खेल
-मनोज चतुर्वेदी
श्रीलंका की एशिया कप की जीत के हीरो वानिंदु हसरंगा रहे. उनके ऑलराउंड प्रदर्शन से श्रीलंका दुबई में खेले गए फ़ाइनल में पाकिस्तान को 23 रन से हराने में सफल रहा. श्रीलंका ने 2014 के बाद ख़िताब पर कब्ज़ा जमाया है. वह छठी बार चैंपियन बना है.
श्रीलंका ने एशिया कप में अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ हार से शुरुआत की. लेकिन इसके बाद वो एक भी मैच नहीं हारे. श्रीलंका के जिस तरह के हालात हैं, उसमें टीम की यह सफलता देशवासियों को खुशी का मौका देगी. साथ ही अगले महीने ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप में क्वालिफाइंग दौर में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी.
पाकिस्तान की बल्लेबाजी की रीढ़ रिज़वान रहे हैं. इस मैच में भी वह अर्धशतक लगाकर पाकिस्तान को जब लड़ाई में बनाए रहने का प्रयास कर रहे थे, उस समय हसरंगा ने तीन झटके देकर पाकिस्तान का भाग्य तय कर दिया. उन्होंने पहले रिज़वान को गुणातिलका के हाथों लपकवाया. इस ओवर की तीसरी गेंद पर आसिफ़ अली को बोल्ड किया और फिर पांचवीं गेंद पर खुशदिल शाह को तीक्षणा के हाथों लपकवा दिया. इससे स्कोर सात विकेट पर 112 रन कर दिया.
रिज़वान की धीमी बल्लेबाजी ने भी पाकिस्तान पर दवाब बनाने में मदद की. रिज़वान पिछले कुछ मैचों में टीम के संकट मोचक साबित हुए थे. लेकिन उन्हें श्रीलंका के गेंदबाज़ों ने खुलकर खेलने की छूट नहीं दी. पाकिस्तान के सामने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ज़रूरी रन गति बढ़ता गया. तेज़ी से रन बनाने के प्रयास में ही पहले नवाज़ और फिर रिज़वान खुद भी आउट हो गए. रिज़वान ने 12.24 की स्ट्राइक रेट से 55 रन बनाए.
दोहरे झटके ने पाक पर बनाया दवाब
श्रीलंका के गेंदबाज़ी आक्रमण की शुरुआत करने वाले मदुशन के पहला ओवर ख़राब करने के बाद लग रहा था कि पाकिस्तान लक्ष्य की तरफ बढ़ सकता है. लेकिन मदुशन ने अपने पहले ही ओवर में कप्तान बाबर आज़म और फख़र ज़मान के दो गेंदों पर दो विकेट निकालकर पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया. सही मायनों में पाकिस्तान इस झटके से कभी उभर नहीं सकी. मदुशन श्रीलंका के सबसे सफल गेंदबाज भी रहे, उन्होंने चार ओवरों में 34 रन देकर चार विकेट निकाले.
भारत के ख़िलाफ मैच में विराट कोहली को बोल्ड करने वाले श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज मदुशन पर फाइनल का दवाब दिख रहा था. पाकिस्तान पर आक्रमण की ज़िम्मेदारी मदुशन ने संभाली. लेकिन दवाब में नो बाल से शुरुआत की. फ्री हिट पर शॉर्ट गेंद ज्यादा ऊंची हो जाने पर वाइड हो गई. अगली वाइड पर तो चौका देने से पांच रन चले गए. वह नौ रन दे चुके थे और अब भी पहली गेंद का इंतजार था. यह ओवर उन्होंने 11 गेंदों का किया.
पाकिस्तान के 23 रन पर दो विकेट निकल जाने के बाद इफ्तिख़ार और रिज़वान ने पारी को संभाला, स्कोर को 93 रन तक ले गए, लेकिन रन रेट में पिछड़ जाने पर उनके ऊपर तेजी से रन बनाने का दवाब बनने लगा. उन्हें जीत के लिए आख़िरी पांच ओवरों में 70 रन बनाने थे, इस प्रारूप में यह संभव माना जाता है. लेकिन श्रीलंकाई गेंदबाजों ने रन रेट पर लगाम लगाने के साथ धड़ाधड़ विकेट निकालकर मैच को अपने पक्ष में मोड़ लिया.
