़ाने का आम घरों और गृहणियों के बजट पर असर होता है।"

उन्होंने सवाल किया कि भाजपा की वे महिला नेत्रियां कहां गईं, जो कांग्रेस की सरकार के समय रसोई गैस के दाम बढ़ने पर सिलिंडर लेकर धरने पर बैठती थीं?

सुप्रिया ने कहा, "क्या मुनाफा सिर्फ सरकार का हो और कष्ट आम लोग झेलें? अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमत गिर गई है तो इसका फायदा आम लोगों को मिलना चाहिए।"

सुप्रिया श्रीनेत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर भी सरकार पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आम लोगों को कुछ राहत दी जाए, क्योंकि वे इस समय आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, वेतन में कटौती और भारतीय अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।  (आईएएनएस)

सनी देओल की सुरक्षा बढ़ाई गई
16-Dec-2020 8:00 PM (114)

चंडीगढ़, 16 दिसंबर | अभिनेता और भाजपा के पंजाब से सांसद सनी देओल ने नए कृषि बिल को लेकर केंद्र सरकार का समर्थन किया था, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने देओल को 11 सुरक्षाकर्मियों के साथ वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है, जिसमें दो कमांडो शामिल हैं।

गुरदासपुर के सांसद देओल ने 6 दिसंबर को ट्विटर पर एक बयान पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मामले को केवल किसानों और सरकार के बीच रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि बहुत से लोग हालात का फायदा उठाना चाहते हैं और समस्याएं पैदा कर रहे हैं। वे किसानों के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उनका अपना एजेंडा हो सकता है।"  (आईएएनएस)

बोलने का मौका न मिलने से नाराज राहुल गांधी ने बीच में ही छोड़ी संसदीय समिति की मीटिंग
16-Dec-2020 7:57 PM (142)

नई दिल्ली, 16 दिसंबर| कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसदीय समिति के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार  बुधवार को रक्षा पर संसदीय समिति की बैठक को राहुल गांधी और दो अन्य कांग्रेसी नेता बीच में ही छोड़कर चले गए. खबरें हैं कि पैनल में सशस्त्र बलों की यूनिफॉर्म को लेकर बात हो रही थी. यह बात राहुल गांधी को नागवार गुजरी और उन्होंने बीच में कुछ कहना चाहा, लेकिन  राहुक के बीच में बोलने के दौरान समिति के अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के सांसद जुअल ओरम ने उन्हें बोलने नहीं दिया.

इसी से नाराज होकर राहुल गांधी ने मीटिंग को बीच में छोड दिया. राहुल गांधी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूद जवानों के मुद्दे को उठाना चाहते थे.उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व को राष्ट्रीय सुरक्षा और लद्दाख में चीन से लड़ रहे जवानों को कैसे मजबूत बनाया जाए जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए.

राहुल गांधी ने आरोप लगाए हैं कि मीटिंग के दौरान न ही उन्हें और न ही उनके साथियों को बोलने दिया गया. यह विवाद तब सामने आया जब पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और हरियाणा से राज्यसभा सांसद बीजेपी के देवेंद्र पॉल वत्स ने यूनिफॉर्म में बदलाव के मुद्दे को उठाया था. इसके बाद गांधी ने जानना चाहा कि क्यों राजनेताओं को सेना की वर्दी और रैंक तय करनी होती है. उन्होंने सलाह दी कि यह काम सेना को ही करने दिया जाए.

इस बैठक में राहुल के साथ कांग्रेस नेता राजीव सातव और रेवानाथ रेड्डी भी बाहर आ गए थे. कांग्रेस नेता ने आरोप लगया है कि इस मीटिंग में जवानों को बेहतर हथियार देने पर चर्चा करने के बजाए पैनल यूनिफॉर्म पर बात कर समय खराब कर रही थी. इस मीटिंग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चर्चा के दौरान राहुल ने बीच में कहा कि यूनिफॉर्म बलों के वरिष्ठ अधिकारी भी तय कर सकते हैं. इस दौरान गांधी लगातार सवाल पूछ रहे थे कि जनरल रावत और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर क्यों राजनेताओं को सुन रहे हैं.  (hindi.news18.com)

तेजस्वी के कारण राजद विपक्ष की जिम्मेदारी निभाने में विफल
16-Dec-2020 7:27 PM (87)

पटना, 16 दिसंबर | भारतीय जनता पार्टी के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राजद जिम्मेदार प्रतिपक्ष के संवैधानिक दायित्व का निर्वाह ठीक से नहीं कर पा रहा है। भाजपा नेता मोदी ने तेजस्वी यादव पर राज्य से बाहर रहने का आरोप लगाते हुए अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा, "बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव फिर लगातार राज्य से बाहर समय गुजार रहे हैं, जिससे राजद जिम्मेदार प्रतिपक्ष के संवैधानिक दायित्व का निर्वाह ठीक से नहीं कर पा रहा है। पिछले सदन के अंतिम वर्ष में तो वे स्पीकर को बताए बिना 33 दिन तक गैरहाजिर थे।"

मोदी ने आगे लिखा, "तीन नए कृषि कानूनों के विरुद्ध किसानों को गुमराह करने के लिए आहूत भारत बंद के समय तेजस्वी यादव के गायब रहने के कारण महागठबंधन नेतृत्वहीन रहा।"

उन्होंने तेजस्वी को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें समझना चाहिए कि कोई भी पद दायित्व निभाने के लिए होता है, केवल जनता के पैसे से सुरक्षा-सुविधा पाने के लिए नहीं।  (आईएएनएस)

रजनीकांत की पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह तय
15-Dec-2020 9:28 PM (107)

कमल हासन बोले-हमारे गठबंधन में एक कॉल की दूरी

(बी सिवाकुमार)

चेन्नई, 15 दिसंबर| सिनेमा से राजनीति में आने की घोषणा करने वाले दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत की पार्टी के नाम पर फिलहाल संदेह बरकरार है. लेकिन इस बीच तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग की सूची ने संकेत दिया है कि सुपरस्टार के राजनीतिक संगठन को 'मक्कल सेवई काची' कहा जा सकता है. कुछ दिनों पहले, चुनाव आयोग ने अप्रैल-मई 2021 में होने वाले चुनावों के लिए आवंटित किए गए प्रतीकों के साथ पंजीकृत नई पार्टियों के नाम जारी किए थे. उस समय, रजनी मक्कल मंडलम के तूतीकोरिन सचिव एंथोनी स्टालिन ने 'मक्कल सेवई काची' के नाम का पंजीकरण किया था.

स्टालिन ने अपना चेन्नई का पता नंबर 10, बालाजी नगर, अर्नावूर, चेन्नई 600057 बताया है. उन्होंने 'रजनीकांत' नाम का भी उल्लेख किया है और अनुरोध किया है कि 'बाबा' के हस्ताक्षर पार्टी के प्रतीक के रूप में दिए जाएं. 3 दिसंबर को रजनीकांत ने इस बात की पुष्टि करते हुए सस्पेंस तोड़ दिया कि वह एक नई पार्टी लॉन्च करेंगे और यह सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन अभिनेता ने अपने समर्थकों और अन्य लोगों को 31 दिसंबर तक सस्पेंस रखने के लिए कहा था, इस दिन उन्होंने अपनी पार्टी का नाम जारी करने का आश्वासन दिया था.

पार्टी को मिला ये चुनाव चिन्ह
"स्टालिन द्वारा 'मक्कल सेवई काची' नाम के साथ आवेदन पंजीकृत किया गया है और उन्होंने दो प्रतीकों का सुझाव दिया है. पहला अभिनेता का प्रसिद्ध प्रतीक 'बाबा मुद्रा' है, जिसमें वह मूल रूप से मध्यमा और अनामिका को मोड़े रहते हैं. इसके अलावा दूसरा प्रतीक ऑटो है. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि चुनाव आयोग ने पार्टी के लिए ऑटो सिंबल आवंटित कर दिया है.

