सेहत / फिटनेस

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • पर्याप्त आहार मिलने के बाद भी भारत के बच्चों में आयरन और जिंक की कमी क्यों बनी हुई है?
    अगर दुनिया के अनाज निर्यातक देशों की बात करें तो उनमें भारत का प्रमुख स्थान है। फल और चावल के उत्पादक देशों में भारत दूसरे नंबर पर है। यानी कुल मिलाकर देखें तो हिंदुस्तान खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है। लेकिन, इसके बावजूद जब यह पता लगे कि यहां के बच्चों में आयरन और जिंक की लगातार कमी बनी हुई है तो कोई भी हैरत में पड़ सकता है। इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन पोषक तत्वों की यह कमी केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में ही नहीं बल्कि उन बच्चों में भी पाई गई है जिन्हें पोषण के लिए पर्याप्त आहार मिलता है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल में बेंगलुरु के 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर रिसर्च' के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है। शोध से पता लगा है कि इंसान के मुख्य आहार के प्रमुख घटक अनाज, कंद और फलियों में फेटाटेस नामक पदार्थ की मात्रा निश्चित सीमा से अधिक हो गई है।
    शोधकर्ताओं के मुताबिक फेटाटेस पोषण विरोधी होता है जो खाने में मौजूद आयरन और जिंक को खींच लेता है जिससे ये जरूरी पोषक तत्व शरीर में नहीं पहुंच पाते। इन लोगों का कहना है कि फेटाटेस को आहार से हटाया भी नहीं जा सकता क्योंकि यह कैंसर और उम्र के साथ मानव शरीर में होने वाले परिवर्तनों से लडऩे में बड़ा मददगार होता है।
    खाने में आयरन और जिंक की पर्याप्त मात्रा बनी रहे इसके लिए क्या करना चाहिए?
    शोधकर्ताओं ने अपने शोध में इस परेशानी से निजात दिलाने के तरीके भी सुझाए हैं। इनके मुताबिक लोगों को खाना पकाने के तौरतरीकों में बदलाव करने की जरूरत है। ये लोग दक्षिण भारत का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र में लोग खाना पकाने के दौरान उबालने, भिगोने और अंकुरण की प्रक्रिया का अनुसरण करते हैं। ऐसा करने से खाने में फेटाटेस की मात्रा काफी कम हो जाती है और उसमें पर्याप्त जिंक और आयरन बना रहता है।
    शोधकर्ताओं ने लोगों को खाना खाने के बाद अमरुद या आंवला का एक टुकड़ा या फिर आयरन की एक गोली लेने की सलाह सलाह दी है। इनके मुताबिक ऐसा करने से शरीर में आयरन और जिंक की मात्रा दो गुनी तक हो जाती है।
    इस शोध के प्रमुख डॉक्टर एएन गणेशमूर्ति कहते हैं, भारतीय खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए इनमें फेटाटेस की मात्रा को कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए जिसके लिए शोध की जरूरत है। अब भारतीय फसलों की पैदावार बढ़ाने से ज्यादा इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि कैसे फसलों को ज्यादा पौष्टिक बनाया जाए। गणेशमूर्ति के मुताबिक उन्होंने ऐसी फसलों पर काम करना शुरू कर दिया है जिनसे ज्यादा मात्रा में आयरन और जिंक शरीर को मिल सके।
    किन-किन तत्वों से उचित पोषण मिलता है?
    शोधकर्ता आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी से उभरने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते हैं जिनमें सबसे ज्यादा जिंक और आयरन पाया जाता है। इनके मुताबिक अनाज, दालें, तिलहन और चीनी इन पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत हैं। केवल इनमें ही 82.8 फीसदी आयरन और 78.6 फीसदी जिंक पाया जाता है। इसके अलावा दूध, दूध के उत्पाद, मांस, चिकन और अंडे से 3.9 फीसदी तक आयरन और 11.7 फीसदी तक जिंक मिलता है।
    शोधकर्ताओं के अनुसार बागवानी क्षेत्र भी आयरन और जिंक का प्रमुख स्रोत है जिसमें फल, सब्जियां और ड्राई-फ्रूट्स यानी सूखे मेवे शामिल हैं। इनके मुताबिक इनमें 12.9 फीसदी आयरन और 9.1 फीसदी जिंक मौजूद होता है। पोषक तत्वों के मामले में मत्स्य पालन क्षेत्र का भी अहम योगदान है, मछली में 0.42 फीसदी आयरन और 0.62 फीसदी जिंक पाया जाता है। (इंडिया साइंस वायर)

     

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 21 नवम्बर। औरतों को ये सलाह दी जा रही है कि वो गर्भावस्था की आखिरी और तीसरी तिमाही में करवट लेकर सोएं ताकि जन्म के समय होने वाली बच्चों की मृत्यु को रोका जा सके।
    1000 से ज्यादा औरतों पर किये गए एक अध्ययन से पता चला है कि जो गर्भवती महिलाएं आखिरी तिमाही में कमर के बल सोती हैं, उनका बच्चा मृत पैदा होने की आशंका अधिक होती है।
    इस अध्ययन से पता चला कि अध्ययन में शामिल बच्चों में से 291 बच्चे जन्म के समय मृत पैदा हुए थे और 735 औरतों के बच्चे स्वस्थ पैदा हुए। शोधकर्ताओं के अनुसार जब गर्भवती महिलाएं सोने लगें तब उनका करवट लेकर सोना जरूरी है। अगर जागते हुए वो खुद को कमर के बल पाएं तो कोई बात नहीं।
    ब्रिटेन में हर साल 225 बच्चे मृत पैदा होते हैं। इस अध्ययन के शोधकर्ता का अनुमान है कि करवट पर सोने की वजह से इनमें से 130 बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है। माइनेस स्टडी एक बड़े स्तर का शोध है जिसे ब्रिटेन के स्त्री एवं प्रसूति संबंधित में छापा गया है। ये शोध न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में इस विषय पर हुए अन्य अध्ययनों के नतीजों की पुष्टि भी करता है।
    इस रिसर्च को प्रो.एलेक्जेंडर हीजल के नेतृत्व में पूरा किया गया है जो टॉमीज स्टिलबर्थ रिसर्च सेंटर के निदेशक हैं। उनकी ये सलाह है कि आखिरी तिमाही में महिलाओं को करवट लेकर सोना चाहिए, चाहे वो दिन के किसी भी वक्त सोएं।
    वो कहते हैं कि कि मैं ऐसा नहीं चाहता कि महिलाएं जब जागें और पाएं कि वो कमर के बल सो रही थीं तो घबरा कर सोचें कि मैंने अपने बच्चे को कोई नुकसान पहुंचाया।
    स्टडी के लिए हमने इसमें शामिल महिलाओं से मुख्य तौर पर एक सवाल पूछा था कि वो जब सोने लगीं तो किस पोजिशन में सोई थीं।
    आप किस पोजीशन में उठते हैं, उसके बारे में आप कुछ नहीं कर सकते लेकिन आप किस पोजिशन में सोए थे, ये आप तय कर सकते हैं।
    शोधकर्ता दावे से नहीं कह सकते कि बच्चे के मरे हुए पैदा होने की आशंका क्यों ज्यादा होती है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जब कोई गर्भवती महिला कमर के बल सोती है तो बच्चे और गर्भाशय के कारण खून की नलियों पर दबाव बनता है जिससे बच्चे को खून और ऑक्सीजन ठीक से नहीं मिल पाता।
    इसी जर्नल से जुड़े एडवर्ड मोरिस ने इस रिसर्च का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण अध्ययन है जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि गर्भावस्था में सोने की अवस्था मरे हुए बच्चे पैदा होने की एक वजह हो सकती है।
    कैसे सोएं -
    कमर के पीछे तकिया रखें ताकि करवट लेकर सोने में मदद मिले, रात को नींद खुले तो चेक करें कि आप किस पोजीशन में सो रही हैं और फिर से करवट लेकर सोएं, दिन में भी करवट पर ही सोएं, रात को अगर आपको लगे कि आप कमर के बल सो रही थीं तो घबराएं नहीं, आप दाएं या बाएं किसी भी करवट सो सकती हैं, हलचल बंद होती तो ख्याल आता कि बच्चा ठीक तो है। 
    2016 में मिशेल कोटल का बच्चा 37 हफ्ते की गर्भावस्था के बाद मरा हुआ पैदा हुआ था जबकि पूरी गर्भावस्था में ऐसा कोई लक्षण नहीं था जिससे लगे कि कुछ गलत हो सकता है।
    वो डियर ओरला के नाम से एक ब्लॉग लिखती हैं और उन महिलाओं से बात करती हैं जो इसी अनुभव से गुजरी हैं। मिशेल कहती हैं कि इस तरह की प्रैक्टिक्ल सलाह मांओं को काफी मदद कर सकती है।
    वो कहती हैं कि मुझे लगता है कि ये जानकारी लोगों को सक्षम महसूस करने में मदद करेगी क्योंकि इससे लोगों में स्वस्थ गर्भावस्था की उम्मीद बनी रहेगी। अब जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो महसूस करती हूं कि दूसरी बार प्रेग्नेंन्सी में मैं बहुत परेशान थी क्योंकि वो ऐसा था जैसे अपने बुरे सपने को रोज जीना।
    मिशेल कोटल 36 साल की हैं और लंदन में रहती हैं, वो डियर ओरला के नाम से एक ब्लॉग लिखती हैं, मिशेल कोटल के अनुसार कि हर बार जैसे ही कोई हलचल बंद होती तो मन में ख्याल आता कि बच्चा जिंदा भी है या नहीं।
    रात का वक्त सबसे ज्यादा बुरा होता क्योंकि बहुत से लोग कहते हैं कि उनका बच्चा शायद उनकी नींद में मर गया। ये वाकई डरावना है क्योंकि आप को सोना तो होता ही है।
    तो मेरे ख्याल से अगर आपके दिमाग में कुछ बातें साफ हों तो ये आपको महसूस कराएगा कि सब कंट्रोल में है और ये महिलाओं के लिए जरूरी है।(बीबीसी)

