खेल
आदेश कुमार गुप्त
बर्मिंघम में इन दिनों जारी राष्ट्रमंडल खेलों में दुनियाभर के देशों के खिलाड़ियों के बीच भारतीय खिलाड़ियों ने भी विभिन्न स्पर्धाओं में अपने अभियान की शुरुआत कर दी है. राष्ट्रमंडल खेलों में इस बार भारतीय महिला और पुरुष मुक्केबाज़ भी अपना दमख़म दिखाने को पूरी तरह तैयार हैं.
पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने तीन स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक सहित कुल नौ पदक जीते थे.
भारत के बेहद अनुभवी मुक्केबाज़ शिव थापा ने बीते शनिवार को जीत के साथ अपने अभियान का आग़ाज़ किया. शिव थापा ने 63.5 किलोग्राम के मुक़ाबले में पाकिस्तान के सुलेमान बलोच को एकतरफ़ा मुक़ाबले में 5-0 से हराया. इसके साथ ही उन्होंने प्री क्वार्टर फ़ाइनल में अपनी जगह भी पक्की कर ली.
शिव थापा को इंतज़ार है अपने पहले राष्ट्रमंडल पदक का
शिव थापा 28 साल के हैं और वह साल 2015 में हुई विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा वह एशियन चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक भी अपने नाम कर चुके है.
वह बेहद आक्रामक अंदाज़ में अपने मुक़ाबले खेलते हैं लेकिन अब वह उम्र के उस मोड़ पर हैं जहां राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने का उनके पास शायद आख़िरी अवसर है.
अमित पंघाल लगा चुके हैं स्वर्ण पदक पर पंच
इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष वर्ग में भारत के अमित पंघाल से स्वर्ण पदक जीतने की बेहद उम्मीद है. 51 किलो भार वर्ग में उतरने वाले अमित पंघाल पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.
26 साल के अमित पंघाल तब सुर्ख़ियों में आए जब उन्होंने साल 2019 में हुई विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता. अमित पंघाल साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. अमित पंघाल प्री क्वार्टर फ़ाइनल में वानु अतु के मुक्केबाज़ का सामना करेंगे जो उनके लिए बेहद आसान साबित होने वाला है.
मोहम्मद हुसामुद्दीन 57 किलो भार वर्ग में अपनी चुनौती पेश करेंगे. 28 साल के मोहम्मद हुसामुद्दीन गोल्ड कोस्ट में हुए पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं. उन्होंने पहले दौर में दक्षिण अफ़्रीका के डयेयी का सामना किया है. ज़ाहिर सी बात है कि शुरुआती दौर में हुसामुद्दीन को भी बेहद आसान ड्रॉ मिला है. उन्होंने 5-0 से डयेयी को हराकर क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बना ली है.
इनके अलावा 67 किलो भार वर्ग में रोहित टोकस, 75 किलो में सुमित कुंडु और 80 किलो में आशीष कुमार को पहले दौर में बाई मिली है.
रोहित टोकस प्री क्वार्टर फ़ाइनल में घाना के मुक्केबाज़ का सामना करेंगे. सुमित कुंडु प्री क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पीटर्स से भिड़ेंगे. वहीं आशीष कुमार भी प्री क्वार्टर फ़ाइनल में नियू के मुक्केबाज़ का सामना करेंगे. आशीष कुमार 28 साल के हैं और वह अपने भार वर्ग में साल 2015 में राष्ट्रीय चैंपियन बने. उन्होंने साल 2019 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता.
पुरुष वर्ग में भारत के आठ मुक्केबाज़ पदक पर हाथ आज़माएँगे. इनमें 92 किलो में भाग लेने वाले संजीत कुमार और +92 किलो में उतरने वाले सागर अहलावत भी शामिल हैं.
हालांकि संजीत कुमार प्री क्वार्टर फ़ाइनल में समोया के आलो लीयू से हार गए. वहीं सागर अहलावत कैमरून के मुक्केबाज़ का सामना करेंगे.
महिलाओं में लवलीना बोरगोहेन और निखत ज़रीन पर नज़रें
बर्मिंघम में आठ पुरुष मुक्केबाज़ों के अलावा चार महिला मुक्केबाज़ भी अपने पंच का दम दिखाएंगी. इनमें 48 किलो भार वर्ग में नीतू, 50 किलो में निकहत ज़रीन, 60 किलो में जैस्मिन लम्बोरिया और 70 किलो भार वर्ग में उतरने वाली लवलीना बोरगोहेन शामिल हैं.
इन चारों ही महिला मुक्केबाज़ों में पदक जीतने की क्षमता और दमख़म है. इसकी वजह इनकी शानदार ट्रेनिंग और अतीत में मिली विश्व स्तरीय कामयाबी है.
