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हारे नेता उम्मीद से, दोनों ही दलों में लॉबिंग तेज
18-Feb-2026 10:20 PM
हारे नेता उम्मीद से, दोनों ही दलों में लॉबिंग तेज

  राज्यसभा चुनाव : नामांकन 26 फरवरी से  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 फरवरी। राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस में इस बार स्थानीय चेहरे को प्रत्याशी बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। खास बात यह है कि कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा में भी हालिया चुनावों में पराजित कई नेता राज्यसभा टिकट की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। नामांकन की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी। कांग्रेस से फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधानसभा के वर्तमान संख्या बल के आधार पर कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही दोनों दलों में दावेदार सक्रिय हो चुके हैं।

कांग्रेस के भीतर इस बार स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है। वर्तमान में केटीएस तुलसी के अलावा राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन राज्यसभा में हैं। फूलोदेवी नेताम को छोड़कर अन्य सदस्य प्रदेश से बाहर के माने जाते हैं। चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव इस मुद्दे पर एकमत हैं कि राज्यसभा में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। बताया जाता है कि इन नेताओं ने प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के समक्ष भी अपनी बात रखी है।

कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, टीएस सिंहदेव और मोहन मरकाम के नाम प्रमुखता से चर्चा में बताए जा रहे हैं।

भाजपा ने अब तक प्रदेश से बाहर के किसी नेता को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा नहीं भेजा है। ऐसे में इस बार भी बाहरी चेहरे की संभावना कम मानी जा रही है। भाजपा में हाल के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पराजित कुछ नेता राज्यसभा के लिए प्रयासरत बताए जाते हैं। इनमें पूर्व राज्यसभा सदस्य सरोज पांडेय, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल, पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय और पूर्व सांसद गुहाराम अजगले सहित कई नाम चर्चा में हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों ने पूर्व में पराजित नेताओं को भी राज्यसभा भेजा है। कांग्रेस से लोकसभा चुनाव हारने के बाद मोतीलाल वोरा को राज्यसभा भेजा गया था। इसी तरह भाजपा में विधानसभा चुनाव हारने के बाद रामविचार नेताम और लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद सरोज पांडेय को राज्यसभा में स्थान दिया गया था। इन उदाहरणों को देखते हुए पराजित नेताओं की उम्मीदें बनी हुई हैं।


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