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एमपी में अब नगरीय निकाय के चुनाव की आहट
07-Dec-2020 2:35 PM
एमपी  में अब नगरीय निकाय के चुनाव की आहट

संदीप पौराणिक
भोपाल, 7 दिसंबर |
मध्यप्रदेश में विधान-सभा के उपचुनाव होने के बाद अब नगरीय निकाय चुनाव की आहट तेज हो गई है क्योंकि 9 दिसंबर को नगर निकायों के महापौर और अध्यक्षों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। संभावना इस बात की जताई जा रही है कि नगरीय निकाय के चुनाव जनवरी में हो सकते हैं।

राज्य में हुए विधानसभा के उपचुनाव में जीत मिलने के बाद भाजपा की सरकार स्थाई हो गई है क्योंकि उसे पूर्ण बहुमत हासिल हो चुका है। अब नगरीय निकायों की चर्चाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस ने अपने स्तर पर इसकी तैयारियां भी तेज कर दी हैं।

बताया गया है कि प्रदेश के नगर पालिक निगमों, नगर पालिका और नगर परिषदों के आगामी सामान्य निर्वाचन के लिये महापौर व अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्यवाही नौ दिसम्बर को भोपाल में की जायेगी। महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्यवाही 407 नगरीय निकायों के लिये की जाएगी। इनमें 16 नगरपालिका निगम, 99 नगरपालिका और 292 नगर परिषद हैं।

राज्य में नगरीय निकाय के चुनाव जनवरी में होने की संभावना बनी हुई है। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी कहा है कि नगरीय निकाय के चुनाव नए साल के पहले महीने में हो सकते हैं। प्रदेश में नगरीय निकायों के लिए महापौर का चुनाव सीधे जनता के द्वारा ही होगा और इस सिलसिले में प्रदेश सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है और अगले विधानसभा सत्र जो 28 से 31 दिसंबर के बीच होने वाला है, उसमें अध्यादेश को विधेयक के रूप में पेश कर पारित कराया जाएगा।

कुल मिलाकर देखा जाए तो नगरीय निकाय के चुनाव जनवरी में होने की संभावना बनी हुई है। यही कारण है कि भाजपा इन चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार, मंडल निगमों के अध्यक्ष के साथ पार्टी की कार्यसमिति को अंतिम रुप दे देना चाहती है ताकि जो अन्य सक्षम नेता इन स्थानों पर समायोजित होने से रह जाएं उन्हें नगरीय निकाय के चुनाव में मौका दिया जाए।

कांग्रेस के प्रवक्ता अजय यादव का कहना है कि पार्टी पूरी ताकत से नगरीय निकायों के चुनाव लड़ेगी, इस बार उम्मीदवार क्षेत्रीय स्तर पर ही तय किए जाएंगे। इसके लिए पार्टी ने खास रणनीति बनाई है। प्रदेश स्तर पर पार्टी अपना होमवर्क पूरा कर चुकी है। इसके साथ ही जिला इकाईयों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं और स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार तय करने के लिए भी व्यवस्था की गई है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा का नगरीय इलाके में वोटबैंक है और पार्टी की केाशिश रहेगी कि यह बना रहे। केंद्र व राज्य में पार्टी की सरकार है, इसलिए वह शहरों में भी अपनी सरकार अर्थात नगरीय निकाय के चुनाव जीतने पर जोर लगाने से पीछे नहीं रहेगी। कांग्रेस के लिए भी यह बड़ी चुनौती रहने वाले है क्योंकि पार्टी अब भी अंर्तद्वंद के दौर से गुजर रही है।(आईएएनएस)
 


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