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कॉमेडियन किंग के साथ जनता की बड़ी कॉमेडी, जानिए पांव तले से कैसे खिसकी सियासी जमीन
10-Mar-2022 4:50 PM
कॉमेडियन किंग के साथ जनता की बड़ी कॉमेडी, जानिए पांव तले से कैसे खिसकी सियासी जमीन

चंडीगढ़. एक स्टार खिलाड़ी रहे और कॉमेडियन के बादशाह नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जनता ने उनसे भी बड़ी कॉमेडी कर दिखाई है. जिसके चलते वह पंजाब की सियासत में खुद हंसी का पात्र बन गए हैं. आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवन ज्योत कौर ने उन्हें सियासी जमीन पर धूल चटा दी है. पंजाब मॉडल, करतारपुर कॉरिडोर खोलने में उनकी भूमिका और कैप्टन अमरिंदर सिंह को सत्ता से हटाने के कारण उनकी खासी भूमिका रही लेकिन इससे उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ. सियासी खेल में वे भी AAP की आंधी के शिकार हो गए.

सिद्धू को ड्रग माफिया और बेअदबी के मामलों में न्याय के लिए स्टैंड लेने से भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ. सुखबीर बादल के बहनोई बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग के एक पुराने मामले में चन्नी सरकार ने एफआईआर दर्ज की जो बाद में सिद्धू के गले की फांस ही बन गई. दूसरा उनकी बेवाक भाषा भी उनके हारने का कारण बनी.

नवजोत सिद्धू के बेबाक बोलने और गुस्से में आकर प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देने से उनकी जनता में छवि खराब हुई क्यों वे इस स्टैंड पर सिर्फ अपने अहंकार के कारण अड़े थे, जो जनता को समझ आ रहा था. टीम वर्क के बजाय ‘वन मैन आर्मी’ के रूप में काम करने का उनका अंदाज उनके खुद को और कांग्रेस के लिए नुक्सानदेह रहा.

सिद्धू अपनी ही पार्टी के नेताओं को बेवकूफ और खुद को एक विद्वान साबित करने की कोशिश कर रहे थे. उनके हलके लोगों का कहना है कि वह भी जनता से कम ही मिलते थे, उन्हें कोई मिलने भी चला जाए तो वह उसे चाय तक के लिए नहीं पूछते थे. सिद्धू मालवा इलाके के जाट सिख हैं, लेकिन माझा उनकी कर्मभूमि है. वहीं हिंदू रीति-रिवाजों के मानने के चलते शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ हिंदुओं में भी उनकी अच्छी पकड़ थी.


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