अधिकारी ने कहा कि "प्रतीकों को केवल प्रतीकों की एक टोकरी से आवंटित किया जाता है और इसके अलावा, चुनाव आयोग किसी भी पार्टी के लिए कोई प्रतीक आवंटित नहीं करेगा. यहां तक ​​कि प्रतीक के साथ, उदाहरण के लिए, अगर यह एक कंघी है, तो यह प्रतीकों की टोकरी में मौजूद होना चाहिए."

अधिकारी के अनुसार, एक अलग नाम की पार्टी 2018 में पंजीकृत की गई थी और कुछ महीने पहले इसका नाम बदलकर मक्कल सेवई काची कर दिया गया था.

31 दिसंबर को बड़ी घोषणा कर सकते हैं रजनीकांत
एक विश्लेषक ने कहा "एआईएडीएमके को भी इसी तरह पंजीकृत किया गया था. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन एआईएडीएमके के संस्थापक थे. पार्टी का नाम चुनाव आयोग में एमजीआर फैंस एसोसिएशन के एक पदाधिकारी अंकापुत्तुर रामलिंगम द्वारा लागू किया गया था,"

ऐसा कहा जाता है कि पार्टी के विवरण की पुष्टि रजनीकांत खुद 31 दिसंबर को कर सकते हैं. 3 दिसंबर को घोषणा के तुरंत बाद, अभिनेता ने अपने करीबी लोगों के साथ मुलाकात की और मंदरम के जिला सचिवों के साथ चर्चा भी की. वर्तमान में, अभिनेता सन पिक्चर्स के बैनर तले बन रही फिल्म 'अन्नथा' के लिए हैदराबाद में है.


इस बीच, अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने कहा है कि वह रजनीकांत के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "यह लोगों के कल्याण के लिए है. यहां कोई अहंकार नहीं है. हम प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे."  (hindi.news18.com)

बंगाल भाजपा ने रोहिंग्या मुद्दा उठाया, पूछा-मतदाता सूची लंबी कैसे
15-Dec-2020 8:58 PM (113)

नई दिल्ली, 15 दिसंबर | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में मसौदा मतदाता सूची (ड्राफ्ट वोटर्स लिस्ट) के प्रकाशन के लिए तैनात आयोग के कर्मियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। बंगाल भाजपा की ओर से लिखा यह पत्र मंगलवार को प्रकाश में आया। बंगाल भाजपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए नए मतदाता पंजीकरण में अचानक हुई वृद्धि पर आपत्ति जताई है, जिसे सीमा पार से अवैध घुसपैठ से जोड़ा जा रहा है। पार्टी ने चुनाव आयोग को लिखे इस पत्र में रोहिंग्या प्रवास के मुद्दे को भी उठाया है।

विधायक सब्यसाची दत्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र में कहा है, "रोहिंग्याओं के अवैध रूप से सीमा के दूसरी ओर से पलायन करने और पश्चिम बंगाल की घनी आबादी वाले राज्य में मिलाने के सवाल को खारिज नहीं किया जा सकता।"

उन्होंने शिकायत करते हुए कहा, "हाल ही में यह देखा गया है कि बांग्लादेश के साथ सीमाओं को साझा करने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में नए मतदाता पंजीकरण में अचानक वृद्धि देखी है, जो स्थानीय सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से समर्थित अवैध सीमा-पार घुसपैठ की एक धारणा पेश करता है।"

भाजपा नेता ने कहा, "अगर इसकी अनुमति दी जाती है, तो इससे न केवल देश की सुरक्षा प्रभावित होगी, बल्कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पर भी गहरा असर पड़ेगा।"

पार्टी ने तर्क दिया कि नई टाउनशिप के क्षेत्रों में वृद्धि समझ में आती है और इसलिए पार्टी के लिए यह स्वीकार्य भी है। मगर उसे वहां पर इसकी वृद्धि पर आपत्ति है, जहां न तो नई टाउनशिप सामने आई है, न ही पलायन हुआ है।

भाजपा विधायक ने अपने पत्र में यहां तक आरोप लगाया है कि उन्होंने मतदाता सूची के मसौदे को संभालने वाले चुनाव आयोग के कर्मियों के कर्तव्य निर्वहन में विसंगतियां पाई हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मसौदा सूची तैयार करने वालों का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को संतुष्ट करना ही मुख्य उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के संबंधित कर्मचारी अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसे गलत कामों में लिप्त हैं।

पश्चिम बंगाल में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।  (आईएएनएस)

देश में भाजपा है असली 'टुकड़े-टुकड़े गैंग'
15-Dec-2020 8:09 PM (101)

चंडीगढ़, 15 दिसंबर | शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने मंगलवार को अपनी पार्टी की पूर्व सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर हमला बोला और कहा कि देश में भाजपा ही असली 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है। बादल ने किसानों के साथ बातचीत विफल रहने के बाद भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समुदायों के बीच दरार पैदा कर रही है, उन्हें बांट रही है। देश में असली 'टुकड़े टुकड़े गैंग' तो वही है।

बादल ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा असली 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है। इस पार्टी ने ही राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाया है। पहले तो इसने हिंदुओं को मुसलमानों से लड़ाने का काम किया और अब पंजाबी हिंदुओं को सिखों के खिलाफ और विशेषकर किसानों के खिलाफ भड़का रही है।"

उन्होंने कहा, "वे देशभक्त पंजाब को सांप्रदायिक आग की लपटों में धकेल रहे हैं।"

पूर्व उपमुख्यमंत्री, जिन्होंने पंजाब सरकार में भाजपा के साथ 10 साल का गठबंधन किया था, ने भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को अपने अहंकार को अलग रख प्रदर्शनकारी किसानों की बात सुनने को कहा।

उन्होंने कहा, "जो भी सत्तारूढ़ शासन के खिलाफ बोलता है, वे उन्हें 'टुकड़े टुकड़े गैंग' कहते हैं।"

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 20 दिनों से जारी है। केंद्र द्वारा लाए गए तीन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हजारों किसान दिल्ली की सीमा से लगते बॉर्डरों पर डटे हुए हैं, क्योंकि दिल्ली पुलिस उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दे रही है।

इस बीच भाजपा नेताओं ने कहा कि 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' किसान प्रदर्शनों का फायदा उठा रहा है। इस पर शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे ही असली टुकड़े-टुकड़े गैंग करार दिया है।  (आईएएनएस)

किसानों की आर्थिक उन्नति में नए कृषि कानून उपयोगी
14-Dec-2020 10:49 PM (133)

भोपाल, 14 दिसंबर | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नए कृषि कानून किसानों की आर्थिक उन्नति में उपयोगी होंगे। मध्यप्रदेश में किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) अनुबंध मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। मंडी के अलावा फसल को बेचने के वैकल्पिक उपायों का लाभ किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने मिंटो हॉल में सिंचाई योजनाओं के वर्चुअल लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, "मध्यप्रदेश के सिंचाई रकबे में निरंतर वृद्धि की जाएगी। यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भगवान के बाद मेरे लिए किसान हैं। वो धरती पर अन्न उगाता है। खून-पसीना एक करता है। हमारी व्यवस्था का केंद्र बिंदु है किसान। सिंचाई साधनों का विस्तार धरती पुत्र किसानों के लिए वरदान होता है।"

उन्होंने कहा कि, "प्रदेश के सिंचाई रकबे को 65 लाख तक पहुंचाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुनी करना चाहते हैं। मध्यप्रदेश इस लक्ष्य को पूरा करने में सक्रिय रहेगा।"

