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मोहम्मद शमी: भारत की गेंदबाज़ी आक्रमण का 'सात सितारों वाला सुपरस्टार'
16-Nov-2023 10:10 PM
मोहम्मद शमी: भारत की गेंदबाज़ी आक्रमण का 'सात सितारों वाला सुपरस्टार'

जैसे ही मोहम्मद शमी गेंद फेंकने के लिए अपनी रन-अप के आख़िरी छोर की ओर बढ़े, विराट कोहली ने वानखेड़े स्टेडियम में मौजूद क्रिकेट फैंस को 'शामी! शामी!' के नारे लगाने के लिए प्रेरित किया.

फैंस ने भी दिल खोलकर पुरज़ोर आवाज़ के साथ उनका साथ दिया. इससे वर्ल्ड कप में मोहम्मद शमी के स्टेटस का साफ़ तौर से अंदाज़ा लगाया जा सकता था.

क्रिकेट के मैदान में विराट कोहली अपने बल्ले के साथ जिस मुक़ाम पर हैं, शमी को भी आज उसी तरह से भारत की गेंदबाज़ी आक्रमण का 'सात सितारों वाला सुपरस्टार' कहा जा सकता है.

ये महज इसलिए नहीं कहा जा रहा है कि बुधवार की रात उन्होंने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ लगभग कोई ग़लती ना करते हुए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था.

सच तो ये है कि भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण का सारा दारोमदार उनके अकेले कंधे पर टिका हुआ दिख रहा है, यहां तक कि जसप्रीत बुमराह भी कहीं पीछे छूट गए लगते हैं.

पिच पर मोहम्मद शमी की परफॉर्मेंस इसकी गवाही देते हैं. छह मैचों में 23 विकेट और जिसमें तीन बार पांच विकेट लेना और वो भी 10.9 की अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट के साथ मामूली बात नहीं है.

इस वर्ल्ड कप में गेंदबाज़ी के मोर्चे पर शमी का प्रदर्शन सबसे अव्वल रहा है. लेकिन आंकड़े हमेशा की तरह पूरी कहानी नहीं कहते हैं.

इस विश्व कप में भारत के पहले चार मैचों में शमी को आख़िरी 11 खिलाड़ियों में शामिल नहीं किया गया था क्योंकि टीम इंडिया आठवें नंबर पर किसी ऑलराउंडर को खिलाना चाहती थी ताकि शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ अगर लड़खड़ा जाएं तो नीचे सहारा देने के लिए कोई मौजूद रहे.

इसी सोच के तहत ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में आर अश्विन और पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ शार्दुल ठाकुर को मौका दिया गया.

बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में हार्दिक पांड्या को लगी चोट के बाद भारतीय टीम प्रबंधन को मजबूरी में मोहम्मद शमी को जगह देनी पड़ी. ये मैच धर्मशाला में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ था और मोहम्मद शमी ने पांच विकेट लेकर लोगों की राय बदल दी.

ऐसा नहीं है कि शमी ने क्रिकेट के मैदान में पहली बार वापसी की है और उन्हें खुद को पहली बार साबित करना पड़ा है.

शमी ने पहले एक दिवसीय और फिर टेस्ट टीम में आते ही विकेट चटकाने शुरू कर दिए थे. साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया में हुए विश्व कप के पहले हुए टेस्ट दौरों में शमी अपने चरम पर थे.

हालाँकि विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में भारत की हार के बाद उन्होंने इस बात को उजागर किया था कि उनके पैर में थोड़ी चोट थी. टीम को कवर करने वालों को भी इस बात का अहसास हो चला था.

सिडनी में भारत और मेज़बान ऑस्ट्रेलिया का सेमीफ़ाइनल होना था. एक दिन पहले एससीजी में नेट्स के दौरान मोहम्मद शमी ने क़रीब एक दर्जन गेंदें फेंकी.

इतनी देर में उस समय भारतीय टीम के गेंदबाज़ी कोच भारत अरुण उनके पास पहुँचे और क़रीब पाँच मिनट तक बातचीत हुई. शमी ने इसके बाद नेट्स में अपना रनअप छोटा कर दिया और गेंदबाज़ी के बाद फ़ील्डिंग ड्रिल में भी हिस्सा नहीं लिया.