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • कहीं आप भी तो उन लोगों में से नहीं जो खिचड़ी के नाम पर ही नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं? ज्यादातर लोग खिचड़ी को बीमारों का खाना मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं खिचड़ी एक ऐसी चीज जिसे खाने के सिर्फ और सिर्फ फायदे ही हैं.

    अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं तो इससे बेहतर आपके लिए कुछ हो ही नहीं सकता है. एक ओर जहां खिचड़ी बनाना बहुत आसान है वहीं इसमें वो सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है.

    चावल और कुछ दालों को मिलाकर बनने वाली खिचड़ी एक सुपाच्य भोजन है. यूं तो खिचड़ी में मसालों का इस्तेमाल न के बराबर ही किया जाता है लेकिन आप चाहें तो स्वाद के लिए चुटकीभर मसाले का प्रयोग कर सकते हैं. खिचड़ी में दही मिलाकर खाने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है.

    खिचड़ी खाने के तीन बेहतरीन फायदे:

    १. पोषक तत्वों से भरपूर 
    आपकी मां या फिर आपकी दादी ने भी आपको खिचड़ी के फायदे बताएं होंगे. खिचड़ी कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, कैल्शियम, फाइबर्स, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस के गुणों से भरपूर होती है. आप चाहें तो इसमें विभिन्न प्रकार की सब्ज‍ियां मिलाकर इसके पोषक गुणों को और बढ़ा सकते हैं.

    २. पचने में आसान 
    खिचड़ी में तेज मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और न ही इसमें बहुत अधिक तेल, घी का इस्तेमाल होता है. ऐसे में ये आसानी से पच जाती है और यही कारण है कि बीमारी में लोग खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है तो खिचड़ी आपके लिए सबसे फायदेमंद है.

    ३. शरीर को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगार 
    खिचड़ी के नियमित सेवन से वात, पित्त और कफ का दोष दूर हो जाता है. खिचड़ी शरीर को ऊर्जा तो देने का काम करती ही है, साथ ही ये रोग प्रतिरक्षा तंत्र को भी बूस्ट करने का काम करती है. (आजतक)।

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह कहा गया है कि अखरोट खाने से अस्थमा होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. यह अध्ययन 'एलर्जी एंड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

    शोधकर्ताओं के अनुसार अखरोट में भरपूर मात्रा में विटामिन ई पाया जाता है, जो अस्थमा के अटैक से बचाने में काफी कारगार साबित होता है.

    उन्होंने यह भी बताया है कि अखरोट, मूंगफली, सोयाबीन, कोर्न, तिल आदि में गामा-टोकोफ़ेरॉल नाम का विटामिन ई पाया जाता है. जो शरीर को अस्थमा से बचाने में मदद करता है. यह अध्ययन 'यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन' के शोधक्ताओं ने किया है.

    अध्ययन के सीनियर लेखक प्रोफेसर मिशेल हर्नानडेज ने बताया है कि जो लोग अपनी डाइट में विटामिन ई का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उनमें अस्थमा और एलर्जी से होने वाली बीमारियों का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है.

    साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि विटामिन ई उन्ही कोशिकाओं पर सबसे ज्यादा असरदार होता है, जो अस्थमा के इलाज के लिए महत्वपूर्ण होती हैं.

    ऐसे हुआ अध्ययन:

    अध्ययन के दौरान लोगों को २ टीम में बांटा गया. जिसमें २ हफ्तों तक एक टीम को गामा-टोकोफ़ेरॉल नाम का विटामिन ई दिया गया, जबकि दूसरी टीम को प्लेसबो दिया गया. नतीजों में विटामिन ई लेने वाले लोगों में इओसिनोफिलिक बीमारी के लक्षण बहुत कम देखे गए हैं. साथ ही विटामिन ई के सेवन से शरीर में म्यूसिन नाम के प्रोटीन का स्तर भी काफी कम पाया गया है. बता दें कि म्यूसिन शरीर में बलगम बनाने का काम करता है, जो अस्थमा के मरीजों के लिए काफी नुकसानदायक होता है.(आजतक)।