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि, "प्रदेश में निर्मित सिंचाई क्षमता का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। इस वर्ष गेहूं उत्पादन उपार्जन में मध्यप्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ दिया। कोरोना काल में कम से कम अन्न का कोई संकट नहीं रहा। इस अवधि में यह राहतकारी सिद्ध हुआ। प्रदेश में कृषि अधोसंरचना को सशक्त बनाया जाएगा। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को आंदोलन का रूप देंगे। हमारा लक्ष्य किसानों की हालत को बदलना है।"  (आईएएनएस)

लालू यादव की किडनी सिर्फ 25 फीसदी काम कर रहीं
14-Dec-2020 10:11 PM (95)

रांची/पटना, 14 दिसंबर | जेल में बंद राजद सुप्रीमो लालू यादव को अब डायलिसिस से गुजरना पड़ सकता है, क्योंकि उनकी दोनों किडनी केवल 25 फीसदी काम कर रही हैं। रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में लालू का इलाज कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद ने सोमवार को कहा कि राजद प्रमुख की दोनों किडनी के काम करने में कोई सुधार नहीं हुआ है और उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

उन्होंने कहा, "हमने इस संबंध में सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सूचित कर दिया है। इससे पहले, उनकी किडनी 35 फीसदी काम कर रही थी, जो अब घटकर 25 फीसदी रह गई है। गुर्दे की बीमारी चौथे स्टेज में पहुंच गई है।"

डॉक्टर ने कहा कि लालू को जब रिम्स में भर्ती कराया गया था, तो उस समय उनकी किडनी का कार्य स्तर तीसरे चरण में था और डॉक्टरों की देखरेख में दो साल तक इसने बेहतर तरीके से कार्य किया।

लालू का इलाज अगस्त, 2018 से ही रिम्स के पेइंग वार्ड में चल रहा है। उन्हें सितंबर में रिम्स निदेशक के बंगले में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन बिहार भाजपा के एक विधायक को कथित रूप से टेलीफोन किए जाने की शिकायत के बाद उन्हें फिर से पेइंग वार्ड में भेज दिया गया।

पिछले हफ्ते, सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय से कहा कि लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में वापस भेजा जाए, क्योंकि उनकी हालत ठीक है और उनका इलाज जेल में भी किया जा सकता है।

राजद के बिहार प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, "उनकी हालत ठीक नहीं है और डॉक्टर चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। शनिवार को कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने उनसे रिम्स में मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा था।"

गगन ने कहा, "डॉक्टर परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। लालूजी को डायलिसिस के लिए सुझाव दिया गया है।"

राजद के एक अन्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, "यह राजद परिवार के लिए चिंता का विषय है। अदालत से अनुमति लेने के बाद लालूजी के परिवार के सदस्य जल्द ही रांची जा सकते हैं।"  (आईएएनएस)

पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले बढ़ती हिंसा
14-Dec-2020 9:47 PM (417)

पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा पर हमले के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो रहा है. कार्यकर्ता तो पहले ही हिंसा का शिकार हो रहे थे, अब बीजेपी और तृणमूल के विवाद की आंच प्रशासनिक अधिकारियों तक भी पहुंचने लगी है.

    डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी का लिखा-

बीजेपी प्रमुख नड्डा पर हुए हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर दिल्ली बुला लिया, लेकिन राज्य सरकार ने उनको रिलीज करने से इंकार कर दिया है. बीते दो दिनों के दौरान बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद तनाव बढ़ रहा है. बीजेपी ने इसके लिए ममता बनर्जी की तृणमूल पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है. लगातार तेज होते विवाद के बीच गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के दौरे पर 19 दिसंबर को कोलकाता जाएंगे. चुनावों से पहले बढ़ती हिंसा को देखते हुए बीजेपी ने राज्य में तत्काल केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग उठाई है.

बीते सप्ताह बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के कथित हमले के बाद से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है. उस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्यपाल के अलावा राज्य सरकार से रिपोर्ट तो मंगाई ही है, मुख्य सचिव आलापन बनर्जी और पुलिस महानिदेशक बीरेंद्र को 14 दिसंबर को दिल्ली पहुंचने के लिए भी समन भी भेजा था. लेकिन सरकार ने उनको भेजने से मना कर दिया. उसके बाद केंद्र ने उन तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर दिल्ली पहुंचने को कहा है जो दक्षिण 24-परगना जिले में सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे. वहीं नड्डा के काफिले पर पथराव किया गया था. लेकिन राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे पत्र में साफ कर दिया है कि उनको दिल्ली नहीं भेजा जाएगा. इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार आमने-सामने है.

केंद्रीय सेवा नियमों के मुताबिक किसी अफसर को केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर भेजने के लिए राज्य सरकार की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जरूरी होता है. लेकिन इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार में असहमति की स्थिति में केंद्र के फैसले को लागू करना राज्य की मजबूरी होगी.

हत्याओं पर विवाद
शनिवार और रविवार को बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के हाथों कथित हत्या के मुद्दे पर भी राजनीति में उबाल है. बीजेपी के एक कार्यक्रम में हुई हिंसा में शनिवार को एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और कम से कम छह कार्यकर्ता घायल हो गए. घायलों में कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई गई है. यह हिंसा उस समय हुई जब बीजेपी कार्यकर्ता उत्तर 24-परगना जिले के हालीशहर में पार्टी के गृह संपर्क अभियान के दौरान लोगों से मुलाकात कर रहे थे. प्रदेश बीजेपी ने इस हिंसा व हत्या के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है, "हालीशह में कार्यकर्ता साकेत भवाल की टीएमसी के गुंडों ने निर्मम हत्या कर दी और छह कार्यकर्ताओं को गंभीर रूप से घायल कर दिया.”

इस मुद्दे पर रविवार को पूरे इलाके में भारी तनाव रहा. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और ममता बनर्जी के पुतले भी जलाए. दूसरी ओर, रविवार को ही पूर्व बर्दवान जिले के पूर्वस्थली में एक अन्य बीजेपी कार्यकर्ता सुखदेव प्रामाणिक की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई. लेकिन बीजेपी के नेताओं और सुखदेव के परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए इसके लिए भी तृणमूल को जिम्मेदार ठहराया है. उत्तर 24-परगना जिले में बीजेपी कार्यकर्ता भवाल की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. दूसरी ओर, बर्दवान में भी बीजेपी ने सोमवार को बंद रखा और धरना-प्रदर्शन किया.

बीजेपी का आरोप
प्रदेश बीजेपी की ओर से एक ट्वीट में कहा गया है, "कटवा के बीजेपी कार्यकर्ता सुखदेव प्रमाणिक की टीएमसी के गुंडों ने निर्मम हत्या कर दी. 24 घंटे से भी कम समय में दो कार्यकर्ताओं की हत्या हो गई है. इससे पता चलता है कि दीदी सत्ता में बने रहने के लिए कितनी हताश हैं. लेकिन वह असफल रहेंगी. लोगों ने बंगाल में शांति बहाल करने और 2021 में टीएमसी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का फैसला किया है.”

बीजेपी उपाध्यक्ष बी. रायचौधरी आरोप लगाते हैं, "ममता बनर्जी जानबूझकर हत्या करा रही हैं ताकि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए और उनको विक्टिम कार्ड खेलने का मौका मिल जाए. लेकिन यहां राष्ट्रपति शासन लागू नहीं होगा. हम लोग ममता बनर्जी की राजनीति को राजनीति के मैदान में ही उखाड़ देंगे.” बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल राय कहते हैं, "राज्य में लोकतंत्र और कानून व व्यवस्था नामक कोई चीज नहीं बची है. रोजाना हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है.”