इस विश्व कप से पहले 2014 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ हुई वनडे सिरीज़ में शमी ने 10 विकेट लिए थे और उसके बाद की श्रीलंका सिरीज़ के लिए उनका चयन भी हो गया था. लेकिन एकाएक उनकी जगह धवल कुलकर्णी को टीम में शामिल किया गया, क्योंकि शमी के पैर के अंगूठे में चोट लग गई थी.

बहराल, 6 मार्च, 2014 को वाका में खेले गए मैच में भारत ने वेस्ट इंडीज़ को 44 ओवरों में महज़ 182 के स्कोर पर समेट दिया. चार विकट रहते हुए भारतीय बल्लेबाज़ों ने ये लक्ष्य 40वें ओवर में ही पूरा कर लिया.

मैन आफ़ द मैच रहे मोहम्मद शमी जिन्होंने आठ ओवरों में दो मेडन फेंकते हुए तीन विकट झटके. इसमें स्मिथ, क्रिस गेल और कप्तान डैरन सैमी के विकेट शामिल थे.

साल 2015 के विश्व कप के पहले मैच में शमी ने ऐसा ही कुछ किया था पाकिस्तान के ख़िलाफ़.

सर डॉन ब्रैडमन के शहर एडिलेड में खेले गए मैच में शमी ने जिन चार पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों को पवेलियन लौटाया था उसमें, यूनुस ख़ान, मिसबाह-उल-हक़, शाहिद आफ़रीदी और वहाब रियाज़ शामिल थे. उस टूर्नामेंट में शमी जैसे ख़ुद को साबित करने के लिए उतरे थे.

ठीक उसी तरह जैसे फ़िलहाल इंग्लैंड में चल रहे विश्व कप, 2019 में देखने को मिला, जब भारत के शुरुआती चार मैचों में शमी को प्लेयिंग-11 में जगह तक नहीं मिली.

लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ हुए मैच में उन्होंने आख़िरी ओवर में हैटट्रिक लेकर भारत को न सिर्फ़ हार के मुँह से बाहर निकाला, बल्कि साख भी बचाई.

वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ भी शमी ने सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ी कर चार विकेट अपने नाम किए. इससे पहले किसी भी विश्व कप में भारत की तरफ़ से एकमात्र हैटट्रिक चेतन शर्मा ने ली थी और शमी की उपलब्धि पर ख़ुद चेतन शर्मा ने मुबारकबाद भेजी.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद शमी ने अपने भाइयों की तरह बचपन से ही अमरोहा के खेतों में क्रिकेट खेलना शुरू किया.

क्रिकेट प्रैक्टिस की शुरुआत अपने गाँव, अलीनगर सहसपुर के अपने खेत के बीच बनी सीमेंट की पिच से हुई थी.

किसान पिता तौसीफ़ अहमद ख़ुद क्रिकेट के दीवाने थे और बच्चों के हुनर की पहचान भी रखते थे. उन्होंने ही ज़िद की थी कि शमी मुरादाबाद में क्रिकेट कोच बदरूद्दीन की अकैडमी में क्रिकेट खेलने जाएँ.

उसके बाद से मोहम्मद शमी ने पीछे मुड़ कर तभी देखा जब स्टेशन पर खड़े उनके पिता और भाई हाथ हिलाकर शमी को कोलकाता के लिए अलविदा कह रहे थे.

जब शमी को उत्तर प्रदेश की जूनियर क्रिकेट टीम के चयन में नाकामी मिली तो कोच बदरूद्दीन ने उन्हें कोलकाता भेजकर खेलने की योजना बनाई.

सालों तक डलहौज़ी और टाउन क्लब के लिए क्रिकेट खेलने के बाद शमी को बंगाल की अंडर-22 टीम में जगह मिली थी.

