रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 7 नवंबर। सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा चर्च और ईसाइयों पर हमला करने और उनके घरों को आग लगाने का मामला सामने आया है। इस घटना को लकर क्रिश्चन समाज में आक्रोश है। घटना 3 नवम्बर की है जब नक्सलियों ने गांव सिमली पंचायत मिलमपल्ली थाना जगरगुंडा तहसील कोंटा सुकमा में नक्सली मुचाकी देवा उर्फ कैलाश, झिथरू, और संदीप ने 200 की भीड़ के साथ, हिंसा और आगजनी की।
क्रिश्चन फोरम के अध्यक्ष अरूण पन्नालाल ने रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता कर बताया कि पीडि़त देवा माडवी और मडकामी संतोष गांव के मडकाम सन्ना, मडक़ाम बोदा, कवासी देवा, कवासी इरमा, ईसाई चर्च जाने का विरोध कर धमकी दी जा रही थी। इस संबंध में ग्राम पंचायत भी बुलाई गई थी, जिसमें गांव के लोगों ने कहा कि इन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया है, सिर्फ बाईबल पढते और भजन करते हैं। इसमें कोई विरोध नहीं है। ये 25 सालों से शांति से रहते आ रहें है, हमें कोई परेशानी नहीं है। विरोधी पक्ष के मडक़ामी सन्ना, मडकामी बोदा, कवासी देवा और कवासी इड़मा ने नक्सली मुचाकी देवा, झिथरू और संदीप को गांव में बुलाया, जहां पीडि़तों के चर्च जाने के कर उसके घरों में आग लगा दी।
फोरम का आरोप है कि पीडि़तों के थाना जाने पर पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया। कहा गया कि आधार कार्ड पर क्रिश्चयन लिखवा के लाओ कहा उसके के बाद ही हम कार्रवाई करेंगे।
सरकार का दावा है कि नक्सलवाद छत्तीसगढ़ से खत्म हो चुका है। फिर यह नया नक्सली समूह कौन सा है। नक्सली, पुलिस, भगवा अतिवादी और सरकार सभी धर्म छोडऩे की एक ही भाषा क्यों बोल रहें है।


