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कर्ज, रेत कारोबार की रंजिश और जलन ने ली युवा कारोबारी की जान, ‘ट्रिपल आई गैंग’ के तीन शूटर गिरफ्तार
जांजगीर-चांपा, 24 मई। बिर्रा थाना क्षेत्र के करही गांव में हुए चर्चित गोलीकांड का आखिरकार पुलिस ने खुलासा कर दिया है। करीब एक महीने तक चली लंबी जांच, सात राज्यों में दबिश और 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे पुरानी उधारी, रेत कारोबार की प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत दुश्मनी मुख्य वजह थी।
शनिवार को बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने एसपी विजय पांडेय और प्रभारी एसपी निवेदिता पाल की मौजूदगी में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि युवा कारोबारी आयुष कश्यप की हत्या और उसके छोटे भाई को गोली मारकर घायल करने वाले आरोपियों तक पहुंचने के लिए ऑपरेशन हंट चलाया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपराध को इस तरह अंजाम दिया था कि लगे कि बाहरी शूटर आए थे। इसके लिए तीन अलग लोगों को केवल सीसीटीवी कैमरे तोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि घर में घुसने वालों की पहचान न हो सके। जांच के दौरान साइबर सेल की मदद से कॉल डंप डेटा खंगाला गया और 200 से ज्यादा कैमरों की फुटेज की जांच की गई।
पुलिस टीमों ने गुजरात, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर तक दबिश दी। आखिरकार पुलिस ने करही गांव के ही हेमंत बघेल, भूषण बघेल और अमित टंडन को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर महानदी किनारे से 7.65 बोर की पिस्टल, मैगजीन, खाली मैगजीन और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रिपल आई गैंग नाम से गांव के कुछ युवकों ने गिरोह बना रखा था। करीब 11 सदस्यों वाला यह गैंग अवैध रेत उत्खनन, वसूली और सुपारी किलिंग जैसे कामों में शामिल था। हत्या की इस साजिश में तीन लोगों को कैमरे तोड़ने और तीन को गोली चलाने का जिम्मा दिया गया था।
पुलिस के मुताबिक भूषण बघेल के भाई ने आयुष कश्यप के पिता समयलाल कश्यप से पांच लाख रुपए उधार लिए थे। रकम और ब्याज की लगातार मांग किए जाने से भूषण नाराज था। वर्ष 2023 में ही उसने समयलाल कश्यप की हत्या के लिए सात लाख रुपए की सुपारी तय की थी, लेकिन योजना सफल नहीं हो सकी। इसी बीच आयुष ने रेत, सीमेंट और सरिया कारोबार में तेजी से सफलता हासिल कर ली, जिससे आरोपियों में जलन और बढ़ गई।
एसपी विजय पांडेय ने बताया कि शूटरों को महज 50-50 हजार रुपए देने की बात तय हुई थी। आरोपियों को अब तक रकम नहीं मिली थी। अमित टंडन भारी कर्ज में डूबा था, जबकि अन्य आरोपी भी आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। मुख्य साजिशकर्ता ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि आयुष की हत्या के बाद कारोबार पर कब्जा कर उन्हें हिस्सा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, हत्या के बाद आयुष का मोबाइल फोन चोरी कर उसके बिजनेस से जुड़ी जानकारी हासिल करने की भी योजना बनाई गई थी।
आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि यह हत्या अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी। पुलिस अब मुख्य साजिशकर्ता से पूछताछ कर रही है और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