परिवार के एक क़रीबी मित्र ने नाम न लेने कि शर्त पर बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव को बताया था कि उस टीम के लिए खेलने के बाद जब शमी अमरोहा आए थे तो जाड़े की एक शाम उन्होंने अदरक की चाय पीते वक़्त कहा था, "अगर भारतीय सेलेक्टर्स मुझे कल सुबह टीम इंडिया के नेट्स पर भी गेंदबाज़ी करने दे दें तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा."

दरअसल ख़ुद शमी को भी इस बात का अहसास नहीं था कि उनका समय बदलने वाला है. साल 2010 में रणजी खेलने के बाद 2013 में उन्हें टीम इंडिया के लिए चुना गया.

ख़ुद शमी ने इस बारे में कहा था, "कोलकाता में ईडन गार्डन में सौरभ गांगुली जैसों को गेंदबाज़ी करने का मौक़ा मिला और बहुत कुछ सीखने को भी मिला. वो आईपीएल का शुरुआती दौर था और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज़ों को तेज़ गेंदबाज़ी करने के मौक़े मिलते जा रहे थे."

साल 2018 के पहले तक मोहम्मद शमी, क्रिकेट के जुनून और सफलताओं के बीच चोट ही एक मात्र रुकावट बनती रही.

शमी ने इससे उबरना भी शुरू कर दिया था कि एकाएक उनकी निजी ज़िंदगी में एक भूचाल सा आया.

मार्च, 2018 में पत्नी हसीन जहाँ ने उन पर घरेलू हिंसा, हत्या की कोशिश और बलात्कार के आरोप लगाए और कोलकाता पुलिस ने शमी के ख़िलाफ़ एफ़आइआर दर्ज की.

मोहम्मद शमी ने इन सभी आरोपों को ग़लत बताते हुए ट्वीट किया था, "जितनी भी ख़बरें मेरे बारे में चल रहीं हैं, सभी ग़लत हैं और एक साज़िश है जिससे मुझे बदनाम किया जा सके और मेरा गेम ख़राब किया जा सके."

इस सब के बीच शमी की पत्नी ने एक और गम्भीर आरोप लगाया था, मैच फ़िक्सिंग का. नतीजा ये हुआ कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम के खिलाड़ियों को मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट में से मोहम्मद शमी को बाहर कर दिया और जाँच शुरू हो गई.

बीसीसीआई की एंटी करपशन यूनिट ने शमी को मैच फ़िक्सिंग के आरोप में निर्दोष पाया और शमी को दोबारा अनुबंधित किया. लेकिन इतने में ये ख़बर आग की तरह फैल चुकी थी.

लेकिन शमी की परेशनियाँ वहीं पर ख़त्म नहीं हुईं. भारतीय टीम में जगह पाने के लिए हर खिलाड़ी को यो-यो नाम के फ़िटनेस टेस्ट से गुज़रना पड़ता है.

अपने घरेलू विवाद के सिर्फ़ तीन महीने बाद हुए उस टेस्ट में फ़ेल हो जाने पर शमी को अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ होने वाले टेस्ट मैच में टीम से बाहर होना पड़ा.

अगर शमी के क़रीबी लोगों की मानें तो शायद ये, "आख़िरी झटका था और शमी भाई ने तय कर लिया कि दोबारा वैसे ही प्रैक्टिस शुरू कर देनी है जैसी टीम में पहली बार आने के लिए 2013 तक की थी."

अक्तूबर, 2018 में ही टीम में धुआँधार वापसी की. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ में अच्छी गेंदबाज़ी के चलते मोहम्मद शमी को उसी साल जनवरी में हुए न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों में टीम इंडिया में जगह मिली.

तब से अब में बहुत कुछ बदल चुका है मोहम्मद शमी की ज़िंदगी में. एक चीज़ है जो तब भी थी और आज भी है. विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे उन चुनिंदा भारतीय क्रिकेटरों में शमी भी शामिल हैं जो 2015 और 2019 का विश्व कप भी खेले थे और 2023 का भी खेल रहे हैं.

रविवार को खेले जाने वाले फाइनल मुक़ाबले में भारत ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका में से किसी एक से भिड़ेगा. दोनों ही टीमों को ये पता है अहमदाबाद में शमी का तूफ़ान उनका इंतज़ार कर रहा है. (bbc.com/hindi)


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