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असम विधानसभा चुनाव: ये हैं 6 अहम सीटें, जिन पर टिकी हैं नज़रें
04-May-2026 9:35 AM
असम विधानसभा चुनाव: ये हैं 6 अहम सीटें, जिन पर टिकी हैं नज़रें

-प्रेरणा

असम में 126 विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है. डाक मत पत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है, अब ईवीएम खुलने शुरू हो गए हैं.

बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस यहां तीसरी बार सत्ता में आने के लिए जोर लगा रहा है. जबकि कांग्रेस खोई हुई सियासी जमीन पाना चाह रही है.

असम विधानसभा चुनाव की 6 सीटें सबसे अहम मानी जा रही हैं, जहां से हाई प्रोफ़ाइल उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.

जालुकबाड़- यह प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सीट है. वह साल 2001 से लगातार यहां से जीतते आ रहे हैं. इस बार उन्हें कांग्रेस की उम्मीदवार विदिशा नियोग से चुनौती मिल रही है.

जोरहाट- कांग्रेस के लोकसभा सांसद गौरव गोगोई की सीट है. वह असम के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगई के बेटे हैं. लोकसभा सांसद होते हुए भी उन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया है. उनके सामने बीजेपी के उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी हैं. वह यहां से बीजेपी के मौजूदा विधायक भी हैं और पहले भी इस सीट से जीतते रहे हैं.

बीनाकांदी सीट - एआईयूडीएफ़ पार्टी के संस्थापक बदरुद्दीन अजमल की सीट है. उनका मुकाबला इस बार असम गण परिषद के शहाबुद्दीन मजूमदार और असम जातीय परिषद के रेजाउल करीम चौधरी के बीच है. असम गण परिषद एनडीए गठबंधन और असम जातीय परिषद महाजोट गठबंधन का हिस्सा हैं. पिछली बार बदरुद्दीन अजमल की पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी पर इस बार पार्टी ने अकेले ही चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया और 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. पिछली बार पार्टी ने कुल 16 सीटें जीती थीं. पार्टी का प्रभाव लोअर असम और बराक वैली के क्षेत्रों में हैं.

नज़ीरा सीट - नज़ीरा ऊपरी असम के शिवसागर ज़िले की सीट है. यहां मुकाबला कांग्रेस के मौजूदा विधायक और प्रदेश की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबाब्रता सैकिया बीजेपी के मयूर बोरोघैन में है. पिछले विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी और कांग्रेस ने इन्हीं दो उम्मीदवारों पर अपना भरोसा जताया था. तब के चुनाव नतीजों में देबाब्रता सैकिया और मयूर बोरोघैन के बीच जीत का अंतर काफ़ी कम था.

शिव सागर - यह सीट इसलिए अहम है क्योंकि यहां से रायजोर दल के संस्थापक अखिल गोगोई चुनाव लड़ रहे हैं. वह यहां के मौजूदा विधायक भी हैं. उनका मुकाबला एनडीए गठबंधन का हिस्सा असम गण परिषद के उम्मीदवार प्रोदीप हज़ारिका और बीजेपी के कुशाल दोवारी से है.

यह सीट इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि एक ही गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी बीजेपी और एजेपी ने यहां अपने उम्मीदवार उतारे हुए हैं. अखिल गोगोई पिछले विधानसभा चुनाव से पहले यानी 2019-2020 के दौरान प्रदेश में सीएए के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा बने थे अखिल गोगोई. उनके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत मुकदमा भी दर्ज हुआ और वह तकरीबन दो साल जेल में भी रहे.

इसके बावजूद यानी जेल में रहते हुए उन्होंने चुनाव लड़ा और जीते. बाद में उन्होंने अपनी पार्टी रायजोर दल का गठन किया. रायजोर दल, कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली महाजोट गठबंधन का हिस्सा है.

दिसपुर - इसे भी एक हाई-प्रोफाइल सीट कह सकते हैं.बीजेपी के उम्मीदवार प्रद्युत बोरदोलोई, जो पहले कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं, चुनाव से ठीक पहले पार्टी बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए. उनके इस कदम के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता जयंत कुमार दास ने पार्टी छोड़ दी और अब वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं.

कांग्रेस ने इस सीट से मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को उतारा है. ऐसे में तीनों उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर बन गई है, और स्थानीय स्तर पर इसे काफ़ी दिलचस्प मुकाबला माना जा रहा है. (bbc.com/hindi)


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