तृणमूल का जवाब
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन घटनाओं को बीजेपी की अंदरुनी गुटबाजी और निजी दुश्मनी का नतीजा बताया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता व शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम कहते हैं, "हमारी पार्टी हिंसा और हत्या की राजनीति पर भरोसा नहीं करती. बीजेपी के लोग खुद माहौल बनाने के लिए हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं.” जेपी नड्डा पर हमले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इसे बीजेपी की नौटंकी करार दिया था. तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता शांतनु सेन कहते हैं, "वर्ष 2011 के बाद राजनीतिक हिंसा में हमारी पार्टी के कार्यकर्ता ही सबसे ज्यादा मारे गए हैं. कभी लेफ्ट के हाथों तो कभी बीजेपी के हाथों.”

जे.पी.नड्डा पर हमले के बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी अपनी रिपोर्ट में बंगाल में कानून व व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने की बात कही थी और राज्य सरकार को संवैधानिक राह पर चलने की सलाह दी थी. इसी सप्ताह चुनाव आयोग की टीम भी कोलकाता के दौरे पर आ रही है. ऐसे में बीजेपी समेत तमाम विपक्षी दल चुनावों से पहले ही ही बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग उठा सकते हैं. बीजेपी तो पहले से ही यह मांग कर रही है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अब हिंसा और हत्याओं की राजनीति और तेज होने का अंदेशा है. राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, "विधानसभा चुनावों के लिए अभियान की शुरुआत तो अमित शाह के दौरे से ही हो गई थी. लेकिन नड्डा के दौरे ने माहौल और गरमा दिया है. उसके साथ ही बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की मौत ने इस तनातनी की आग में घी डालने का काम किया है. ऐसे में आने वाले दिनों में तनाव व हिंसा के और बढ़ने का अंदेशा है.”  (dw.com)

छिंदवाड़ा की जनता जिस दिन कहेगी राजनीति से सन्यास ले लूंगा
14-Dec-2020 8:29 PM (109)

छिंदवाड़ा, 14 दिसंबर | मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि छिंदवाड़ा की जनता जब कहेगी वे सन्यास ले लेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ नौ बार छिंदवाड़ा से सांसद रहे हैं और वर्तमान में विधानसभा सदस्य हैं। वहीं वर्तमान में छिंदवाड़ा से सांसद उनके पुत्र नकुल नाथ हैं। कमल नाथ के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह तरह के सवाल किए जा रहे हैं। छिंदवाड़ा प्रवास पर आए कमल नाथ से पत्रकारों ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि, "मैं उस दिन सन्यास ले लूंगा, जिस दिन छिंदवाड़ा की जनता कहेगी।"

ज्ञात हो कि राज्य में हुए विधानसभा के उप-चुनाव के नतीजों के बाद से भाजपा की ओर से यही कहा जा रहा है कि कमल नाथ अब राज्य में नहीं रहने वाले, वे दिल्ली चले जाएंगे।  (आईएएनएस)

भारत में फेसबुक पर भाजपा-आरएसएस का कब्जा
14-Dec-2020 8:19 PM (112)

नई दिल्ली, 14 दिसंबर | कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद कहा कि फेसबुक पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कब्जा है। फेसबुक इसलिए नफरत फैलाने वाली सामग्री पर कार्रवाई नहीं करती। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए और कहा, "एक बार फिर साबित हो गया है कि भारत में फेसबुक भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नियंत्रण में है।"

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने फेसबुक को लेकर अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक खबर का हवाला देते यह टिप्पणी की।

कांग्रेस नेता ने एक टीवी समाचार का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी खबर का हवाला देते हुए कहा गया है कि फेसबुक ने अपना कारोबार बिना बाधा के चलते रहने, अपने कार्यालयों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के भड़काऊ वीडियो पर कार्रवाई नहीं की।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कार्रवाई करने पर फेसबुक को सत्ताधारी भाजपा के साथ संबंध खराब होने का डर था, इसलिए उसने बजरंग दल के भड़काऊ वीडियो को लेकर उसके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की।

अखबार ने लिखा है कि यदि फेसबुक बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करती तो कंपनी को अपना काम करने में दिक्कत होती, साथ ही उसके कर्मचारियों और कार्यालयों को भी खतरा हो सकता था।

यह पहली बार नहीं है कि फेसबुक विवाद में है। इससे पहले, इस साल अगस्त में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियां कथित रूप से पक्षपाती थीं और व्यापारिक हितों के कारण सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में थीं।

रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में फेसबुक की सार्वजनिक नीति की प्रमुख अंखी दास ने प्लेटफॉर्म पर अभद्र टिप्पणी पोस्ट किए जाने के बावजूद सत्ता पक्ष और उसके एक नेता के पक्ष में पैरवी की थी।

फेसबुक ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया था। इस साल अक्टूबर में अंखी दास ने कंपनी छोड़ दी।

उस समय कांग्रेस ने कहा था कि सिर्फ एक व्यक्ति को बदलने से मसला हल नहीं होगा।

कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने इससे पहले नसीहत दी थी कि फेसबुक को अपनी संस्थागत प्रक्रियाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के पूरी तरह से सुधार के माध्यम से अपनी तटस्थता का प्रदर्शन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, "भारत के सामाजिक सौहार्द को खतरे में डालते हुए झूठे, धार्मिक ध्रुवीकरण और नफरत फैलाने वाले समाचार/सामग्री को उनके प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों को भी रेखांकित करना चाहिए।"

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 14 अगस्त को अंखी दास की अगुवाई वाली फेसबुक इंडिया की टीम के कथित पक्षपातपूर्ण मामलों पर महत्वपूर्ण सूचना दी थी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया था।

इसने रिपोर्ट की थी कि अंखी दास ने सत्तारूढ़ दल और उसके नेताओं का पक्ष लिया था और प्रचार प्रसार के माध्यम से नकली और घृणित समाचार फैलाए जा रहे थे।

इसके बाद, कांग्रेस ने फेसबुक इंक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को दो पत्र लिखे, जिसमें उन्होंने मामले को गंभीरता से देखने का आग्रह किया था। फेसबुक ने अपनी तटस्थता और उचित कार्रवाई का वादा करते हुए पत्रों का जवाब दिया था।  (आईएएनएस)

दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान नहीं हैं आतंकवादी
14-Dec-2020 8:14 PM (126)

नई दिल्ली, 14 दिसंबर | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में सोमवार को एक दिन का उपवास रखा। केजरीवाल के मुताबिक किसान और जवान किसी भी देश की नींव होते हैं और अगर किसी देश के किसान और जवान संकट में हों तो वह देश कैसे तरक्की कर सकता है। जिस किसान को खेतों में होना चाहिए वह इतनी कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर बैठा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मुझे खुशी इस बात की है कि आज पूरा देश किसानों के साथ खड़ा है। देशभर में फौजी किसान के साथ खड़े हैं, जवान किसान के साथ खड़े हैं, खिलाड़ी किसानों के साथ खड़े हैं, बड़ी-बड़ी बॉलीवुड की हस्तियां किसानों के साथ खड़ी हैं, देश के वकील, डॉक्टर सब किसानों के साथ खड़े हैं।"

दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी के मुख्यालय पहुंचे केजरीवाल ने यहां सामूहिक उपवास में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोग भले ही सिंघु बॉर्डर न पहुंच पाए हों, लेकिन देश भर में लाखों करोड़ों लोगों ने किसानों के साथ खड़े होकर उनके लिए दुआएं मांगी हैं।

केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के विधायकों पार्षदों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि, "सोच कर देखो कितने ही किसान ऐसे हैं जिनके दो बेटे हैं। एक बेटा किसान बन गया और दूसरा बेटा सरहद पर जवान बन गया। फौज में जब उनका बेटा सुनता है कि मेरे भाई को आतंकवादी कहा जा रहा है तो उसके दिल पर क्या गुजरती होगी।"

