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तमिलनाडु में एक चरण में चुनाव कराने के सुझाव पर विचार किया जाएगा: मुख्य निर्वाचन आयुक्त
27-Feb-2026 9:17 PM
तमिलनाडु में एक चरण में चुनाव कराने के सुझाव पर विचार किया जाएगा: मुख्य निर्वाचन आयुक्त

चेन्नई, 27 फरवरी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराने का सुझाव दिया है और इस पर सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

तमिलनाडु में हाल में संपन्न मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को कुमार ने देश के लिए एक आदर्श और बड़ी सफलता बताया और कहा कि इससे मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बेहतर व्यवस्था के मामले में तमिलनाडु का विधानसभा चुनाव, बिहार चुनाव से भी आगे रहेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार का अनुभव यह दिखाता है कि हाल के दशकों में वहां के चुनाव सबसे त्रुटिरहित रहे। मुझे सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और पूरी चुनावी मशीनरी समेत प्रवर्तन एजेंसियों ने आश्वस्त किया है कि तमिलनाडु के चुनाव नए रिकॉर्ड बनाएंगे और बिहार से कहीं बेहतर होंगे।’’

तमिलनाडु में हाल में संपन्न मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए कुमार ने इसे देश के लिए एक आदर्श और बड़ी सफलता बताया और कहा कि इससे मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

कुछ राजनीतिक दलों की यह आलोचना कि इस प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटा दिए गए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जवाब में कहा कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

उन्होंने कहा कि हालांकि कानून के अनुसार 100 प्रतिशत मतदान अनिवार्य नहीं है, लेकिन तमिलनाडु में मतदान “बेहद उत्साहवर्धक और राजनीतिक चेतना के साथ” होता रहा है।

उन्होंने कहा कि एसआईआर का स्पष्ट उद्देश्य यह है कि कोई भी योग्य व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति उसमें शामिल न हो।

कुमार ने कहा कि राज्य में राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराने का सुझाव दिया है और इस पर सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ पता चल जाएगा कि चुनाव कितने चरण में होंगे।’’

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने राज्य के 75,000 मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

मतगणना प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने कहा कि ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) की अनिवार्य रूप से गिनती की जाएगी, साथ ही मतगणना पूरी होने के बाद भी कोई उम्मीदवार निर्धारित शुल्क जमा कर अगले सात दिन में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट का मिलान करा सकता है।

नयी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि ईवीएम की गिनती से पहले दो दौर में डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दक्षिण भारत में प्रचलित रही ‘कुदावोलाई’ व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु का लोकतंत्र के लिहाज से गौरवशाली अतीत रहा है।

‘कुदावोलाई' का शाब्दिक अर्थ मतदान पात्र होता है। दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में 10वीं सदी में चोल साम्राज्य के दौरान घड़े में मतपत्र डालकर मतदान की यह प्रथा प्रचलित थी।

उन्होंने कहा कि साफ और सही मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है और राज्य में एसआईआर को सफल बनाने में मदद करने वाले सभी अधिकारियों, विशेषकर ब्लॉक स्तर के मतदान अधिकारी (बीएलओ) को उन्होंने बधाई दी।

उन्होंने कहा, ‘‘आगामी चुनाव में युवाओं पर विशेष ध्यान रहेगा। कॉलेजों में चुनाव प्रचार के लिए 3,060 सहायक मतदान पंजीकरण अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। तमिलनाडु में 18-19 साल के 12.5 लाख से अधिक युवा मतदाता होंगे और 20-29 आयु वर्ग में एक करोड़ युवा मतदाता हैं।’’

वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक रूप से सक्षम लोगों के लिए मतदान केंद्रों की व्यवस्था भूतल पर की जाएगी।

तमिलनाडु में महिलाओं द्वारा संचालित 258 मतदान केंद्र, दिव्यांग-अनुकूलता वाले 47 मतदान केंद्र और 265 मॉडल मतदान केंद्र होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक मतदान केंद्र में 1,200 मतदाता वोट डाल सकेंगे। मतदाता पर्ची आमंत्रण जैसी होगी, जिसमें लोगों को मतदान के लिए घर से निकलने को कहा जाएगा और इसके दाहिनी ओर बूथ नंबर स्पष्ट रूप से लिखा होगा।’’

कुमार ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि तमिलनाडु में प्रलोभन-मुक्त, पारदर्शी, निष्पक्ष चुनाव कराने के हमारे वादे को हमारे तंत्र द्वारा पूरे देश और दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।’’

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग को आश्वस्त किया है कि चुनाव प्रलोभन-मुक्त होंगे।

चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को ऑनलाइन नामांकन दाखिल करने की अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार, नामांकन समय पर व्यक्तिगत रूप से जमा करना आवश्यक है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों के रूप में कार्य करने वाले जिलाधिकारियों, राज्य सरकार के अधिकारियों और राज्य में प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की।

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग, उप निर्चाचन आयुक्त संजय कुमार के अलावा तमिलनाडु की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनाइक भी इसमें शामिल हुईं। (भाषा)


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