विचार / लेख
-संजीव शुक्ला
पिछले दिनों एक मित्र ने कहा कि आप कितने सामाजिक हैं यह देखना हो तो अपने मोबाइल की कॉल लिस्ट देखिए। देखें कि एक माह में आप कितने लोगों से बात कर रहे हैं इनमें से ऐसी कॉल जो व्यवसाय से संबंधित लोगों को की गई है उन्हें अलग कर दें, फिर देखें कि आपने महीने भर में कितने लोगों से बात करते हैं। यदि यह सूची पचास की है तो आप सामाजिक संबंधों के मामले में समृद्ध हैं।
मैंने अपनी कॉल लिस्ट देखी निजी संबंधी जिनसे मेरी नियमित बात होती है यह लिस्ट तीस से अधिक नहीं है। माता पिता पत्नी भाई बहन बच्चों के अतिरिक्त मात्र कुछ मित्र ही हैं जिनसे हम नियमित बातचीत करते हैं शेष सभी व्यावसायिक संबंध ही हैं। जैसे ही हम सेवानिवृत होते हैं या व्यवसाय से अलग होते है ये व्यावसायिक संबंध खत्म हो जाते हैं। इस अनुसार यदि मैं ख़ुद का मूल्यांकन करता हूँ तो मुझे लगता है कि व्यक्तिगत संबंधों को निभाने में मैं बहुत कमजोर हूँ। आप सभी भी इस आधार पर अपना मूल्यांकन करें और देखें कि व्यक्तिगत संबंधों के मामले में आप कितने समृद्ध हैं।
हम सभी सामाजिक प्राणी है हमारे जीवन का आधार केवल भौतिक सुख सुविधाएं ही नहीं है बल्कि प्रेम पारस्परिक सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव भी है। यह हमें परिवार और समाज से ही मिलता है।
मैं महसूस करता हूँ कि जब संचार के साधन कम थे तब हमारे संबंध अधिक विस्तृत और प्रगाढ़ होते थे। जब से मोबाइल व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टा आदि से हम जुड़े तब से हम व्यक्तिगत संबंधों के मामले में कृपण होते गए। फेसबुक इंस्टा पर तो हमारे मित्रों की संख्या हजारों में है लेकिन मन की बात खुल कर सके ऐसे छात्रों की संख्या बड़ी मुश्किल से दहाई में पहुंचाती है। व्हाट्सएप पर तो हम सैकड़ों को गुड मॉर्निंग और दिवाली की बधाई दे देते है किंतु व्यक्तिगत रूप से मित्रों के घर जाकर बधाई देने की परम्परा से हम दूर होते जा रहे हैं।
हमारी पीढ़ी तो फिर भी भाग्यशाली है कि कम से कम भाई बहन मामा चाचा बुआ मौसी आदि रिश्तों के मामले में हम धनी रहे हैं किंतु अब की पीढ़ी जो जनरेशन अल्फा कहलाती है वे सिंगल चाइल्ड हैं वे तो इन रिश्तों से भी परिचित नहीं होंगे। प्राकृतिक रिश्तों के साथ साथ आज की डिजिटल युग की जीवनशैली में वे मित्रों के मामले में भी कमजोर होंगे।
मुझे लगता है कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है बिना समाज, रिश्तों, दोस्तों के उसका विकास एक पूर्ण व्यक्ति के रूप में नहीं हो सकता है। आज तकनीकी प्रगति और व्यावसायिक जीवन शैली के कारण पारिवारिक और सामाजिक रिश्ते खत्म हो रहे हैं । यही कारण है कि आज अकेलापन तनाव और असंतोष जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। अब जरूरत इस गंभीर विषय पर चर्चा करने विचार करने और व्यावसायिक रिश्तों से परे अपने व्यक्तिगत रिश्तों को मजबूत करने की है। आइये इस दिशा में प्रयास करें।