मुख्यमंत्री के मुताबिक यह सही नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि जितने भी लोग गंदी राजनीति के तहत किसानों को अपशब्द कह रहे हैं, मैं उनसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि किसानों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल न करें।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, "नए कृषि कानून में लिखा है कि कोई भी आदमी कितनी भी जमाखोरी कर सकता है। अभी तक जमाखोरी करना कानून में भी अपराध माना जाता था और शास्त्रों में भी पाप माना जाता था। जिन लोगों के पास पैसे हैं, ऐसे लोग दो तीन साल तक का सामान स्टोर करके रख लेंगे। इससे महंगाई हो जाएगी। इस कानून में लिखा है कि अगर एक साल में महंगाई दोगुनी हो जाएगी, सरकार तभी छापेमारी कर सकती है। ऐसे में तो यदि दाल के रेट बढ़ते हैं और मुख्यमंत्री को मालूम है की दाल की जमाखोरी की जा रही है तो भी मुख्यमंत्री छापेमारी के आदेश नहीं दे सकता।"  (आईएएनएस)

शूद्र को शूद्र कहो तो उसे बुरा लग जाता है
14-Dec-2020 8:11 PM (172)

भोपाल, 14 दिसंबर | मध्यप्रदेश के भोपाल संसदीय क्षेत्र से भाजपा की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि शूद्र को शूद्र कहो तो उसे बुरा लग जाता है, क्योंकि उसमें नासमझी है। प्रज्ञा ठाकुर ने राजधानी के करीब सीहोर में क्षत्रिय समाज के कार्यक्रम में कहा, "हमारी धर्म व्यवस्था में चार वर्ग तय किए गए थे। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ब्राह्मण को ब्राह्मण कहो उसे बुरा नहीं लगता, क्षत्रिय को क्षत्रिय कहो उसे बुरा नहीं लगता, वैश्य को वैश्य कहो तो बुरा नहीं लगता, मगर शूद्र को शूद्र कहो तो उसे बुरा लग जाता है, क्योंकि उसमें नासमझी है, ये समझ नहीं पाते।"

पश्चिम बंगाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले को लेकर प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अब समझ में आ गया है कि ये भारत है। ये पाकिस्तान नहीं है।"

सांसद ने कहा, "ये भारत है और भारत की रक्षा करने के लिए भारत के लोग तैयार हो चुके हैं। हिंदू तैयार हो चुका है। वह मुंहतोड़ जवाब उसको देगा। इतना ही नहीं, बंगाल में भाजपा का शासन आएगा। हिंदुओं का शासन आएगा और बंगाल अखंड भारत का हिस्सा है और रहेगा। वे बंगाल को भारत से अलग करने का प्रयास कर रही थीं। भाजपा डरने वाली नहीं है।"  (आईएएनएस)

मुख्यमंत्री योगी कार से किसी भी शहर का दौरा कर जानेंगे हकीकत
14-Dec-2020 7:41 PM (101)

लखनऊ, 14 दिसम्बर | आईपैड से न केवल सरकारी योजनाओं का फीडबैक लेने और फाइलों के मूवमेंट की जांच करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब नए तेवर में नजर आएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब जनता का मिजाज और शहर की साफ सफाई तथा अन्य सरकारी व्यवस्थाओं का हाल जानने के लिए अचानक ही किसी भी शहर में कार से पहुंच सकते हैं। बीते शनिवार को मुख्यमंत्री ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना मुरादाबाद से गाजियाबाद तक कार से जाकर यह संकेत भी दे दिया है। हुआ यह कि मुरादाबाद से गाजियाबाद जाते हुए मुख्यमंत्री को कई जगहों पर गंदगी दिखी। तो उन्हें कई शहरों में कार्यरत अफसरों के लापरवाह मिजाज का पता भी चला। जिसके चलते सोमवार को मुख्यमंत्री ने लखनऊ में साफ-सफाई का कार्य देखने वाले उच्चाधिकारियों को तलब कर सूबे के कई शहरों की साफ-सफाई की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने का निर्देश दिया। अब यह चर्चा है कि सूबे की चिकित्सा, शिक्षा और साफ-सफाई की हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री राज्य के किसी भी जिले में अचानक की कार से पहुंच सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गत शनिवार को मुरादाबाद गए थे। वहां से उन्हें गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर यात्रा भवन का लोकार्पण करने जाना था। कैलाश मानसरोवर भवन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। मुरादाबाद में कई कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद जब मुख्यमंत्री गाजियाबाद के लिए चले तो पायलट ने कहा कि मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर नहीं उड़ सकता। इस पर जेड प्लस सुरक्षा के घेरे में रहने वाले मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर सुरक्षाधिकारियों ने कैलाश मानसरोवर भवन के लोकार्पण कार्यक्रम को स्थगित करने की सलाह दी।

बताते हैं कि इस सुझाव को मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया और कहा कि मैं गाजियाबाद जाऊंगा और लोकार्पण करुंगा। इसके बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से गाजियाबाद पहुंचे। कार से गाजियाबाद जाते हुए मुख्यमंत्री को मेरठ शहर की सड़क किनारे साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं दिखी। कई जगहों पर उन्हें सड़क किनारे कूड़े के ढेर दिखाई दिए। दूसरी तरफ मुरादाबाद से गाजियाबाद जाते हुए सड़क के किनारे खड़े लोगों ने मुख्यमंत्री के शहर आगमन पर हाथ हिलाकर उनका स्वागत भी किया। ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति जनता के उत्साही मिजाज को देखते हुए अन्य शहरों में भी कार से जाने का फैसला लिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के ऐसे दौरों से अधिकारी लापरवाही बरतने की हिम्मत नहीं करेंगे और शहरों की साफ-सफाई से लेकर चिकित्सा व्यवस्था में सुधार होगा।

ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार किसी शहर में कार से अचानक पहुंचे हैं। इसके पहले भी वह कई जिलों में अस्पताल और मंडी स्थलों में धान और गेंहू खरीद की हकीकत जानने पहुंच चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान जब बड़े-बड़े नेता घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे, उस दौरान मुख्यमंत्री नोएडा और गाजियाबाद पहुंचे थे। तब उन्होंने अन्य राज्यों से आ रहे श्रमिकों को लेकर लापरवाही बरतने के प्रकरण में नोएडा के जिलाधिकारी को हटाने का आदेश दिया था।

पूर्वाचल में दौरे के दौरान मुख्यमंत्री कार से बस्ती गए थे। बीते साढ़े तीन सालों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे के हर जिले का कम से कम दो बार दौरा कर चुके हैं। अब वह सीधे जनता से संवाद करने तथा जनता का मिजाज जानने और सरकारी कामकाज की हकीकत जानने के लिए अचानक किसी शहर में कार से निरीक्षण करने पहुंचेंगे। ऐसी चर्चा होने लगी है।  (आईएएनएस)

राघव चड्ढा समेत 9 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, अमित शाह के घर प्रदर्शन के लिए जा रहे थे आप नेता
13-Dec-2020 9:11 PM (110)

नई दिल्ली, 13 दिसंबर| दिल्ली पुलिस ने राघव चड्ढा समेत 9 लोगों को हिरासत में लिया है. बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार में मंत्री राघव, गृह मंत्री अमित शाह और एलजी अनिल बैजल के घर पर प्रदर्शन करने की तैयारी में थे. लेकिन उससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा के अलावा आदमी पार्टी के विधायक ऋतु राज को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है. राघव चड्डा का जहां उनके घर पर से हिरासत में लिया गया है, वहीं ऋतु राज को थाने ले जाया गया है. साथ ही राघव चड्ढा के घर के बाहर पुलिस की तैनाती कर दी गई है.

