खेल
दुनिया की शानदार शतरंज खिलाड़ियों में से एक सारा खादेम ने बीबीसी से बात की है.
सारा ईरान की शतरंज खिलाड़ी हैं. सारा ख़ादेम ने कुछ वक़्त पहले एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में बिना हिजाब के खेलने का फ़ैसला किया था.
सारा ने ये कदम ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को समर्थन देने के लिए उठाया था.
सारा के इस कदम पर तब ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई थी.
सारा ने बीबीसी को बताया कि जब उन्होंने हिजाब नहीं पहना था, तब लगा था कि ज़्यादा से ज़्यादा चेतावनी दी जाएगी. लेकिन अब की हक़ीक़त कुछ और है.
ईरानी शतरंज खिलाड़ी अब अपने देश नहीं लौट सकती हैं. अगर वो ईरान गईं तो उनको गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.
इसी के चलते सारा स्पेन में अपने पति और एक साल के बेटे के साथ रह रही हैं.
सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सारा के परिवार ने बीबीसी से कहा है कि उनके बिलकुल सही पते के बारे में ना बताया जाए.
ईरान में सार्वजनिक जगहों पर औरतों का हिजाब पहनना ज़रूरी होता है. फिर चाहे ईरानी महिला देश से बाहर ही क्यों ना हों.
लेकिन बीते साल जब ईरान में हिजाब पहनने की बाध्यता के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तब कई लड़कियों ने हिजाब पहनने से इंकार किया था.
इन प्रदर्शनों की शुरुआत 22 साल की महसा अमीनी पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुई थी.
सारा ने कहा, ''मैंने जो कदम उठाया था, मुझे इसका कोई अफ़सोस नहीं है. मुझे अपने परिवार की याद आती है. मैं अब भी ईरानी हूं और ईरान के लिए खेलती हूं. ईरान के लोग भी मुझे ईरानी की तरह ही देखते हैं.''
सारा कहती हैं, ''मैं एक्टिविस्ट नहीं हूं और अपना सब कुछ दांव पर लगाने वालों को देने के लिए भी मेरे पास कोई संदेश नहीं है. जो लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, वो मुझे समेत कितने ही लोगों के लिए प्रेरणा हैं.'' (bbc.com/hindi)


