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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (टेलीग्राफ)। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के करीब 82 फीसदी नीट-कामयाब छात्र-छात्राओं के नंबर अनारक्षित (सामान्य) वर्ग के न्यूनतम नंबरों से ऊपर हैं। इन आंकड़ों से यह प्रचलित धारणा गलत साबित होती है कि आरक्षित वर्गों के बच्चे प्रावीण्यता में सामान्य वर्ग के बच्चों से कमजोर रहते हैं।
राष्ट्रीय पात्रता और दाखिला परीक्षा (नीट) के नतीजों में से इन आरक्षित वर्गों के 81.98 फीसदी छात्र-छात्राओं ने सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए निर्धारित परसेंटाइल स्कोर, 50 से अधिक नंबर पाए हैं। सिर्फ 18 फीसदी ऐसे हैं जिनके परसेंटाइल स्कोर 50 से नीचे थे, लेकिन 40 से अधिक थे।
नीट के नियमों के मुताबिक आरक्षित वर्गों के 50 परसेंटाइल स्कोर से ऊपर वाले बच्चों को सामान्य वर्ग की सीटें मिलेंगी, और उनसे आरक्षित वर्ग की सीटें नहीं घिरेंगी। पिछले वर्ष भी सामान्य मेरिट लिस्ट में दलित आदिवासी और ओबीसी बच्चों में से 80 फीसदी शामिल थे।


