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एंबुलेंस में बेड के नीचे गुप्त चेंबर बना तस्करी कर रहे थे
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
महासमुंद, 8 जनवरी। पुलिस ने नशा तस्करी के एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसने जीवनदायिनी एम्बुलेंस को गांजा तस्करी का जरिया बनाया। एम्बुलेंस में ओडिशा से गांजा भर कर महासमुंद के रास्ते गंतव्य की ओर जा रहा था कि टेमरी पुलिस ने एम्बुलेंस को रोका। भीतर का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
पुलिस ने जिस एम्बुलेंस वाहन को कपड़ा है वह एम्बुलेंस तो है लेकिन फर्जी निकली। उसमें लगा नंबर नेट फर्जी निकला। एम्बुलेंस का नंबर ओडिशा के एक बस के नाम से रजिस्टर्ड है। एम्बुलेंस में छिपाकर 5 क्विंटल 20 किलो गांजा परिवहन हो रहा था। जिसकी कीमत 2.60 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पहली बार महासमुंद में एम्बुलेंस में गांजा तस्करी करते तस्कर पकड़ाए हैं।
कोमाखान थाना प्रभारी महेश साहू ने बताया कि रात में एक एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स और थाना कोमाखान के जवान को सूचना मिली कि सफेद रंग के एंबुलेंस में अवैध गांजा जा रहा है। उस वक्त टीम टेमरी नाके पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान फोर्स कंपनी का ट्रेव्लर्स एम्बुलेंस खरियार रोड ओडिशा से महासमुंद की ओर आते दिखी। जिसे रोका गया। वाहन एम्बुलेंस में चालक समेत तीन लोग सवार थे। जिसे उतारकर पूछताछ करने पर गोलमोल जवाब देने लगे।
संदेह होने पर वाहन की तलाशी ली गई। एम्बुलेंस के बेड के नीचे 14 नग सफेद रंग की प्लास्टिक बोरियों में भरा 280 किलो प्रत्येक बोरी में 20-20 किलो और 16 नग खाखी रंग के कार्टून में जिसमें मेडिकल का चिन्ह बना का हुआ पंपलेट चिपका हुआ था, में भरा 240 किलो गांजा मिला। कुल 5.20 क्विंटल गांजे ही बाजार में कीमत 2.60 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसके अलावा ट्रेवल्स एम्बुलेंस कीमती 5 लाख रुपए, 4 मोबाइल 10 हजार 500 रुपए, 10 हजार 500 रुपए को जब्त कर तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
गिरफ्तार आरोपियों में सागर वाघ निवासी जालना महाराष्ट्र, संजीव आहिरे, सुशील दामाड़े दोनों निवासी औरंगाबाद महाराष्ट्र को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस तरह महासमुंद पुलिस ने नंबर प्लेट बदलकर पुलिस को चकमा देने का प्रयास करते महाराष्ट्र पासिंग की कार समेत गांजे की बड़ी खेप बरामद किया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडेय का कहना है -रात में ही बड़ी मात्रा में महासमुंद से गांजा की खेप निकालने की तैयारी थी। रात करीब 12 बजे के आसपास तस्करों ने एक कार से ओडिशा से आकर रेकी की थी। उसके बाद फिर लौट गई। पुलिस अलर्ट हो गई और वाहनों की तलाशी शुरु कर दी। थोड़ी देर बाद एम्बुलेंस पुलिस के हाथ लग गई। तस्करों ने दो नंबर प्लेट भी रखा था। इनमें दो नंबर प्लेट महाराष्ट्र पासिंग की थी। इनमें से एक वाहन का नंबर सही है।
पुलिस के मुताबिक तस्करों ने पुलिस को किसी को भनक न लगे इसके लिए नया तरीका अपनाया था। मरीज के सोने लेटने वाले बेड के नीचे गुप्त चेंबर बनाया था। इसे इस तरह से डिजाइन किया था कि आम व्यक्ति तो दूर पुलिस भी शक न कर सके। लेकिन एम्बुलेंस में मरीज के बजाए भारी मात्रा में दवाई के कार्टून देखने पर पुलिस का शक गहरा गया। जब बेड के नीचे जांच की गई तो खाखी रंग के रखने के कार्टून में दवा रैपर चिपकाकर रखा हुआ था। खोलकर देखने पर गांजा मिला।
खास बात यह है कि तस्करों ने जिस एम्बुलेंस का उपयोग गांजा तस्करी के लिए किया वह महाराष्ट्र की गाड़ी है और सरकारी वाहन है। जिसकी लाइफ खत्म हो होने के बाद नीलामी में इस वाहन को एक संस्था ने खरीदा था। इसी गाड़ी को आरोपी गांजा तस्करी के लिए उपयोग में लाते थे। पुलिस की टीम महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गई है तथा मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है।