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • एक नए शोध की मानें तो हफ्ते में एक दिन सेक्स करने से महिलाओं पर बढ़ती उम्र का असर धीरे होता है। यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया की तरफ से करवाया गया। इस शोध में 129 मां बन चुकी महिलाओं की सेक्स हैबिट्स को एक हफ्ते तक मॉनिटर किया गया।
    शोध में सामने आया कि जिन लोगों ने हफ्ते में कम से कम एक बार सेक्स किया था उनके डीएनए स्ट्रैंड्स के आखिर पर लंबे टीलोमियर्स और न्यूक्लियोप्रोटीन कैप्स मिले। ये क्रोमोसोम्स की क्षति को रोकते हैं। डीएनए स्ट्रैंड्स के आखिर में मौजूद ये कैप्स बढ़ती उम्र के असर को रोकने के साथ उम्र लंबी करते और सेहत अच्छी रखते हैं।
    शोध के मुताबिक टीलोमियर्स बढ़ती उम्र, खराब डायट और ज्यादा शराब पीने से अपने आप ही ब्रेक होने लगते हैं। लेकिन फिजिकली एक्टिव रहने, अच्छी तरह खाने, सेक्स करने से इन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है साथ ही इनकी लंबाई भी बढ़ती है।
    और शोधों की मानें तो ये टीलोमियर्स आपकी उम्र लंबी करते हैं और उम्र बढऩे के साथ आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखते हैं। समय के साथ टीलोमियर्स के छोटे होने से गंभीर बीमारियां और उम्र से पहले मौत हो सकती है।
    शोध में बताया गया कि रिश्ते में संतुष्टि, डेली सपोर्ट या मतभेद या फिर तनाव का टीलोमियर्स की लंबाई से कोई लेना-देना नहीं होता है। न ही सेक्स ड्राइव या सेक्स के इंजॉयमेंट से। कई शोधों से पता चला है कि हफ्ते में एक बार पार्टनर के साथ सेक्स जरूर करना चाहिए, यही आदर्श लक्ष्य हो सकता है। (टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • कभी ना कभी हर किसी के जीवन में ऐसा समय जरूर आता है जब व्यक्ति ना चाहते हुए भी मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है.हालांकि अपने तनाव की वजहों को रोकना तो हर किसी के बस में नहीं होता है. लेकिन उन वजहों से खुद को कम से कम परेशान करना आप पर जरूर निर्भर करता है. जिसके लिए सबसे पहले आपको यह बात समझने की जरूरत है कि आप अपने जीवन में किस चीज को कितनी अहमियत देते हो, या कोई चीज आपको कितना ज्यादा इफेक्ट कर सकती है.

    १. सीधे होकर चलें:एक शोध में यह बात साबित हो चुकी है कि अपने सिर को ऊंचा रखकर सीधे चलने से मूड अच्छा होता है.साथ ही कंधों को झुका कर चलने से व्यक्ति के अंदर नेगेटिव विचार आते हैं. इसलिए जितना हो सके सीधे होकर ही चलें.

    २. एक्सरसाइज करें:एक नए शोध के अनुसार हफ्ते में कम से कम ३ बार एक्सरसाइज करने से मानसिक तनाव १९ फीसदी तक कम होता है. शोधकर्ताओं की मानें तो एक्सरसाइज करने वालों को कम तनाव होता है, जबकि बहुत तनाव में रहने वाले लोग वो होते हैं जो एक्सरसाइज ही नहीं करते.

    ३. तनाव भरे रिश्ते से बचें:ऐसे रिश्ते में रहने से बचें जहां आपके पार्टनर को आपकी कोई फिक्र ही ना हो. जो समय- समय पर आपको बेइज्जत करे. क्योंकि ऐसा रिश्ता आपको खुश करने के बजाए तनाव में डाल सकता है.

    ४. समय पर सोएं:नींद पूरी ना होने के कारण भी व्यक्ति तनाव में आ जाता है. क्योंकि अगर आप सही नींद नहीं लेते तो आपकादिमाग ठीक से काम नहीं करता. जिस कारण आप तनाव के शिकार हो जाते हैं. इसलिए तनाव से दूर रहने के लिए जरूरी है कि आप सही नींद लें.

    ५. खुद के लिए समय निकलें:फैमिली, फ्रेंड्स और काम में लोग अकसर इतना बिजी हो जाते हैं कि वो खुद को समय ही नहीं दे पाते. जिस कारण भी लोग धीरे-धीरे तनाव में आने लग जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि अपनी बिजी लाइफ में आप अपने लिए कुछ समय जरूर निकालें और उस समय में वो काम करें जिससे आपको खुशी महसूस होती है. 

    ६. डिजिटल डिवाइस से थोड़ी दूरी बरतें:इंटरनेट और डिजिटल डिवाइस की लोगों को इतनी ज्यादा लत लग चुकी है कि वही उनकी दुनिया बन चुके हैं. जहां इंटरनेट साइंस का एक दिया हुआ वरदान है, वहीं यह लोगों को तनाव में डालने का एक बड़ा कारण भी बन चुका है. यह बात कई शोध में भी साबित हो चुकी है.

    ७. एक समय पर एक ही काम करें:भाग दौड़ भरे जीवन में समय की बचत के लिए अकसर लोग एक समय पर कई सारे काम करने लगते हैं. एक साथ कई चीजों पर ध्यान देने की वजह से उनका कोई काम ठीक से नहीं हो पाता है. जो लोगों में तनाव का कारण बन जाता है. इसलिए जितना हो सके एक समय पर एक ही काम करें और तनाव से खुद को दूर रखें.(आजतक)

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Posted Date : 18-Nov-2017
  •  सर्दी ने दस्तक दे दी है. ठंडी हवाएं चलनी शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में अपनी सेहत का खास ख्याल रखना बहुता जरूरी होता है. सेंहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि हम अपना आहार मौसम के हिसाब से ही लें.

    ये तो सभी जानते हैं कि सर्दियों के मौसम में सेहत को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन प्रकृति ने इनसे लड़ने के लिए कई प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाए हैं. आज हम आपको ऐसे ही 7 खाद्य पदार्थ के बारे में बता रहें जिसका सेवन कर के आप सर्दी के मौसम में खुद को सेहतमंद रख सकते हैं.

    बाजरा:सर्दियों में बाजरे का सेवन बच्चों और बुजूर्गों के लिए काफी फायदेमंद होता है. बाजरे में फाइबर और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. जो कब्ज, गैस से छुटकारा दिलाकर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. इतना ही नहीं बल्कि बाजरा शरीर को गेंहू से ज्यादा एनर्जी देता है.

    खजूर:   खजूर में विटामिन ए, बी के अलावा पोटैशियम, मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. सर्दियों में खजूर का सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखने के साथ मजबूत भी बनाता है. रोजाना 2 खजूर खाने से शरीर में फाइबर की कमी दूर हो जाती है. साथ ही यह खून में हीमोग्लोबिन के स्तर को भी कंट्रोल में रखता है.

    गुड़:     गुड़ सर्दियों के मौसम के लिए सबसे फायदेमंद होता है. यह शरीर में खून की कमी को दूर कर के इसको साफ करने में भी मदद करता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में आयरन, फास्फोरस, कॉपर, मैग्नीशियम, कैल्शियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. साथ ही गर्म दूध के साथ गुड़ खाने से वजन भी कम होता है.

    तिल:    तिल की तासीर गर्म होती है, जिस वजह से सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए तिल खाना बहुत जरूरी होता है. तिल में मोनो- सैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. साथ ही तिल में एंटी- बैक्टीरियल तत्व मौजूद होते हैं, जो घाव को जल्दी भरते हैं.

    हल्दी:    रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी का प्रयोग केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व भर में किया जाता है. एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल के तौर पर यह शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में काफी मददगार है. ज्यादा लाभ के लिए हल्दी गर्म दूध के साथ लेना चाहिए.

