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पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की है.
हालांकि धोनी के साथ अपने रिश्ते के सवाल पर वो पहले जवाब देने में हिचकिचाते हैं, फिर विस्तार से बात करते हैं.
युवराज सिंह इंटरव्यू में कहते हैं कि वो और महेंद्र सिंह धोनी क़रीबी दोस्त नहीं रहे लेकिन वो दोनों ही एक मेहनती प्रोफेशनल थे.
उन्होंने कहा, ''मैं और माही क़रीबी दोस्त नहीं रहे, न हैं. हम दोस्त थे साथ क्रिकेट खेलने की वजह से. मेरा लाइफ़स्टाइल धोनी की लाइफ़स्टाइल से बिल्कुल अलग था. लेकिन जब मैं और माही ग्राउंड पर उतरते थे तो हम देश के लिए साथ मिलकर अपना सौ फ़ीसदी देते थे. और उसमें वो कप्तान थे और मैं उप-कप्तान. जब मैं टीम में आया था, वो चार साल जूनियर थे.''
फ़ैसलों पर होते थे मतभेद
युवराज ने स्वीकारा कि कप्तान और उपकप्तान होने के कारण उनमें और धोनी में टीम से जुड़े फ़सलों को लेकर कई मतभेद भी होते थे.
वो कहते हैं, '' कुछ फ़ैसले जो मैं लेता थे, वो धोनी को पसंद नहीं आते थे और कुछ फ़ैसले जो वो लेते थे, मुझे पसंद नहीं आते थे. ये हर टीम में होता है, हर खिलाड़ी के बीच होता है.''
उन्होंने कहा कि जब वो अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर थे और उन्हें अपने भविष्य को लेकर कुछ समझ नहीं आ रहा था तो उन्होंने धोनी से सलाह मांगी थी. और धोनी ही वो शख़्स थे, जिन्होंने उन्हें बताया था कि चयन समिति उन्हें चयनित करने की तरफ़ नहीं देख रही.
धोनी के साथ ऑन-फील्ड अनुभव
उन्होंने कहा, ''मुझे लगा चलो किसी ने तो मुझे मेरे करियर के बारे में सही जानकारी दी. ये 2019 वर्ल्ड कप के ठीक पहले की बात है.''
धोनी के साथ अपने ऑन फील्ड अनुभवों के बारे बात करते हुए युवराज कहते हैं, ''ऐसा भी एक समय था जब धोनी चोटिल थे और हम बांग्लादेश के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी कर रहे थे. मैं उनका रनर था. धोनी शतक बनाने के क़रीब थे इसलिए मैं चाह रहा था कि उन्हें स्ट्राइक मिले और वो अपना शतक पूरा करें. और इसी तरह जब मैं वर्ल्ड कप में नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी कर रहा था और मेरा स्कोर 48 था, तो माही ने अर्धशतक पूरा कराने में मेरी मदद की.''
युवराज ने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि धोनी किसी दिन उनके साथ गोल्फ़ खेलेंगे.
युवराज सिंह अपने इस इंटरव्यू में ये कहते हुए भी सुनाई देते हैं कि बचपन में उन्हें क्रिकेट में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी. अपने पिता के दबाव में उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया.(bbc.com/hindi)


