राष्ट्रीय

'तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत', पोंगल समारोह में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी
14-Jan-2026 1:06 PM
'तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत', पोंगल समारोह में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी

 नई दिल्ली, 14 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल त्योहार के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। पोंगल समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पोंगल एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं, जिसमें मैं भी एक हूं। इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति में पोंगल बहुत खुशी का मौका होता है। इसमें हमारे अन्नदाता की मेहनत और धरती व सूरज के प्रति आभार का भाव है। इसके अलावा, यह त्योहार हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखने का महत्व सिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेरे लिए पिछले एक साल में तमिल संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना सच में एक बहुत ही सुखद अनुभव रहा है। तमिलनाडु में मुझे एक हजार साल पुराने गंगई कोंडा चोलपुरम मंदिर में प्रार्थना करने का सौभाग्य मिला।

उन्होंने कहा कि मैं वाराणसी में 'काशी तमिल संगमम' के दौरान इस कार्यक्रम की जीवंत सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ पल-पल जुड़ा रहा और उसे महसूस किया। जब मैं पंबन ब्रिज का उद्घाटन करने रामेश्वरम गया, तो मैंने एक बार फिर तमिल विरासत की समृद्धि और महानता को देखा। पीएम मोदी ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है।

तमिल संस्कृति सदियों को जोड़ती है। हमारी तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है। मैं 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की जिस भावना की बात करता हूं, उसे पोंगल जैसे पर्व और सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि पोंगल का त्योहार हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के प्रति आभार सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारे रोजाना के जीवन का एक जरूरी हिस्सा बनना चाहिए। जब ​​धरती हमें इतना कुछ देती है, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसकी देखभाल करें और इसे बचाएं। पीएम मोदी ने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना, पानी बचाना और आने वाले संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। -(आईएएनएस)
 


अन्य पोस्ट