इसी बीच खबर है कि आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट कर इसके बारे में जानकारी दी है. उन्होंने आरोप लगाया है कि विधायक ऋतु राज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आज उन्हें एलजी साहब से मिलने जाना था. साथ ही उन्होंने कहा कि अमित शाह किसी को आवाज उठने नहीं दे रहे हैं. वहीं, राघव चड्ढा ने कहा कि BJP शासित MCD ने दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा ₹2500 करोड़ का घोटाला किया. हमने गृह मंत्री अमित शाह जी से मिलने का समय मांगा तो उन्होंने मुझे मेरे आवास से ही गिरफ्तार करवा लिया. साथ ही चड्डा ने हमला बोलते हुए कहा कि अमित शाह जी, आप अपनी पुलिस के दम पर अपनी पार्टी का भ्रष्टाचार क्यों दबाना चाहते हैं?

डीसीपी को राघव चड्ढा ने चिट्ठी लिखी थी

जानकारी के मुताबिक, उपराज्यपाल और अमित शाह के आवास पर प्रदर्शन के लिए आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली पुलिस को पत्र भेजा था. आप विधायक आतिशी ने उत्तरी दिल्ली जिले के डीसीपी को पत्र लिखकर उपराज्यपाल आवास पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी जबकि गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के डीसीपी को राघव चड्ढा ने चिट्ठी लिखी थी.


पहले ही पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया

दरअसल, बीते दिनों बीजेपी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर दिल्ली नगर निगम के 13 हजार करोड़ रूपये के फंड को रोके जाने के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था. बीजेपी नेताओं के साथ निगम के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन में हिसा लिया था. बीजेपी का कहना था कि एमसीडी के 13 हजार करोड़ का बकाया अरविंद केजरीवाल सरकार नहीं दे रही है. फंड नहीं मिलने की वजह से एमसीडी के कर्मचारियों का वेतन रुका हुआ है. अब ऐसे में जानकारोंं का कहना है कि बीजेपी को जवाब देने के लिए आप ने अमित शाह के घर के बाहर विरोध करने की योजना बनाई थी, लेकिन पहले ही पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया.  (hindi.news18.com)

किसान अंदोलन का 'दोहन' कर रहे केजरीवाल
13-Dec-2020 9:00 PM (80)

चंडीगढ़, 13 दिसंबर | पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर किसानों के चल रहे आंदोलन का राजनीतिक दोहन करने का आरोप लगाया है और कहा है कि वो अपनी पार्टी के चुनावी एजेंडे को बढ़ाने के लिए 'झूठ और झूठे प्रचार' का सहारा ले रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री ने केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा, "दिल्ली में केजरीवाल सरकार के ठीक उलट, जो कॉरपोरेट घरानों के टुकड़ों पर पनप रही है, पंजाब सरकार ने न तो अडानी पावर के साथ कोई समझौता किया है और न ही राज्य में बिजली खरीद के लिए किसी के साथ बोली लगाई है।"

अमरिंदर सिंह ने कहा, यह वास्तव में केजरीवाल सरकार थी जो बेशर्मी से 23 नवंबर को काले कृषि कानूनों को अधिसूचित कर रही थी, ऐसे समय में जब किसान कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली तक मार्च करने की तैयारी कर रहे थे।

उन्होंने कहा, "और अब वे यह घोषणा करके नाटक कर रहे हैं कि वे सोमवार को किसानों की भूख हड़ताल के समर्थन में उपवास पर रहेंगे।"

उन्होंने कहा, "क्या आपको कोई शर्म नहीं है? ऐसे समय में जब हमारे किसान आपके शहर के बाहर की सड़कों पर ठंड का सामना कर रहे हैं, और अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, आप ये सोच रहे हैं कि मौके का कैसे ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जाए?"

अमरिंदर सिंह ने कहा, "प्रदर्शनकारी किसानों की मदद के लिए कुछ भी रचनात्मक करने के बजाय, जो पिछले 17 दिनों से दिल्ली शहर के बाहर बैठे हैं, आप और आपकी पार्टी राजनीति करने में व्यस्त हैं।"

भगवंत मान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "पंजाब में बिजली खरीद पर बिना तथ्य जाने कुछ भी बोल देते हैं। आखिरकार वो एक कॉमेडियन ही तो हैं, जिन्हें कोई गंभीरता से नहीं ल्ेाता।"

यह बताते हुए कि पंजाब सालों से बुवाई के मौसम में किसानों के लिए अतिरिक्त बिजली खरीदता रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी को न तो यह पता है कि बुवाई कैसे होती है या किसानों की जरूरतें क्या हैं।

उन्होंने कहा कि वे अपने निहित राजनीतिक हितों के लिए किसानों की दुर्दशा का फायदा उठा रहे हैं।

अमरिंदर सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों को लागू करने से लेकर दिल्ली के एक कोने में किसानों को भेज देने की कोशिश करने तक, केजरीवाल ने बार-बार साबित किया है कि वह किसानों के हमदर्द नहीं हैं।

उन्होंने दिल्ली के सीएम को चेतावनी दी कि पंजाब सरकार और किसानों के बीच दरार पैदा करने का उनका ये नया प्रयास सफल नहीं होगा।

अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार ने आंदोलन के दौरान पिछले तीन महीनों में न केवल किसानों का समर्थन किया है, बल्कि विधानसभा में संशोधन भी पारित किया है ताकि कृषि कानूनों को रद्द किया जा सके। उन्होंने केजरीवाल को चुनौती दी कि वे किसी भी कल्याणकारी उपाय का एक भी उदाहरण दें जो उन्होंने किसानों के लिए किया हो।  (आईएएनएस)

हरियाणा के बाद उत्तराखंड के किसान कृषि मंत्री से मिले, कृषि कानूनों का किया समर्थन
13-Dec-2020 8:58 PM (141)

नई दिल्ली, 13 दिसंबर | तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच हरियाणा के बाद अब उत्तराखंड के दर्जनों किसानों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर नए कानूनों का समर्थन किया है। उत्तराखंड के किसानों का कहना है कि सितंबर में बने तीनों कानून कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे। किसानों ने कृषि मंत्री तोमर के साथ बैठक भी की। तोमर ने बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से कहा, "उत्तराखंड से आए किसान भाई मुझसे मिले और उन्होंने कृषि सुधार बिलों को समझा और राय दी। भारत सरकार की ओर से सभी किसान भाइयों का आभार व्यक्त करता हूं। किसानों के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं।"

उत्तराखंड के किसान नेताओं ने कृषि मंत्री को बताया कि तीनों कानून सरकार ने किसानों के हित में बनाए हैं। सुधार भले हो सकते हैं, लेकिन कानूनों को वापस लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उत्तराखंड के किसानों ने सरकार से इस मसले पर दबाव में न आने की अपील की। इससे पूर्व हरियाणा के प्रगतिशील किसानों ने भी कृषि मंत्री से भेंटकर तीनों कानूनों का समर्थन किया था।

सितंबर में बने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के किसानों की ओर से आंदोलन चल रहा है। लगातार 18 दिनों से दिल्ली सीमा का किसानों ने घेराव किया है। सिंघू बॉर्डर पर कई किसान संगठनों से जुड़े किसान डटे हैं। उधर, यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर भी पश्चिमी यूपी के किसान आंदोलन चला रहे हैं। सरकार के साथ अब तक पांच बार हुई वार्ता में कोई हल नहीं निकल सका है। किसान संगठनों ने 14 दिसंबर को भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।  (आईएएनएस)

किसानों के समर्थन में एक दिन का उपवास करेंगे मुख्यमंत्री केजरीवाल
13-Dec-2020 8:48 PM (126)