    गाजर:    सर्दियों में खूब मिलने वाली गाजर में बीटा कैरोटीन होता है. शरीर इसे विटामिन ए में तब्दील कर देता है और यह विटामिन शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली के लिए, फेफड़ों को स्वस्थ रखकर सांस की बीमारियों के खतरे को कम करने में मददगार होता है. साथ ही यह त्वचा पर उम्र के असर को कम करने के लिए भी एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है.

    चुकंदर:    चुकंदर में लाभवर्धक फाइटोकेमिकल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो स्वस्थ कोशिकाओं और उनके डीएनए को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों से लड़ने में मदद करते हैं. इनकी वजह से बॉडी की इम्युनिटी भी मजबूत होती है. जिससे शरीर को इंफेक्शन आदि से लड़ने में मदद मिलती है. (आजतक)।

     

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • किशमिश को यूं तो आपने कई बार खाया होगा। ये न केवल खीर का स्वाद बढ़ाने का काम करती है बल्कि कई तरह की बीमारियों को भी दूर भगाती है। इसे रोजाना सुबह खाकर गुनगुना पानी पीने से कई तरह की शारीरिक बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। तो चलिए आपको बताते हैं कि इसे खाने से क्या क्या फायदे होते हैं।

    बढ़ाती है आंखो की रोशनी 
    किशमिश में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिससे न केवल आंखों की रोशनी बढ़ने में मदद मिलती है बल्कि आंखों के मसल्स को भी आराम मिलता है। 
    खून की कमी को करती है दूर
    रोज सुबह किशमिश खाने से खून की कमी दूर होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें लौह तत्वों की मात्रा अधिक होती है। 
    कब्ज से राहत
    ज्यादातर लोगों कब्ज की समस्या से पीड़ित रहते हैं ऐसे में किशमिश रोजाना खाना इसका अचूक उपाय है। इसे रोजाना खाने से डाइजेशन सिस्टम ठीक रहेगा और कब्ज की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है। 
    बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
    किशमिश खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। इसमें विटामिन ए, बी – कॉम्प्लेक्स और सेलीनियम मौजूद होता है। जो रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। 

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • फल सब्जी में फर्क करना तो बच्चों का खेल है, ऐसा आपको लगता है. देखें, इन 10 में से आप कितने सही जवाब दे पाते हैं क्योंकि आप जिसे सब्जी समझते हैं, वह दरअसल सब्जी है ही नहीं.

    • शिमला मिर्च

    फल दरअसल फूल से उगते हैं. अधिकतर वे मीठे होते हैं लेकिन हमेशा नहीं. शिमला मिर्च इस लिहाज से फल है और इसी तरह भिंडी भी.

    • टमाटर

    विज्ञान की दृष्टि में किसी भी पौधे का बीज वाला वह हिस्सा है जो अंडाशय से विकसित होता है फल है. इसीलिए टमाटर फल की श्रेणी में आते हैं

    • कद्दू

    पौधे की जड़ और पत्तों से उगने वाली चीजें सब्जी कहलाती हैं, जैसे आलू और पालक. लेकिन कद्दू के साथ ऐसा नहीं है, इसलिए यह भी फल है.

    • खीरा

    जी हां, अब तक तो आप समझ ही गए होंगे, रसदार खीरा भी फल ही होता है.

    • तरबूज

    अगर आप क्विज से घबरा कर अब तरबूज को सब्जी कह रहे हैं, तो आप गलत हैं. तरबूज फल ही है लेकिन 'बेरी' की श्रेणी में आता है.

    • केला

    बेरी ऐसे फल को कहते हैं जिसके अंदर ढेर सारे बीज हों और जो एक ही अंडाशय की उपज हों. इस लिहाज से केला भी बेरी है.

    • स्ट्रॉबेरी

    इस फल के तो नाम में ही बेरी है लेकिन कमाल की बात है कि यह बेरी नहीं है क्योंकि इसमें एक नहीं कई अंडाशय हैं.

    • मूंगफली

    अंग्रेजी में पीनट कहे जाने वाली मूंगफली 'नट' यानि बादाम की श्रेणी में नहीं आती है, बल्कि अपने हिन्दी नाम की करह फली है. मटर और चना भी फली हैं.

    • मक्का

    भुना हुआ भुट्टा खाने के कारण इसे भी लोग अक्सर फल या सब्जी समझते हैं लेकिन यह गेहूं और चावल की तरह अनाज है

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में हर तबका वायु प्रदूषण व धुंध की समस्या से परेशान है। ऐसे में अगर एलोवेरा, स्पाइडर प्लांट जैसे पौधों की संख्या बढ़ाई जाए तो कुछ हद तक धुंध से निजात मिल सकती है।
    एलोवेरा कार्बनडाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड को अवशोषित करता है और ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। ऐसा माना जाता है कि एलोवेरा का एक पौधा नौ एयर प्यूरीफायर के बराबर होता है।
    एलोवेरा को आयुर्वेद में संजीवनी कहा जाता है। इसमें अमीनो एसिड की मात्रा भरपूर रहती है और विटामिन 12 की मौजूदगी से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। एलोवेरा त्वचा की देखभाल से लेकर बालों की खूबसूरती तक और घावों को भरने से लेकर कैंसर से निजात पाने तक, हर परेशानी से राहत देता है।

    एलोवेरा कुछ समस्याओं में ज्यादा कारगर है। यहां एलोवेरा के कुछ उपाय बताए जा रहे हैं:
    आंखों की जलन को करे छू-मंतर : ज्यादातर देखा गया है कि कंप्यूटर के सामने घंटों बैठे रहने पर, टीवी को लगातार देखने पर या नींद पूरी न होने पर आंखों की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में दो चम्मच एलोवेरा जेल को पानी में मिलाएं और इससे आंखों को धो लें। ऐसा करने से आंखों को आराम मिलेगा, साथ ही जलन से छुटकारा मिलेगा।

    पिंपल्स और टैनिंग को करें दूर : आप अगर एलोवेरा के ज्यूस का सेवन करते हैं तो आप पिंपल्स व पिंपल्स के दागों से दूर रहते हैं। साथ ही टैनिंग की समस्या से भी मुक्ति पा सकते हैं।

    जख्म भरे : अगर आपको कोई चोट लगी हुई है, या कोई घाव है, या फिर किसी कीड़े ने काट लिया है, तो होने वाली जलन से राहत पाने के लिए एलोवेरा का सेवन जरूर करें। ऐसा करने से आपके जख्म जल्दी भरेंगे।

    झड़ते बाल व डैंड्रफ से छुटकारा : आजकल अधिकर लोग कम उम्र में ही गंजेपन का शिकार हो रहे हैं, वहीं कई ऐसे भी होंगे जो झड़ते बाल से निजात पाने के लिए रास्ता ढूंढ़ रहे होंगे। ऐसे में आप अपने कंडिशनर में केवल दो चम्मच एलोवेरा जेल मिला कर अगर बालों में लगाते हैं तो आप देखेंगे कि बालों में चमक के साथ-साथ मजबूती भी आ जाएगी।

    जोड़ों के दर्द होंगे बंद : अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो आप ताजा एलोवेरा जेल को जोड़ों पर लगाएं। आपको दर्द से राहत जरूर मिलेगी।

    मोटापे से छुटकारा : कसरत व डाईट चार्ट को फालो करते-करते थक गए हैं तो अब आप एलोवेरा का सेवन करें। यह औषधि आपको प्राकृतिक रूप से वजन घटाने में आपकी सहायता करेगी।