लवलीना बोरगोहेन
70 किलो भार वर्ग में मुक्केबाज़ी के रिंग में उतरने वाली लवलीना बोरगोहेन भारतीय चुनौती का सबसे बड़ा आकर्षण हैं. वह रिंग में उतरते ही दनादन मुक्कों की बोछार करने में माहिर हैं. इसका सबूत उन्होंने बीते टोक्यो ओलंपिक में भी दिया और कांस्य पदक जीता.
एमसी मैरीकॉम के बाद वह भारत की दूसरी ही महिला मुक्केबाज़ हैं जिन्होंने ऐसा कारनामा किया और विजेंद्र सिंह सहित भारत की केवल तीसरी मुक्केबाज़ है. इसके अलावा वह दो बार विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीत चुकी हैं.
टोक्यो ओलंपिक के बाद उन्होंने अपनी कमियों को सुधारने के लिए काफ़ी मेहनत की है जिसमें मुक़ाबले पर अपना ध्यान पूरी तरह केंद्रित करना भी है.
लवलीना बोरगोहेन राष्ट्रमंडल खेलों में अपने मुक़ाबले शुरू होने से पहले तब चर्चा में आईं जब उन्होंने अपनी व्यक्तिगत कोच को लेकर ज़ोर-शोर से अपनी आवाज़ उठाई. लवलीना का कहना था कि उनकी कोच को खेल विलेज में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है. अच्छी बात यह है कि सारा मामला समय रहते सुलझ गया है.
24 साल की लवलीना बोरगोहेन ने पहले दौर में न्यूज़ीलैंड की निकोल्सन का सामना करते हुए उन्हें 5-0 से हराया है. लवलीना बोरगोहेन टोक्यो ओलंपिक में जीते गए कांस्य पदक से आज भी संतुष्ट नहीं है. स्वर्ण पदक ना जीत सकने के मलाल को वह इन राष्ट्रमंडल खेलों में में स्वर्ण पदक जीतकर कम कर सकती है.
निकहत ज़रीन
लवलीना बोरगोहेन के बाद निकहत ज़रीन निस्संदेह वर्तमान समय में भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला मुक्केबाज़ हैं. निकहत ज़रीन ने साल 2019 में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता, लेकिन उनके नाम की धूम मची इसी साल इस्तांबुल में हुई विश्व महिला मुक्केबाज़ी चैम्पियनशिप के बाद जहां उन्होंने अपने भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता.
एकतरफ़ा फ़ाइनल में उन्होंने थाईलैंड की जिटपोंग जुटामस को 5-0 से हराया. उनसे पहले एमसी मैरीकॉम ने साल 2018 में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था. कभी एमसी मैरीकॉम से ही चयन को लेकर विवादों में रहने वाली निकहत ज़रीन विश्व महिला मुक्केबाज़ी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पाँचवीं मुक्केबाज़ हैं.
निकहत ज़रीन मूलतः 52 किलोग्राम भार वर्ग में खेलती हैं लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के लिए उन्होंने अपना वज़न घटाया क्योंकि 52 किलो भार वर्ग इन खेलों में शामिल नहीं है.
26 साल की निकहत ज़रीन राष्ट्रमंडल खेलों में मिलने वाली चुनौती से अनजान नहीं हैं और कहती हैं कि "केवल चार भार वर्ग में महिलाओं के मुक़ाबले होने से जीत के लिए बहुत अधिक संघर्ष होगा. वह ड्रॉ देखकर अपनी रणनीति तय करेंगी."
निकहत ज़रीन पहले दौर में मोज़ाम्बिक की मुक्केबाज़ बागाओ का सामना करेंगी.
महिलाओं में ही 48 किलो भार वर्ग में उतरने वालीं भारत की नीतू सीधे क्वार्टर फ़ाइनल में उतरेंगी जहां उनका सामना नॉर्दर्न आयरलैंड की क्लाईडे से होगा. इतना आसान ड्रॉ उन्हें आसानी से एक पदक तो दिला ही सकता है.
जैस्मिन लम्बोरिया
60 किलो में खेल रहीं भारत की जैस्मिन लम्बोरिया को भी सीधे सीधे क्वार्टर फ़ाइनल में खेलने का मौक़ा मिल रहा है. जहां उनका सामना न्यूज़ीलैंड की गारटोन से होगा. उसे जीतते ही वह पदक की दौड़ में शामिल हो जाएँगी.
पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की स्टार महिला मुक्केबाज़ एमसी मैरीकॉम के अलावा पुरुष वर्ग में गौरव सोलंकी और विकास कृष्ण यादव ने स्वर्ण पदक जीते थे. देखना है कि इस बार मुक्केबाज़ भारत को कितने और किस रंग के पदक दिलाते हैं. (bbc.com)


