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किसानों का सरकार के प्रस्ताव पर लिखित जवाब देने से इनकार
12-Dec-2020 8:46 AM
किसानों का सरकार के प्रस्ताव पर लिखित जवाब देने से इनकार

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों संगठनों ने क़ानूनों में संशोधनों के सरकार के प्रस्ताव पर लिखित प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है.

उनका कहना है कि वो पहले से ही इन संशोधनों को खारिज कर चुके हैं.

किसान संगठनों ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करके कहा था कि इन्हीं संशोधनों की बात पांच दिसंबर की बैठक में भी की गई थी लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया था.

शुक्रवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार को अपने प्रस्ताव पर किसानों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है. ये प्रस्ताव मंगलवार को भेजे गए थे.

उन्होंने उम्मीद जताई कि ये गतिरोध जल्दी ही ख़त्म हो जाएगा.

कृषि मंत्री ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, ‘’मुझे लगता है कि हम समाधान निकाल लेंगे. मुझे उम्मीद है. मैं किसानों यूनियनों से आग्रह करूंगा कि वो गतिरोध को ख़त्म करें. सरकार ने उन्हें प्रस्ताव भेजा है. अगर उन्हें क़ानून के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो उस पर चर्चा की जाएगी.’’


किसान संगठनों का कहना है कि लिखित प्रतिक्रिया भेजने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि वो प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर चुके हैं.

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, ‘’हमने कोई पत्र नहीं भेजा है. ये प्रस्ताव हमने पांच दिसंबर की बैठक में खारिज कर दिए थे. हमने कहा था कि हम संशोधनों पर कोई चर्चा नहीं करेंगे और कृषि क़ानूनों को रद्द करने के लिए हां या ना में जवाब देने की मांग की थी.’’

बातचीत सिर्फ़ एक शर्त पर शुरू हो सकती है जब सरकार क़ानून रद्द करने के प्रस्ताव पर बात करे.

लेफ़्ट पार्टियों से जुड़ी अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा कि कृषि मंत्री को बातचीत में बाधा पैदा करने के लिए जिम्मेदारी लेना चाहिए.

संगठन ने कहा, ‘’कृषि मंत्री को बताना चाहिए कि गृह मंत्री अमित शाह ने बातचीत की प्रक्रिया में बाधा क्यों डाली और संशोधनों का प्रस्ताव फिर से क्यों भेजा, जिसे पहले ही खारिज किया जा चुका है.’’

गुरुवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक 106 पन्नों का दस्तावेज जारी किया था जिसमें कृषि क़ानूनों और किसानों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया था.

इसमें बताया गया था, ‘’एमएसपी ख़त्म नहीं की जाएगी; एपीएमसी मंडियों को बंद नहीं किया जाएगा, किसानों की जमीन वापस नहीं ली जाएगी और खरीदार ज़मीन में बदलाव नहीं कर पाएंगे.’’

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा कि वो इन दस्तावेज़ों को खारिज करते हैं क्योंकि इनमें ‘काल्पनिक दावे’ किए गए हैं. (BBC)


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