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मनोज रूपड़ा के अपमान के विरोध में लेखकों, पत्रकारों और शिक्षाविदों ने उठाए सवाल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 9 जनवरी। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक–शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार की घटना पर देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अधिकांश प्रतिक्रियाओं में कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल के आचरण की निंदा करते हुए इसे साहित्य और अकादमिक गरिमा के खिलाफ बताया गया है।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल ने कहा कि आमंत्रित साहित्यकार का मंच से अपमान किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मनोज रूपड़ा जैसे वरिष्ठ कथाकार को जिस तरह कार्यक्रम छोड़ने को कहा गया, उसने विश्वविद्यालय की छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने साहित्य अकादमी के किसी जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए और इसे लेखकों के सम्मान के प्रति उपेक्षा बताया।
नई दिल्ली के पत्रकार शकील अख्तर ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस घटना ने विश्वविद्यालयों में घटते संवाद और लेखकों के प्रति सम्मान की कमी को उजागर किया है। उन्होंने इसे पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए अपमानजनक बताया और कहा कि मनोज रूपड़ा ने कार्यक्रम छोड़कर अपने आत्मसम्मान की रक्षा की।
लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कुलपति से सार्वजनिक माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि साहित्य के विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऐसे मामलों में स्पष्ट पक्ष लेना चाहिए।
दिल्ली के राजनीतिक विश्लेषक लक्ष्मण यादव और भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक ने इसे विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पतन और संवेदनहीनता का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि यह केवल एक कार्यक्रम का विवाद नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला है।