नई दिल्ली, 13 दिसंबर | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को किसानों के समर्थन में एक दिन का उपवास करेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि किसानों को देशद्रोही बताकर उनके आंदोलन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी अपील की गई है कि वे भी सोमवार को एक दिन का उपवास रखें। रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "पिछले कुछ दिनों से भाजपा के मंत्री और नेता, किसानों को देशद्रोही बताकर उनके आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। देश की रक्षा करने वाले हजारों पूर्व सैनिक भी किसानों के साथ बॉर्डर पर बैठे हैं, खिलाड़ी, सेलिब्रिटी और डॉक्टर आदि भी समर्थन में हैं, भाजपा के मंत्री-नेता बताएं कि क्या ये सारे लोग देशद्रोही हैं।"

उन्होंने कहा, "अन्ना हजारे के साथ रामलीला मैदान में हुए हमारे आंदोलन के दौरान कांग्रेस की केंद्र सरकार ने भी हमें देश विरोधी बता कर बदनाम किया था। आज वही काम भाजपा सरकार कर रही है। अभी तक देश में अनाज की जमाखोरी अपराध था, लेकिन इस बिल के बाद जमाखोरी अपराध नहीं होगा, कोई कितना भी अनाज की जमाखोरी कर सकता है। केंद्र सरकार को अपना अहंकार छोड़ देना चाहिए। अगर जनता इन बिलों के खिलाफ है, तो इन्हें वापस लिया जाए और एमएसपी पर फसलें खरीदने की गारंटी देने वाला बिल बनाया जाए।"

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसानों ने एक दिन के उपवास का ऐलान किया है। केजरीवाल ने पूरे देश की जनता से अपील की है कि सब लोग एक दिन का उपवास रखें।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं भी उनके साथ एक दिन का उपवास रखूंगा। मैं सभी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं, समर्थकों से अपील करता हूं कि वो भी किसानों की इन मांगों के समर्थन में एक दिन का उपवास रखें।"

सीएम केजरीवाल ने कहा, "मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार के कुछ मंत्री और भाजपा के लोग बार-बार कह रहे हैं कि यहां पर देश विरोधी लोग बैठे हुए हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि सेवानिवृत्त हो चुके हजारों पूर्व सैनिक सीमा पर किसानों के साथ बैठे हुए हैं। जिन लोगों ने एक समय देश की रक्षा करने के लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी, क्या ये सारे देश विरोधी हैं?"

मुख्यमंत्री ने कहा, "कुछ लोग यह कह रहे हैं कि इसमें तो बस पंजाब-हरियाणा के कुछ चंद किसान शामिल हैं, बाकी जनता इसमें शामिल नहीं है। यह उनकी गलतफहमी है। मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों ने मुझसे कहा कि यह बिल बड़े खतरनाक हैं। मैंने पूछा क्यों? तो उन्होंने कहा कि इन बिलों में यह लिखा है कि कोई भी आदमी अब कितने भी अनाज की जमाखोरी कर सकता है।"  (आईएएनएस)

शशि थरूर जंतर मंतर पर पंजाब के सांसदों के प्रदर्शन में शामिल हुए
13-Dec-2020 7:22 PM (124)

नई दिल्ली, 13 दिसंबर | कांग्रेस सांसद शशि थरूर रविवार को जंतर-मंतर पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने और संसद के शीतकालीन सत्र को आयोजित करने की मांग को लेकर अपने पार्टी के सहयोगियों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। शशि थरूर ने ट्वीट किया, "मेरे सांसद सहयोगियों जसबीर गिल और गुरजीत एस औजला के साथ उनके किसान प्रदर्शन के समर्थन में और संसद के शीतकालीन सत्र के मांग को लेकर उनके धरने के साथ।"

थरूर ने कहा, "सांसद कह रहे हैं कि केंद्र किसान यूनियन के साथ मामला सुलझाए और संसद का शीतकालीन सत्र बुलाए।"

मध्य दिल्ली के जंतर मंतर पर पंजाब कांग्रेस के सांसदों के विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कई विधायक और नेता शामिल हुए।

आईएएनएस से बात करते हुए, कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल डिम्पा ने कहा, "हम यहां तब तक बैठेंगे जब तक किसान नए कृषि कानूनों का विरोध करेंगे। सरकार को नए कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए और उनकी मांगों को सुनना चाहिए और मामले को सुलझाना चाहिए।"

पंजाब कांग्रेस के सांसद 7 दिसंबर से जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं।

गुरजीत सिंह औजला ने कहा, "पंजाब कांग्रेस पहले दिन से किसानों के साथ है और किसानों को समर्थन देना हमारी जिम्मेदारी है .. जब तक सरकार अपने फैसले वापस नहीं लेती है, तब तक विरोध जारी रहेगा।"

सांसद संसद के शीतकालीन सत्र की भी मांग कर रहे हैं, उन्होंने दावा किया कि सरकार जानबूझकर देरी करने की कोशिश कर रही है।

सितंबर में लागू किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के बारे में केंद्र सरकार से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलने के बाद, शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने प्रदर्शनों को अखिल भारतीय स्तर तक विस्तारित करने की अपनी योजना की घोषणा की है।  (आईएएनएस)

बीजेडी ओडिशा में सुशासन देने में विफल
12-Dec-2020 10:11 PM (123)

भुवनेश्वर, 12 दिसंबर | ओडिशा भाजपा प्रभारी दग्गुबती पुरंदेश्वरी ने शनिवार को सुशासन देने में विफल रहने के लिए बीजू जनता दल (बीजद) सरकार पर निशाना साधा। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ओडिशा में कोयला घोटाला, वन घोटाला, चिट फंड घोटाला, भूमि घोटाला और कालिया योजना में अनियमितता जैसे कई घोटाले हुए।

पुरंदेश्वरी ने कहा, "नयागढ़ जिले में एक पांच साल की बच्ची की हत्या कर दी गई। इस संबंध में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।"

"मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि ओडिशा के 4.5 करोड़ लोग उनका परिवार हैं और वह उनकी रक्षा करेंगे। पांच साल की लड़की उन लोगों में से नहीं थी क्या ?"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी राज्य में सरकार चला रहे हैं।

"ओडिशा के लोगों ने नवीन पटनायक पर विश्वास जताते हुए बीजद को अपना जनादेश दिया। इसका मतलब है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को राज्य में सुशासन करना चाहिए।"

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ बीजद ने कहा कि बालासोर और तीर्थोल उपचुनावों में हार के बाद पुरंदेश्वरी अपने पार्टी कैडर और नेताओं को प्रेरित करने के लिए आई हैं।  (आईएएनएस)

राजस्थान में घनश्याम तिवाड़ी की भाजपा में 'घर वापसी'
12-Dec-2020 9:09 PM (146)

जयपुर, 12 दिसंबर | राजस्थान में वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक घनश्याम तिवाड़ी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में 'घर वापसी' हुई है। उन्होंने शनिवार को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी का दामन थाम लिया। तिवाड़ी ने 2018 में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ मतभेदों के चलते भाजपा का दामन छोड़ दिया था और 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

तिवाड़ी भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष सतीश पुनिया की उपस्थिति में पार्टी में शामिल हुए।

तिवारी पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे के कड़े आलोचक रहे हैं। उन्होंने राजे के साथ अपने मतभेदों के कारण ही 2018 में भाजपा छोड़ दी थी और अपनी पार्टी भारत वाहिनी बनाई और उसके बाद कांग्रेस से हाथ मिला लिया था।

तिवाड़ी हालांकि इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में सांगानेर निर्वाचन क्षेत्र से लड़े, मगर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे।

मार्च 2019 में तिवाड़ी पार्टी के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हो गए, जो एक रोड शो में भाग लेने के लिए जयपुर आए थे।

भाजपा के पूर्व नेता और कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र गोयल और जनार्दन गहलोत भी तिवाड़ी के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे।

भाजपा के करीबी सूत्रों ने खुलासा किया कि भगवा पार्टी राजस्थान में उन नेताओं को मनाने में लगी हुई है, जो वसुंधरा राजे और उनकी कार्यशैली से नाराज हैं।

