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अभी जब देश की एक सबसे बड़ी इम्तिहान, नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक सामने आया, और सरकार को यह इम्तिहान ही रद्द कर देना पड़ा, तो राजस्थान के सीकर जिले का एक नौजवान शिक्षक शशिकांत सुथार एकदम से खबरों में आया। नीट पेपर लीक को लेकर इस शिक्षक ने राज्य पुलिस में काफी माथा फोड़ा, लेकिन आखिर में कई दिन इंतजार करने के बाद जब उसने नीट को ईमेल किया, सीबीआई और पीएमओ को लिखा, तो उसके बाद सरकारी सिस्टम की चर्बी कुछ हिली, और जांच एजेंसियां इस शिक्षक के पास पहुंचीं। कैसा विचित्र संयोग रहा कि इस पेपर लीक करने वाले सबसे बड़े लोग महाराष्ट्र में कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोग ही थे, और लीक को उजागर करने का काम राजस्थान के एक कोचिंग सेंटर के इस शिक्षक, शशिकांत सुथार ने किया।
इस शिक्षक के लिए भी यह आसान रहता कि बहुत से दूसरे कोचिंग सेंटरों ने जिस तरह पेपर आऊट करवाने, उसे बेचने, और अपने कोचिंग सेंटर के बच्चों को पास करने की गारंटी करवाने की तरह यह शिक्षक भी लीक की जानकारी रहने पर चुप रह जाता। लेकिन जैसे ही उसे यह दिखा कि नीट में आया पर्चा तो तकरीबन पूरे का पूरा इम्तिहान की तारीख के कई दिन पहले से उसी क्रम में, और कॉमा-फुलस्टॉप सहित टेलीग्राम जैसी मैसेंजर सर्विसों में पहले से घूम रहा था, उसने किसी निजी खतरे की परवाह किए बिना भांडाफोड़ किया, और फिर देश की यह छात्रों के साथ कीएक सबसे बड़ी बेईमानी खारिज करनी पड़ी। इससे एक बात साबित होती है कि एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है।
अब हिन्दी की इस पुरानी कहावत को इस तरह की कुछ और घटनाओं से भी जोडक़र देखें, तो यह साबित होता है चना फोडऩे वाली भाड़ के भीतर का कोई अकेला चना भी पूरी भाड़ को फोड़ सकता है। एक अकेले व्यक्ति के किए हुए से क्या-क्या हो सकता है, इसकी भारत से अधिक बड़ी मिसाल दुनिया में और कहां हो सकती है? गांधी को आज इस देश में राष्ट्रपिता या महात्मा कहने से कुछ लोगों को परहेज हो सकता है, लेकिन गांधी के गुजर जाने के पौन सदी बाद भी आज तक दुनिया में गांधी से अधिक प्रतिमाएं तो किसी की नहीं लग पाईं! और आने वाला वक्त गवाह रहेगा कि गांधी की किसी कोशिश के बिना दुनिया का कायम किया हुआ यह रिकॉर्ड तोड़ा भी नहीं जा सकेगा। एक अकेले चने ने अंग्रेजी शासन का भाड़ फोडक़र रख दिया था, जिसकी लाठी महज अपने बदन के सहारे के लिए थी, उस लाठी से तो गांधी ने गोडसे तक को नहीं मारा था, खुद मर गए थे। इसलिए अकेला चना भाड़ तो फोड़ सकता है, लेकिन उस चने को अपनी परवाह छोडक़र काम करना होता है।
अभी जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने देश के बेरोजगार नौजवानों को कॉकरोच करार दिया, उन्हें परजीवी (पैरासाइट) कहा, तो उसके खिलाफ अमरीका के बॉस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ रहे भारतीय मूल के एक नौजवान अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी नाम का एक समूह बनाया, हफ्ते भर के भीतर इंस्टाग्राम पर उसे दो करोड़ से अधिक लोग फॉलो करने लगे, और भारत में तो कांग्रेस और भाजपा, इन दोनों पार्टियों के मिलकर भी फॉलोअर कॉकरोच से कम ही हैं। भारत के नौजवानों को उनके अपमान का अहसास करवाना, और सोशल मीडिया पर उन्हें एक साथ जोडऩा, यह काम एक भारतवंशी नौजवान ने इस हद तक कर दिखाया कि उसका ट्विटर पेज एक्स से हटा दिया गया है, उसके इंस्टाग्राम पेज को हैक कर लिया गया, और उसकी वेबसाइट को भी शायद रोक दिया गया है। अब यह रोकने के पीछे सरकार है, या हड़बड़ाए हुए चीफ जस्टिस हैं, यह अभी रहस्य की बात है, लेकिन देश के बेरोजगारों को एक जेन-जी आंदोलन की तरह ऑनलाईन जोड़ देने का जो काम इस नौजवान ने किया है, वह असाधारण और अभूतपूर्व है। एक अकेले चने ने भाड़ को ऐसे फोड़ दिया कि दुनिया की कुछ सबसे बड़ी ताकतों को उसके पेज ब्लॉक करवाने पड़ रहे हैं, उसने नौजवान बेचैनी को एक ऐसी आवाज दे दी कि उस गूंजती हुई आवाज के साए में चीफ जस्टिस के लिए सोना मुश्किल हो गया होगा, वैसे भी जब कॉकरोच पूरे बदन पर रेंगने लगें, तो भला सो कौन सकते हैं!