    साइनस से रखे दूर : अधिकांश लोगों को इस तरह की समस्या सर्दियों में बढ़ जाती है। ऐसे में दवाई लेना मजबूरी हो जाती है। यदि आप एलोवेरा का सेवन करते हैं तो साइनस की समस्या से दूर रह सकते हैं।

    दांतों की देखभाल : दातों में होने वाली समस्या जैसे कैविटी, दाग-धब्बे, मसूड़ों में दर्द आदि को एलोवेरा से दूर किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि आप हमेशा फ्रेश रहते हैं।

    एलोवेरा एक एंटी-ऑक्सीडेंट है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर शरीर में होने वाली बीमारियों के खिलाफ एक कवच प्रदान करता है।

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • नई दिल्ली: फिट बॉडी किसे नही पसंद? इस परफेक्ट फिगर की चाह में हम ना जाने कितनी तरह की डाइट प्लैन को फॉलो करने की कोशिश करते हैं, कभी-कभी खुद ही फैट बढ़ाने वाली चीज़ों को अपनी डाइट से कट कर लेते हैं. लेकिन एक बार वज़न कम होने के बाद हम क्या करते हैं? डाइट प्लैन को भूलकर वापस पुरानी चीज़े खाने लग जाते हैं और रिज़ल्ट में एक बार फिर वही पुराना भारी-भरकम शरीर. अगर आप अपने शरीर को हमेशा शेप में रखना चाहते हैं और हर दिन फिट दिखना चाहते हैं, तो इन 10 टिप्स को हमेशा याद रखें. 

    आपको बता दें कि एक फीमेल बॉडी को लगभग 1200 कैलोरीज़ और मेल बॉडी को लगभग 1500 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है. ऐसे में इन 10 टिप्स के साथ आपको अपनी फिट बॉडी को मेंटेन रखने के लिए कैलोरीज़ कम लेने के साथ-साथ डेली एक्टिविटीज़ को भी बढ़ाने की ज़रूरत होगी. जैसे रोज़ाना ज़्यादा पैदल चलना, लिफ्ट के बजाय सीढ़ियां लेना आदि.  

    1. सब्ज़ियां, फल और गेहूं को डाइट में शामिल करें. 
    2. कॉम्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स फूड का इनटेक ज़्यादा करें जैसे चोकर वाला गेहूं, ज्वार और बाजरा. 
    3. मैदा और उससे बने प्रोडक्ट्स जैसे ब्रेड, नूडल्स, मैकरॉनी और पास्ता को रेगुलर ना खाएं.
    4. फैट और कोलेस्ट्रोल रिच फूड को कम खाएं. बाकि अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, मक्खन, घी, वनस्पती और नारियल तेल का इनटेक रखें.
    5. मीठा या चीनी को कम खाएं.
    6. कच्चे फल और सब्ज़ियों को सलाद के तौर पर खाएं. ये आपके शरीर को ज़रूरी विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर देंगे. फाइबर आपके डाइजेशन को बेहतर बनाए रखेगा. मोटापे और दिल संबंधी परेशानियों को कंट्रोल रखने में मदद करेगा. 
    7. नमक कम मात्रा में खाएं. 
    8. पूरे दिन में खाने को छोटे-छोटे भागों में खाएं. एक साथ ज़्यादा पेट ना भरें. किसी भी मील को ना छोड़ें. रोज़ाना टाइम से छोटे-छोटे मील खाएं. 
    9. खाना बनाते और टीवी देखते वक्त खाना ना खाएं. रोज़ाना 6 से 8 गिलास पानी पिएं.
    10. रेगुलर एक्सरसाइज़ करें. दिन में 20 से 40 मिनट ब्रिक्स वॉकिंग (जल्दी-जल्दी चलें) करें. वज़न कम करने और उसे मेंटेन करने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज़ सबसे बेस्ट है. (एनडीटीवी)

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • मधुमेह मेटाबोलिक बीमारियों का एक समूह है, जिसमें व्यक्ति के खून में ग्लूकोज (ब्लड शुगर) का लेवल नॉर्मल से अधिक हो जाता है. ऐसा तब होता है, जब शरीर में इंसुलिन ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें. जिन मरीजों का ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है वे अक्सर पॉलीयूरिया (बार-बार पेशाब आना) से परेशान रहते हैं. उन्हें प्यास (पॉलीडिप्सिया) और भूख (पॉलिफेजिया) ज्यादा लगती है.

    जेपी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता. मधुमेह के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी प्रकार के होते हैं. जबकि टाइप 2 डायबिटीज में शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता. दुनिया भर में मधुमेह के 90 फीसदी मामले इसी प्रकार के हैं. मधुमेह का तीसरा प्रकार है गैस्टेशनल मधुमेह, जो गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है.
    उन्होंने कहा, उचित व्यायाम, आहार और शरीर के वजन पर कंट्रोल बनाए रखकर मधुमेह को नियन्त्रित रखा जा सकता है. अगर मधुमेह पर ठीक से नियन्त्रण न रखा जाए तो मरीज में दिल, गुर्दे, आंखें, पैर एवं तंत्रिका संबंधी कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है."

    मधुमेह के कारण :
    1. लाइफस्‍टाइल: गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की गलत आदतें मधुमेह का कारण बन सकती हैं. घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी मधुमेह की संभावना बढ़ती है.

    2. सामान्य से अधिक वजन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता: अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है. ज्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है. शरीर में वसा की लोकेशन भी इसे प्रभावित करती है. पेट पर अधिक वसा का जमाव होने से इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है, जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. ऐसे में व्यक्ति को अपने बीएमआई (शरीर वजन सूचकांक) पर निगरानी बनाए रखते हुए अपने वजन पर नियन्त्रण रखना चाहिए.

    3. जीन एवं पारिवारिक इतिहास: कुछ विशेष जीन मधुमेह की सम्भावना बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है.

    मधुमेह से ऐसे बचें:
    1. नियमित व्यायाम करें: गतिहीन जीवनशैली मधुमेह के मुख्य कारणों में से एक है. रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम मधुमेह से बचने के लिए आवश्यक है.

    2. संतुलित आहार: सही समय पर सही आहार जैसे फलों, सब्जियों और अनाज का सेवन बेहद फायदेमंद है. लम्बे समय तक खाली पेट न रहें.
    3. वजन पर नियन्त्रण रखें: उचित आहार और नियमित व्यायाम द्वारा वजन पर नियंत्रण रखें. कम वजन और उचित आहार से डायबिटीज के लक्षणों को ठीक कर सकते हैं.

    4. पर्याप्त नींद: रोजना सात-आठ घंटे की नींद महत्वपूर्ण है. नींद के दौरान हमारा शरीर विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर में टूट-फूट की मरम्मत करता है. देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने से मधुमेह और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ती है.

    5. तनाव से बचें: तनाव आज हर किसी के जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है. मनोरंजक एवं सामाजिक गतिविधियों द्वारा अपने आप को तनाव से दूर रखने की कोशिश करें. साथ ही तनाव के दौरान सिगरेट का सेवन करने से मधुमेह की सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है. (आईएएनएस)

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Posted Date : 13-Nov-2017
  • पीपल के पेड़ को सदियों से पूजा जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं ये पेड़ की धार्मिक मान्यताओं के अलावा औषधीय गुणों से भरपूर है और कई बीमारियों को स्थायी रूप से ये ठीक कर सकता है.