दिवंगत दिग्गज नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह भी इसी तरह का कदम उठा सकते हैं। उन्होंने भी वसुंधरा के साथ अपने मतभेदों के कारण भाजपा छोड़ दी थी।

मानवेंद्र सिंह ने भाजपा छोड़ने के बाद झालरापाटन निर्वाचन क्षेत्र से वसुंधरा के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ा था।

अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह जल्द ही भाजपा में वापसी कर सकते हैं।  (आईएएनएस)

दिल्ली के 55 लाख लोगों को राशन कार्ड दे आप सरकार
12-Dec-2020 9:03 PM (89)

नई दिल्ली, 12 दिसंबर | दिल्ली में शीला दीक्षित की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हारून यूसुफ ने अरविंद केजरीवाल सरकार को चेतावनी दी कि अगर वह करीब 55 लाख लोगों को राशन कार्ड नहीं देती है या उन्हें कोविड-19 महामारी के संकट के समय पर मुफ्त राशन प्रदान नहीं करती है तो उनकी पार्टी इसके खिलाफ अभियान शुरू करेगी। यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूसुफ ने कहा कि पिछले छह वर्षो से 11.49 लाख गरीब परिवार अपने राशन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर एक परिवार में औसतन पांच सदस्य भी रहते हैं तो केजरीवाल सरकार 55 लाख लोगों का निवाला छीन रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन परिवारों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि गरीब लोग अपने जीवन यापन के लिए राशन की दुकानों के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले अनाज, दालों और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर पूरी तरह से निर्भर हैं और राशन कार्ड के अभाव में ऐसे परिवारों के बच्चे तेजी से कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने केजरीवाल सरकार की ओर से विज्ञापनों पर किए जाने वाले खर्च पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आप सरकार के पास गरीबों की कीमत पर प्रचार के लिए 511.78 करोड़ रुपये खर्च करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उनमें से अधिकांश नौकरियों से बाहर हैं और महामारी के कारण अपना काम-धंधा को चलाने में असमर्थ हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार ने बीते सात सालों में 461 राशन की दुकानों को बंद कर दिया है। जबकि, शराब के ठेकों की संख्या में 450 का इजाफा हुआ है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी बंद (लॉकडाउन) के दौरान शराब की दुकानों के जल्द खुलने से राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े।

यूसुफ ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान, दिल्ली सरकार के 'जनता संवाद पोर्टल' ने उल्लेख किया है कि सरकार ने केवल लगभग 10 लाख लोगों को मुफ्त राशन की आपूर्ति करने के लिए एक योजना शुरू की है, जबकि 54 लाख लोगों ने मुफ्त राशन के लिए आवेदन किया हुआ है। इससे साबित होता है कि सरकार ने 80 प्रतिशत गैर-राशन कार्ड धारकों को नियमित राशन देने से इनकार कर दिया है।  (आईएएनएस)

पांच साल में 4 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार
12-Dec-2020 8:18 PM (106)

लखनऊ , 12 दिसम्बर | उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि पांच साल में चार लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। उपमुख्यमंत्री ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा लाई गई नई इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2020 के तहत अगले 5 साल में 40,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। इन पांच साल में चार लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। राज्य में तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सैमसंग जैसी और भी कंपनियां यूपी में निवेश करें। इसके लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। शर्मा ने कहा कि इसके अलावा ली-आयन सेल के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को राज्य सरकार ने सैद्घान्तिक मंजूरी दे दी है।

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा पिछले तीन साल में किए कामों का ब्यौरा देते हुए उप मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन साल के दौरान इस इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। जिससे प्रदेश में तीन लाख से अधिक रोजगार के अवसर युवाओं को मिले।

अपर मुख्य सचिव, आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने बताया कि हर राजस्व मंडल में आईटी पार्क बनाया जाएगा। जिसमें 200 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। जिससे 15,000 रोजगार की संभावना पैदा होगी। मौजूदा समय में मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर में नए आईटी पार्क पर काम किया जा रहा है। इन आईटी पार्क को अगले साल तक शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा लखनऊ में 40 एकड़ जमीन पर एक अत्याधुनिक आईटी कॉम्प्लेक्स, एक आईटी पार्क और देश का सबसे बड़ा इन्क्यूबेटर सेंटर बनाए जाने की योजना है।

हर जिले में बनेंगे इन्क्यूबेटर स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार हर जिले में इन्क्यूबेटर बनाएगी। राज्य सरकार की योजना प्रदेश में कुल 100 इन्क्यूबेटर खोलने की है। बड़े जिलों में एक से अधिक इन्क्यूबेटर बनाए जाएंगे। ताकि स्टार्टअप्स को मदद मिल सके। इन स्टार्टअप्स के जरिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर युवाओं को स्वरोजगार देने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार ने इन इन्क्यूबेटर्स के जरिए 10,000 स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की योजना है।

इससे 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और एक लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। मौजूदा समय में प्रदेश में 3300 से अधिक स्टार्टअप इकाईयां काम कर रही हैं। मौजूदा समय में प्रदेश में 18 इन्क्यूबेटर्स काम कर रहे हैं। इन्क्यूबेटर्स और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एक अनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है। स्टार्टअप की वित्तीय मदद के लिए राज्य सरकार ने 1000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड बनाया है। इन्क्यूबेटर के लिए बांदा, वाराणसी, नोएडा, लखनऊ , मथुरा और गाजियाबाद जिले को मंजूरी दी गयी है।

उप मुख्यमंत्री ़दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में दो जनसेवा केंद्र खोले जाएंगे। वहीं शहरी क्षेत्र में हर 10,000 की आबादी पर दो जन सेवा केंद्र खोले जाएंगे। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से लगभग 4़5 लाख ग्रामीण युवा उद्यमियों को स्वरोजगार मिलेगा।

डॉ दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार की 27 विभागों की 130 डीबीटी योजनाओं को अनबोर्ड किया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 56,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में उपलब्ध कराई गई है।  (आईएएनएस)

अपनी विचारधारा से समझौता न करें
12-Dec-2020 7:53 PM (85)

मुंबई, 12 दिसंबर | शरद पवार शनिवार को 80 साल के हो गए, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी विचारधारा या दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए अथक परिश्रम करना आवश्यक है। पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अनुभवी राजनीतिज्ञ को उनके जन्मदिन पर बधाई दी। पवार ने नई पीढ़ी में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब अम्बेडकर की शिक्षाओं और दर्शन को शामिल करने का आह्वान किया।

उन्होने कहा कि, "मुझे युवा पीढ़ी को पार्टी में आगे आते देखकर खुशी हो रही है। इससे मुझे नई ऊर्जा मिलती है। किसी को भी विचारधारा से समझौता नहीं करना चाहिए। इन महान नेताओं को याद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके रास्ते पर चलना भी जरूरी है।"

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्य करते समय सतर्क और जागरूक बने रहने की आवश्यकता है, और यह सुनिश्चित करें कि परिवार को नजरअंदाज न किया जाए।

पवार ने कहा, "जब आप समाज के अंतिम व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखते हैं, तो आपको रास्ते की स्पष्टता और दिशा के बारे में बहुत कुछ पता चलता है।"

राकांपा प्रमुख ने कहा कि वह 'वास्तव में अभिभूत हैं' और अपने जन्मदिन पर पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की भावनाओं को स्वीकार किया।

एनसीपी और उसके फ्रंटल संगठनों ने इस अवसर पर एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया।

इनमें उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, राकांपा महासचिव प्रफुल्ल पटेल, राज्य राकांपा अध्यक्ष और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल, राकांपा मुंबई के अध्यक्ष और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुशरिफ शामिल थे।  (आईएएनएस)