लोगों को याद होगा कि बीते कई बरस से इंटरनेट पर विकीलीक्स नाम की एक वेबसाइट पर दुनिया भर की ताकतवर सरकारों, फौजों, और खुफिया एजेंसियों को जितनी बड़ी चुनौती दी गई, वैसी इतिहास में कभी नहीं ली गई थी। इसके संस्थापक जूलियन असांज ने अकेले ही सरकारों के गंदे और खूनी रहस्य का भांडाफोड़ शुरू किया, एक-एक बार में लाखों दस्तावेज जनता के बीच डाल दिए, जिसमें देशों की सरकारों, फौजों, और विदेश विभागों के गोपनीय दस्तावेज भी थे। जंग के पीछे के रहस्य, और आम नागरिकों की मौतों की जानकारियां भी थीं। इसने भी साबित किया कि एक बहुत छोटी सी टीम के साथ, या बिल्कुल अकेले ही जूलियन असांज ने किस तरह पूरी दुनिया की सरकारों को नंगा करके दिखा दिया। यह अलग बात है कि 2010 से शुरू हुए इस अभियान के चलते 2012 से उन्हें अपनी आजादी छोडऩी पड़ी, और बरसों तक जेल में रहकर अब वे बाहर आए हैं, और अपने देश ऑस्ट्रेलिया चले गए हैं। इस एक अकेले चने ने दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के सबसे गोपनीय भाड़ को फोड़ डाला। इसलिए एक व्यक्ति की ताकत को कम आंकना अच्छा नहीं होगा।
हाल के बरसों में ग्रेटा थुनबर्ग नाम की एक किशोरी ने अपने देश, स्वीडन की संसद के बाहर जलवायु बचाने के लिए जो आंदोलन शुरू किया, उसने पर्यावरण को लेकर इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा खड़ा कर दिया कि दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के मुखिया भी उसे अनदेखा नहीं कर सके। 16 बरस की उम्र में टाईम पत्रिका ने उसे वर्ष का व्यक्तित्व करार दिया। 2019-20 और 21 में उसका नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए अलग-अलग लोगों ने भेजा। उसने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सरकारों की जिम्मेदारी के मुद्दे को इतने वजनदार तरीके से उठाया कि दुनिया देखती रह गई। लेकिन जलवायु से बिल्कुल अलग मानवाधिकार के मुद्दे पर वह फिलीस्तीनियों के लिए राहत लेकर गाजा तक पहुंच रही थी कि इजराइली फौजों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। कम उम्र में, बिना किसी संगठन के, अकेले भी किस तरह जागरूकता और चेतना को बढ़ाने का काम किया जा सकता है, यह इस किशोरी ने कर दिखाया। उसके हौसलामंद बयानों की गूंज दुनिया भर की नौजवान पीढ़ी में हुई, और जिन देशों में यह पीढ़ी जागरूक है, वहां के लोग भी अपनी सरकारों के सामने खड़े होकर सवाल करने लगे। एक अकेले चने ने एक बार फिर भाड़ फोडक़र दिखा दी!
दुनिया में संगठन एक किस्म की ताकत भी होते हैं, और वे पांवों की बेडिय़ां भी बन जाते हैं। संगठनों पर मोहताज लोग उन संगठनों के हित-अहित की फिक्र को ढोने के लिए भी मजबूर हो जाते हैं। इसलिए कई लोग बिना किसी संगठन के ही जागरूकता का अभियान अधिक दूरी तक ले जा सकते हैं। आज के वक्त में किसी भी तरह के संगठन की विश्वसनीयता बड़ी सीमित रहती है। ऐसे में किसी व्यक्ति की विश्वसनीयता असीमित हो सकती है, कम से कम कुछ सीमित के समय के लिए तो असीमित हो ही सकती है। इसलिए अपने स्तर पर अपनी वैश्विक जिम्मेदारी को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसा करने के लिए अपनी ताकत को तौलने की जरूरत भी नहीं रहती। लोगों को खुद को हासिल आजादी का पूरा इस्तेमाल करना पड़ता है, और नाजायज प्रतिबंधों के खिलाफ जायज हक की आवाज उठानी पड़ती है। इन दो बातों से लोग किसी मुद्दे को बहुत दूर तक ले जा सकते हैं, और गांधी की शहादत से यह भी साबित हो चुका है कि खून-खराबे के बीच अमन की बात करने वाला एक निहत्था आदमी अकेले ही कितना लंबा सफर तय कर सकता है, कितने लोगों को राह दिखा सकता है। इसके लिए खुद का बहुत ऊंचे दर्जे का साफ-सुथरा होना जरूरी रहता है, ऐसा अगर हो तो एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है, इतिहास तो यह कई बार साबित कर चुका है।