    इन बीमारियों का हो सकता है इलाज-
    पीपल के पेड के उपयोग से नपुंसकता, अस्थमा, किडनी, कब्ज, डायरिया और अनेक ब्लिड डिजीज का घरेलू उपचार किया जा सकता है.

    आचार्य बाल कृष्ण के मुताबिक, पीपल की पत्तियों से लेकर बीज, छाल, जड़, तना और टहनियां सभी औषधीय गुणों से भरपूर है. इतना ही नहीं, पीपल के पौधे के औषधीय उपयोग से कई रोगों का सफल उपचार किया जा सकता है.

    इन बीमारियों के इलाज के लिए ऐसे करें पीपल का उपयोग-
    खूनी दस्त:- पीपल के तने, बीज, चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका मिश्रण बना लें और दिन में इस मिश्रण को आवश्यकतानुसार 3-4 बार लें. इसके सेवन से खूनी दस्त बंद हो जाएंगे.

    भूख कम लगना:- पीपल के पके हुए फलों के उपयोग से भूख कम लगना, खांसी, पित्त, रक्त संबंधी विकार और उल्टी का स्थायी उपचार संभव है.

    पेट दर्द:- पीपल के पौधे की 2-5 पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर मिश्रण बना लें और इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर दिन में 3-4 बार सेवन से पेट दर्द में राहत मिलेगी.

    अस्थमा:- पीपल की छाल और पके हुए फलों का अलग-अलग पाउडर बनाकर उसे समान मात्रा में मिला लें. इस मिश्रण को दिन में 3-4 बार सेवन से अस्थमा रोग से मुक्ति मिलती है.

    सांप काटने पर:- जहरीले सांप के काटे जाने पर पीपल की कोमल पत्तियों के रस की दो-दो बूंदे लें और उसकी पत्तियों को चबाएं. उससे सांप के विष का असर कम होगा.

    त्वचा रोग:- पीपल की कोमल पत्तियों को चबाने से त्वचा की खारिश और अन्य रोगों का उपचार होता है. पीपल की पत्तियों की 40 मिलीलीटर चाय का सेवन भी अत्यंत प्रभावकारी साबित होता है.

    दाद खाज खुजली:- 50 ग्राम पीपल की छाल की राख बनाकर, इसमें नींबू और घी मिलाकर इसका पेस्ट बना कर इस पेस्ट को प्रभावित अंगों पर लगाने से आपको तुरंत शीतलता प्राप्त होगी. पीपल की छाल की 40 मिलीलीटर चाय के प्रतिदिन सेवन से भी राहत मिलती है.

    फटी एड़ियां:- फटी एड़ियों पर पीपल की पत्तियों का रस या उसका दूध लगाएं इससे इस समस्या में पूरा उपचार मिलेगा.

    रक्त की शुद्धता:- 1-2 ग्राम पीपल बीज पाउडर को शहद में मिलाकर प्रतिदिन दो बार उपयोग से रक्त शुद्ध होता है.

    नपुंसकता:- पीपल के फल के पाउडर का आधा चम्मच दिन में दूध के साथ तीन बार लेने से नपुंसकता समाप्त हो जती है और शरीर बलवान बनता है.

    सेक्स ताकत में बढ़ोतरी:- पीपल के फल, जड़े, छाल और शुंगा को बराबर मात्रा में लेकर इसमें शहद मिलाकर खाने से सेक्स ताकत में बढ़ोतरी होती है.

    कब्ज:- पीपल के 5-10 फल प्रतिदिन सेवन में कब्ज रोग का स्थाई समाधान होता है.

    लीवर के रोगों के लिए:- 3-4 ताजा पीपल की पत्तियों को क्रिस्टल चीनी में मिलाकर इसका पाउडर बना लें. इस पाउडर को 250 ग्राम पानी में मिलाकर मिश्रण को छान लें. इसे रोगी को 5 दिन तक दिन में दो बार दें. यह मिश्रण पीलिया रोग में अत्यंत प्रभावकारी साबित होता है.

    हिचकी आने पर:- 50-100 ग्राम पीपल की छाल का चारकोल बनाकर इसे पानी से बुझा दें. इस पानी के सेवन से हिचकी आनी बंद हो जाती है.

    आंखों में दर्द:- पीपल की पत्तियों के दूध को आंखों पर लगाने से आंखों की पीड़ा कम होगी.

    दांत दर्द:- पीपल और वट पेड़ की छाल बराबर मात्रा में लेकर इस मिश्रण बना लें. इस मिश्रण को गर्म पानी में उबाल कर इससे कुल्ला करने से दांत दर्द समाप्त हो जाता है. (ABP news)

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Posted Date : 12-Nov-2017
  • हाल ही में एक शोध में सामने आया है कि शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण ब्लड कैंसर होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। विटामिन डी के स्रोत भी काफी सस्ते होते हैं, इसलिए इनका सेवन करना आसान है। सूरज की किरणें विटामिन डी लेने का सबसे अच्छा स्रोत होती हैं, इसके अलावा मछली और अंडे में भी अच्छी मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। 

    रिसर्च में सामने आया कि विश्व की एक अरब से ज्यादा आबादी विटामिन डी की कमी से पीड़ित है। सनस्क्रीन का हद से ज्यादा उपयोग, भोजन में विटामिन डी की कमी और घर के अंदर खेलना और काम करने जैसी आदतों ने लोगों में विटामिन डी की कमी की समस्या को गंभीर बना दिया है। 
    रिसर्च के मुताबिक विटामिन डी का हमारे शरीर के कई हिस्सों से गहरा ताल्लुक होता है। दिमाग के जिस हिस्से से याद्दाश्त और भावनाएं प्रभावित होती हैं, उसके पोषण में भी विटामिन डी का अहम योगदान होता है। 

    हमारा शरीर दिन में करीब 10,000 कैंसर कोशिकाएं बनाता है, शरीर में अगर विटामिन D3 की कमी हो तो इन कोशिकाओं को फैलने में आसानी रहती है जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। 
    (नवभारतटाइम्स.)

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Posted Date : 11-Nov-2017
  • जोड़ों के दर्द से काफी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जोड़ों का दर्द उठने-बैठने के अलावा करवट लेने में भी तकलीफ पैदा कर देता है. कई बार तो ये जोड़ों का दर्द असहनीय भी जाता है. लेकिन घरेलु नुस्खा अपनाकर जोड़ों के दर्द से निजात पाई जा सकती है. जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए व्यायाम तो एक कारगर तरीका है ही लेकिन दर्द को दूर करने के लिए घरेलु नुस्खा भी काफी काम आ सकता है.
    नींबू के इस्तेमाल से जोड़ों के दर्द से निजात पाई जा सकती है. नींबू के छिलके को घुटने पर लगाने से दर्द में काफी आराम मिलता है. नींबू में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं. नींबू में मैग्नीशियम, पोटैशियम, कैल्शियम विटामिन A, C, B1 और B6 पाया जाता है. ये सभी पोषक तत्व ही दर्द से आराम दिलाते हैं.

    जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले 2 नीबूं के छिलके और 100ml ऑलिव ऑयल लेना होगा. इसके बाद नींबू को किसी जॉर में डालें और फिर इसमें ऑलिव ऑयल डालिए. ऐसा करने के बाद करीब 2 हफ्तों तक जॉर को बंद करके रख दें. 2 हफ्तों के बाद इस मिश्रण को रेशमी कपड़े में लेकर रात को दर्द की जगह लगाकर उसे बैंडेज से ढंककर छोड़ दें. ऐसा करने से धीरे-धीरे इसका असर देखने को मिलेगा और पुराने से पुराना दर्द भी छूमंतर हो जाएगा. (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 10-Nov-2017
  • डेंगू बुखार की वजह से हर साल बहुत से लोग अस्पताल पहुंच जाते हैं। इनमें से कईयों की जान तक चली जाती है। मादा एडीज मच्छर जब किसी को काटता है तब डेंगू को फैलाने वाला वायरस उसकी लार के साथ शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिसके बाद से व्यक्ति डेंगू रोग की चपेट में आ जाता है। इसमें रोगी के प्लेटलेट्स की मात्रा बड़ी तेजी से कम होती है। योग गुरु बाबा रामदेव आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की मदद से डेंगू के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बाद भी उसे ठीक करने का दावा करते हैं। इससे पहले कि हम आपको यह बताएं कि बाबा रामदेव के सुझाए ऐसे कौन-कौन से उपाय हैं जिनसे डेंगू को पूरी तरह से और बिना अस्पताल गए ठीक किया जा सकता है, आपको डेंगू के लक्षणों के बारे में बता दें।
    डेंगू के लक्षण – इसके लक्षण तीन से 14 दिन बाद दिखते हैं। अगर आपमें भी ये लक्षण दिखाई देते हैं तो सतर्क हो जाएं – 1. तेज ठंड के साथ बुखार का आना।
    2. सिर और आंखों में दर्द
    3. शरीर और जोड़ों में दर्द होना
    4. भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी और दस्त आना
    5. गंभीर स्थिति में नाक और आंख से खून आना
    गिलोय डेंगू का रामबाण इलाज है। गिलोय आसानी से कहीं भी मिल सकती है। पान के पत्तों की तरह दिखने वाली गिलोय की डंडी को तोड़कर उसका रस निकाल लें और सेवन करें। इससे प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ेंगे। गिलोय को कूटकर पीने से इम्यून सिस्टम काफी मजबूत होता है। इससे डेंगू का मच्छर काटने के बाद भी डेंगू की बीमारी नहीं होती।गिलोय की लता का रस पीने से किसी भी तरह का बुखार हो वह तुरंत ठीक हो जाता है।
    डेंगू के दौरान उल्टी आदि की समस्या को दूर करने के लिए अनार का सेवन किया जा सकता है। डेंगू हो जाने पर खूब अनार का जूस पीना चाहिए। इसके अलावा एलोवेरा का जूस भी उल्टी और जी मिचलाने की समस्या से राहत दिलाता है।
    डेंगू से बचने के लिए खूब पानी पीना चाहिए। इसके अलावा एलोवेरा, पपीता और बकरी के दूध का सेवन इस बीमारी से निपटने में काफी मदद करता है।
    पपीते के पत्ते प्लेटलेट्स को तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं। इनके रस का सेवन करने से लीवर भी सही रहता है।
    बाहर के खाने से दूरी बनाकर रखना चाहिए। साथ ही साथ हर रोज कम से कम 15-20 मिनट तक योगा करना चाहिए। (जनसत्ता)

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Posted Date : 09-Nov-2017
  •  पाए जाते हैं। बादाम थोड़ा महंगा होता है जबकि मूंगफली सस्ता भी होता है और स्वास्थ्यकर भी। सर्दियों के दिनों में इसकी खूब मांग होती है। मूंगफली प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होता है। सौ ग्राम कच्ची मूंगफली में एक लीटर दूध के बराबर प्रोटीन पाया जाता है। मूंगफली को भूनकर खाने पर जितनी मात्रा में खनिज मिलता है उतना 250 ग्राम मांस में भी नहीं मिलता। सिर्फ फल ही नहीं मूंगफली का तेल भी कई तरह से हमें फायदा पहुंचाता है। शरीर की त्वचा पर मौजूद कीटाणुओं को खत्म करने में इसका तेल हमारी मदद करता है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पोषक तत्वों का खजाना मूंगफली के खाने से कौन-कौन सी बीमारियां भी दूर हो जाती हैं।
    दिल के लिए – दिल की सेहत के लिए मूंगफली काफी फायदेमंद खाद्य है। सप्ताह में पांच दिन मूंगफली का सेवन किया जाए तो इससे दिल की बीमारियों की आशंका कम हो जाती है। इसके अलावा यह कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करने का काम करता है।
    हड्डियों की मजबूती के लिए – मूंगफली के से सेवन से हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसका कारण है इसमें मौजूद कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा। यह हड्डियों के लिए एक बेहरीन और सस्सा प्राकृतिक उपचार है।
    हार्मोन्स के संतुलन के लिए – शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए हार्मोन्स का संतुलन बेहद जरूरी है। मूंगफली इसमें आपकी बहुत मदद कर सकती है। रोजाना मूंगफली का सेवन पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्मोन्स का संतुलन बनाए रखता है।
    कैंसर के लिए – मूंगफली में पॉलीफिनॉलिक नाम का एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह पेट के कैंसर को कम करने की क्षमता रखता है। 2 चम्मच मूंगफली के मक्खन का सप्ताह में एक बार सेवन करने से महिलाओं और पुरुषों दोनों में पेट के कैंसर का खतरा कम होता है।
    प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए – मूंगफली में फोलिक एसिड होता है। यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में न्यूरल ट्यूब के दोष के खतरे को कम करता है। साथ ही साथ यह महिलाओं में प्रजनन शक्ति को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 09-Nov-2017
  • ब्राजील के बाद भारत दुनिया में सबसे ज्यादा गन्ना उत्पादन करता है। गन्ने से बने चीनी और गुड़ के अलावा इसके जूस का भी खूब सेवन किया जाता है। गन्ने का जूस स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी लाभकारी होता है। इसमें भारी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तथा संक्रमण से भी बचने में सहायता करते हैं। गन्ने के जूस में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और कई तरह के इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं जो शरीर के डिहाइड्रेशन के लिए बेहद जरूरी हैं। यह शरीर में प्रोटीन लेवल को बढ़ाने का काम करता है, साथ ही साथ बुखार, संक्रमण आदि से लड़ने में हमारी मदद भी करता है।
    गन्ने का जूस कई तरह की अन्य गंभीर बीमारियों में भी काफी लाभकारी है। आज हम आपको इसके कई सारे लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं। गन्ने का जूस डाइयूटेरिक यानी कि मूत्रवर्धक होता है। यह शरीर में मूत्र संबंधी क्षेत्रों में संक्रमण होने से बचाता है। इसके अलावा किडनी में पथरी होने से भी बचाव करता है। किडनी के ठीक तरह से काम करने में भी गन्ने का जूस काफी सहायक होता है। गन्ने का जूस एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। यह हमारे लीवर को शक्ति प्रदान करता है।
    पीलिया रोग के उन्मूलन में गन्ने के जूस का सेवन वरदान की तरह काम करता है। पीलिया में लीवर के ठीक तरह से काम न करने की वजह से शरीर के द्रवों में बिलरुबिन की अधिकता हो जाती है। इस वजह से हमारे शरीर की त्वचा पीली हो जाती है। ऐसे में गन्ने का जूस शरीर में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है जिससे पीलिया से उबरने में मदद मिलती है। गन्ने के जूसे का ग्लाइकेमिक इंडेक्स काफी कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज को रोगियों के लिए बेहतरीन औषधि है। इसमें भारी मात्रा में खनिज तत्व पाए जाते हैं जिसकी वजह से यह दांतों की हर तरह की समस्या के लिए एक कारगर उपाय होता है। अगर आपकी सांसों से बदबू आती है तो आपको गन्ने के जूस का सेवन करना चाहिए। इससे बदबू से जल्द ही राहत मिल जाएगी। (जनसत्ता)

