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माँ ने नहीं देखा उसका विश्व रिकॉर्ड बनते हुए !
01-May-2026 6:14 PM
माँ ने नहीं देखा उसका विश्व रिकॉर्ड बनते हुए !

फोटो: सेबेस्टियन सावे के माता-पिता सिमियोन और एमिली सावे


-अशोक पांडे

केन्या के सेबेस्टियन सावे इन दिनों दुनिया की निगाह में हैं. बीती छब्बीस अप्रैल को उसने दो घंटे से कम समय में मैराथन पूरी कर इतिहास बना डाला. तब से तमाम बड़े-छोटे अखबारों-चैनलों-पत्रिकाओं में उसके संघर्ष, ग़ुरबत में बीते जीवन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बारे में सैकड़ों लेख लिखे-छापे जा चुके हैं. खेत मजदूर पिता की माली हालत ऐसी न थी कि बेटे को अपने साथ रख पाते से सेबेस्टियन के बचपन का बड़ा हिस्सा दादी के पास रहकर बीता जो एक ऐसे घर में रहती थीं जिसमें बिजली भी नहीं थी.

सेबेस्टियन के चाचा केन्या छोड़ कर युगांडा चले गए थे जहां उन्होंने 800 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रेकॉर्ड बनाया था जो अब भी कायम है. वे ही सेबेस्टियन के सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत थे. उन्हीं के इसरार पर उसने भी इसी दौड़ में अपना करियर बनाने की सोच रखी थी. सात बरस पहले उसे एक प्रतिष्ठित रेस में भाग लेने का मौका था लेकिन वह समय पर नहीं पहुँच सका. आठ सौ मीटर दौड़ के सारे स्लॉट भर चुके थे. बस 5000 मीटर रेस में जगह बची थी. उसने उसी में हिस्सा लिया और रेस जीत ली. यही उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

मार्च 2020 में पैर में चोट लग गयी. दौड़ना मुश्किल हो गया. लेकिन वह उबर गया. फिर उसी साल उसे वेलेंशिया में

पहली मैराथन भागनी थी, उसे कोविड हो गया.

 

सेबेस्टियन की कहानी इस तरह की बाधाओं का आवागमन लगातार चलता रहा है लेकिन उसने बिना थके अपनी निगाह विश्व रिकॉर्ड पर टिकाए रखी. साल 2024 से उसने मैराथन जीतने का सिलसिला शुरू किया और कोपेनहेगन, वेलेंशिया, लंदन और बर्लिन की प्रतिष्ठित मैराथन जीतीं. केन्या में उसे एक सुपरस्टार का दर्जा मिल चुका था. इसके बावजूद वह लगातार अपने सपने की तरफ बढ़ता रहा और आखिरकार 26 अप्रैल को उसने वह कर दिखाया जिसे इतिहास में कोई नहीं कर सका था.

केन्या लौटने पर उसके स्वागत के लिए सरकार ने देश का उच्चतम प्रोटोकॉल लागू किया और समूचा नैरोबी उसे आँखों पर बिठाने को सडकों पर इकठ्ठा हो गया.

बीबीसी की टीम उसके घर उसके माता-पिता से मिलने पहुँची. उसके पिता कहने लगे, “हमें कतई उम्मीद नहीं थी की वह इस दफा रेकॉर्ड तोड़ सकेगा. मुझे लगा था इथियोपिया वाला जीत जाएगा लेकिन जब मैंने देखा कि सेबेस्टियन ने उसे पीछे छोड़ दिया है, तो मैंने टीवी देखना बंद कर दिया. मैंने तो रेस का अंत भी नहीं देखा.” माँ ने पूरी दौड़ देखी और जब उनके बेटे ने पहला नंबर हासिल किया वे मारे खुशी के घर में दौड़ने लगीं.

इंटरव्यू के दौरान दोनों मुख्य मुद्दे पर आते हैं, “असल बात ये हैं कि उसने वादा किया था कि हमारे लिए नया घर बनाकर देगा. और कार खरीदेगा ताकि हमें पैदल न चलना पड़े. उसने यह भी कहा है गाँव के अधूरे चर्च को भी पूरा बनवा देगा. और हमें विदेश लेकर जाएगा.”

थोड़ा ठहर कर उसकी माँ कहने लगती हैं, “उसने एक से एक कारनामे किये हैं. मैं बहुत दिनों से चाहती थी कि ईश्वर का शुक्रिया करते हुए सभी को दावत पर न्यौतूं. उसकी उपलब्धियों का कोई जश्न मनाया जाय. लेकिन वह हर बार कहता था अभी नहीं. एक बार विश्व रेकॉर्ड तोड़ लूं.”

दर्प भरी मुस्कान के साथ वे आखिर में जोड़ती हैं, “सेबेस्टियन घर लौटेगा तो उससे पूछूँगी क्या अब मैं अपनी मर्जी कर सकती हूँ?”


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