मनेन्द्रगढ़-चिरिमिरी-भरतपुर
14 मार्च तक चलेगा कार्यक्रम
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
मनेंद्रगढ़, 12 मार्च। राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 08 मार्च से 14 मार्च 26 तक डॉ अविनाश खरे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य आधिकारी मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर के मार्ग दर्शन में मनाया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों पर ग्लूकोमा की बीमारी के बारे में जानकारी दी जा रही हैं एवं लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
इस संबंध में डॉ अमित मिर्रे नेत्र रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ ने जानकारी दी कि ग्लूकोमा को कांचबिंदु भी कहा जाता हैं, ग्लूकोमा ऐसी अवस्था है जिसमें नेत्र गोलक के अंदर का दबाव (इंट्रा ऑकुलर प्रेशर) बढ़ जाता है, प्रेशर बढऩे से आंख के पर्दे व नस को संवेदनहीन बना देता है। इसका समय से जांच उपचार नहीं होने से व्यक्ति दृष्टिहीन हो सकता हैं। प्रारंभ में इसका लक्षण दिखाई नहीं देता पर सामान्यत: आंख व सर में तेज दर्द बने रहना, नजर का कमजोर होना, चश्मा का नम्बर बार बार बदलना, बल्ब और प्रकाश श्रोत के चारों ओर इंद्रधनुष घेरे दिखाई देना, दृष्टि का दायरा कम होना, अगल-बगल देखने की क्षमता कम होना ग्लूकोमा के लक्षण है।। हमारे देश में 1.20 करोड़ के करीब ग्लूकोमा के मरीज हैं, अंधत्व का बड़ा कारण ग्लूकोमा भी है, आंखों की जांच समय समय पर कराते रहना चाहिए। नेत्र विशेषज्ञ डॉ भाषिता साहू ने बताया कि सामान्यत: 40 वर्ष के बाद होने वाली बीमारी है, 40 आयु के बाद नेत्र परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।
जिसके परिवार में किसी को ग्लूकोमा की बीमारी हो, आंख में चोंट लगा हो, अधिक नम्बर का चश्मा लगा हो, बीपी शुगर के मरीज हो ऐसे लोगों का परीक्षण कराना चाहिए। ग्लूकोमा की जानकारी समय से पता चल जाने से ऑपरेशन, दवाई से काफी हद तक आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता हैं। ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान डॉ.मनोज सिंह डॉ भाषिता साहू,डॉ अमित मिर्रे आई सर्जन द्वारा 10 मोतियाबिंद मरीजों का सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में ऑपरेशन किया गया। इस दौरान किरण वर्मा, वर्षा श्रीवास्तव, आरडी दीवान , दशरथ राम, रजनीश कुमार, रामकरण साहू, रीमा सिंह, रीता मिश्रा, अरुण ताम्रकार, सुनीता रजक, संगीता, गिरधारी, आदि उपस्थित थे।