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Posted Date : 08-Nov-2017
  • 'जल ही जीवन है'. जी हां, पानी सिर्फ आपकी प्‍यास ही नहीं बुझाता बल्‍कि यह आपके शरीर की पूरी हेल्‍थ के लिए भी बेहद जरूरी है. सिर्फ पानी पी लेने भर से ही आप कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं. यूं तो शरीर को एक्टिव और हेल्‍दी बनाए रखने के लिए दिन भर पानी पीना चाहिए लेकिन सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से सबसे ज्‍यादा फायदा होता है. वैसे तो खाली पेट पानी पीना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्‍सा होता है, लेकिन इससे होने वाले फायदों को कम ही लोग जानते हैं. यहां पर हम आपको इन्‍हीं फायदों के बारे में बता रहे हैं:

    1. शरीर की सफाई 
    सुबह-सवेरे खाली पेट पानी पीने से शरीर की बेहतर ढंग से सफाई हो जाती है. शरीर की सफाई से मतलब यह है कि पानी पीने से शरीर में मौजूद हानिकारक और जहरीले तत्‍व पसीने और मूत्र के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं. 

    2.  पेट के लिए फायदेमंद
    सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना आपके पेट के लिए सबसे ज्‍यादा फायदेमंद है. ऐसा करने से आपको कब्‍ज की श‍िकायत नहीं होगी. यही नहीं आंतों में जमा मल आसानी से निकल जाएगा. पेट साफ होगा तो आपकी भूल भी खुलेगी और आप तरोताजा भी महसूस करेंगे. सुबह उठकर एक से दो गिलास पानी पीना चाहिए. पानी पीने से शरीर के सारे अंदरूनी अंग फिर से एक्टिव हो जाते हैं. 

    3. वजन घटाने में मददगार
    खाली पेट पानी पीने से शरीर का मेटाबोलिक रेट बढ़ जाता है, जिससे खाना जल्‍दी और बेहतर ढंग से डाइजेस्‍ट होता है. इससे आपका वजन कम होने लगता है. अगर आप बेली फैट कम करना चाहते हैं तो सुबह उठकर गर्म पानी पीएं.

    4. सिर दर्द और टेंशन की छुट्टी 
    सुबह उठने के बाद अगर आप सबसे पहले पानी पीते हैं तो दिमाग में ऑक्‍सीजन की बेहतर सप्‍लाई होती है. ऐसा करने से दिमाग दिन भर एक्टिव और फ्रेश रहता है. यही नहीं दिमाग से जुड़ी मांसपेश‍ियों को तनाव मुक्‍त करने के लिए दिन भर बीच-बीच में पानी पीना बेहद जरूरी है. पानी न पीना भी सिर दर्द होने की वजह हो सकता है. अपने दिन की शुरुआत खाली पेट पानी पीने से करनी चाहिए ताकि सिर दर्द से छुटकारा मिल सके.

    5. स्‍किन रहेगी हेल्‍दी और फ्रेश 
    स्‍किन की ज्‍यादातर समस्‍याएं बाहरी नहीं अंदरूनी होती हैं. कहने का मतलब यह है कि शरीर के अंदर जितने विषाक्‍त तत्‍व मौजूद होंगे त्‍वचा पर उतने ही दाग-धब्‍बे और कील-मुंहासे दिखाई देंगे. खाली पेट पानी पीने से त्‍वचा अंदर से साफ हो जाती है. यही नहीं स्‍किन हाइड्रेट होती है और उसकी नमी बनी रहती है. अगर आप रोजाना खाली पेट पानी पीएंगे तो कुछ ही दिनों मे आपकी स्‍क‍िन साफ हो जाएगी और ग्‍लो भी करने लगेगी.

    6. बढ़ाए इम्‍यूनिटी 
    आप शायद यह जानकर हैरान रह जाएं कि पानी शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है. दरअसल, पानी विषाक्‍त तत्‍वों को बाहर निकाल देता है, जिससे शरीर के अंग हेल्‍दी और एक्टिव बने रहते हैं. इससे शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ती है. (एनडीटीवी)

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Posted Date : 07-Nov-2017
  • दुबले-पतले व्यक्ति जिनका तमाम कोशिशों के बाद भी वजन न बढ़ पा रहा हो उनके लिए आयुर्वेद में एक बेहतरीन उपाय है। आयुर्वेद के मुताबिक अश्वगंधा और शतावरी के सेवन से दुर्बल व्यक्ति की सेहत भी दुरुस्त हो सकती है। ऐसे लोग जिन्हें खाना न पचता हो या जिन्हें शारीरिक अति क्षीणता की शिकायत हो ऐसे लोग इस आयुर्वदिक औषधि का इस्तेमाल वजन बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। आजकल बहुत से युवा आकर्षक बॉडी पाने के लिए तमाम तरह की दवाओं आदि का सेवन करते हैं। ऐसे लोग भी शतावरी और अश्वगंधा के सेवन से बिना किसी साइड इफेक्ट के स्वस्थ और आकर्षक शरीर पा सकते हैं।
    कैसे करें सेवन – किसी भी उम्र के लोग अश्‍वगंधा और शतावरी का सेवन कर सकते हैं। इनके सेवन से पहले एक बार चिकित्‍सक की सलाह भी जरूर लेनी चाहिए। अश्वगंधा और शतावरी में ऐसे तत्‍व विद्यमान होते हैं जो बहुत गंभीर रोगों के उपचार में भी कारगर होते हैं। अश्‍वगंधा और शता‍वरी का चूर्ण मार्केट में बड़ी आसानी से मिल जाता है। आप चाहें तो 100-100 ग्राम का पैक लेकर उन्‍हें आपस में मिला लें और रोजाना सुबह और शाम आधा चम्‍मच यानी लगभग 5 ग्राम चूर्ण गर्म दूध में मिलाकर पिएं। आयुर्वेद के मुताबिक अश्वगंधा और शतावरी के चूर्ण से बनी इस औषधि का असर एक सप्‍ताह के भीतर ही दिखने लगता है। इसके सेवन से तेजी से वजन बढ़ता है। इसका सेवन करने के साथ-साथ व्‍यायाम करना भी जरूरी होता है।
    शतावरी तथा अश्वगंधा के अन्य लाभ – शरीर को ताकत, प्रदान करने के लिए और आलस, थकान आदि दूर करने में अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार औषधि है। साथ ही साथ तनाव कम करने, अनिद्रा, नपुंसकता को दूर करने और सेक्स संबंधी समस्याओ को दूर करने के लिए भी अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा जिन व्यक्तियों में कमजोरी, धातु दुर्बलता, नपुंसकता, शारीरिक क्षीणता है उनके लिए शतावरी बेहतरीन औषधि है। (जनसत्ता)

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