राजपक्षे और हसरंगा ने संभाली पारी
श्रीलंका की पारी की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं हो सकी और उन्होंने 58 रन तक पहुंचते हुए पांच विकेट खो दिए थे. इस मुश्किल स्थिति से राजपक्षे और हसरंगा की दमदार बल्लेबाजी ने निकाला और स्कोर को170 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. इसमें राजपक्षे ने नाबाद 71 रन का योगदान किया. उन्होंने 157.77 की स्ट्राइक रेट से खेलते हुए छह चौके और तीन छक्के लगाए.
राजपक्षे को मुश्किल हालात में वानिंदु हसरंगा के रूप में एक अच्छा जोड़ीदार मिला. सही मायनों में पाकिस्तान के गेंदबाजों पर दवाब बनाने की शुरुआत हसरंगा ने ही की. उन्होंने राजपक्षे के साथ छठे विकेट की 59 रनों की साझेदारी में 36 रन का योगदान दिया. हसरंगा ने 171.42 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करके 36 रन बनाने के लिए सिर्फ 21 गेंदें खेलीं. इसमें उन्होंने पांच चौके और एक छक्के लगाए.
पाक शुरुआती सफलता को नहीं भुना सका
पाकिस्तान के गेंदबाजी प्रदर्शन को दो भागों में बांटा जा सकता है. पहले 10 ओवर में उन्होंने बेहतरीन गेंदबाजी कर श्रीलंका को मुश्किल में डाल दिया था. लेकिन आखिरी 10 ओवरों में उन्होंने श्रीलंका को पकड़ से निकल जाने का मौका दे दिया.
पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज हारिस राउफ़ अपने पहले स्पेल में ही श्रीलंका को दो तगड़े झटके लगा चुके थे. राजपक्षे और हसरंगा जब पारी को तेजी से आगे बढ़ाकर साझेदारी को ख़तरनाक बनाते जा रहे थे, उस समय पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म हारिस राउफ़ को आक्रमण पर लेकर लाए और उन्होंने आते ही हसरंगा को विकेट के पीछे कैच कराकर साझेदारी तोड़ दी. पर हसरंगा आउट होने से पहले अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने में सफल हो गए थे.
राजपक्षे के आख़िर तक जमे रहने से श्रीलंका लड़ने लायक स्कोर तक पहुंचने में सफल हो गया. इसमें उनका करुणारत्ने ने अच्छा साथ निभाया. यह जोड़ी सातवें विकेट के अटूट साझेदारी में 54 रन जोड़ने में सफल रही.
पाकिस्तान को एक ऐसे क्रिकेट देश के रूप में जाना जाता है,जिसमें हमेशा रफ्तार के सौदागर रहे हैं. वह चाहे इमरान ख़ान, वकार यूनुस या वसीम अमरम. यह सिलसिला पाकिस्तान टीम में अभी भी बरकरार हैं. फाइनल में खेली पाकिस्तान टीम के तीनों तेज़ गेंदबाज नसीम शाह, हारिस राउफ़ और हसनेन 150 किमी. प्रति घंटा से ज़्यादा तक की रफ़्तार निकालते हैं. इस रफ्तार ने ही श्रीलंका की बल्लेबाजी को झकझोर कर रख दिया. पर वह इसका भी पूरी तरह से फ़ायदा नहीं उठा सका.
नसीम शाह ने ओपनर कुशाल मेंडिस को बोल्ड करके और हारिस राउफ ने ओपनर निसांका को कप्तान बाबर आजम के हाथों लपकवाने के बाद दानुष्का गुणातिलके को बोल्ड करके श्रीलंका की बल्लेबाजी की एक तरह से रीढ़ तोड़ दी. ख़ास बात यह है कि कुशाल मेंडिस और कुणातिलके दोनों रफ़्तार से गच्चा खाकर बोल्ड हुए. यह दोनों गेंदें 150 किमी. प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार वाली रहीं. पर आख़िरी ओवरों में श्रीलंकाई बल्लेबाजों के खुलकर खेलने पर गेंदबाज पूरे नियंत्रण से गेंदबाजी नहीं कर सके. (bbc.com/hindi)


